TCS Nasik Case: टीसीएस नासिक मामले के बाद महाराष्ट्र सरकार सभी ऑफिसों की जांच करने जा रही है। यह देखा जाएगा कि कार्यस्थल पर यौन शोषण के खिलाफ बने नियमों का सख्ती से पालन हो रहा है या नहीं। इसके लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जाएगा।

14 मई को राज्य सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया है। महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने जिला कलेक्टर, महिला एवं बाल कल्याण अधिकारियों और दूसरे अधिकारियों को इंस्पेक्शन करने के निर्देश दिए हैं। इस जांच के जरिए देखा जाएगा कि प्रिवेंशन ऑफ सेक्सुअल हैरेसमेंट (POSH) एक्ट के तहत ऑफिसों में बनाई गई इंटरनल कमेटियां सही तरीके से काम कर रही हैं या नहीं।

राज्य सरकार का क्या निर्देश है?

इसके अलावा यह भी जांच होगी कि अगर कोई शिकायत आती है तो क्या नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है या नहीं। साथ ही कर्मचारियों को सही तरीके से ट्रेनिंग दी जा रही है या नहीं, इन सभी पहलुओं की पड़ताल की जाएगी। इंस्पेक्शन के लिए राज्य सरकार ने एक विस्तृत चेकलिस्ट भी जारी की है।

सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि अगर कोई कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम कर रहा है तो क्या कंपनी उसे भी जरूरी सुरक्षा और सहायता दे रही है या नहीं, इसकी जांच की जानी चाहिए। POSH नियम लागू होने के बाद कई कंपनियों ने इंटरनल कमेटियों का गठन तो कर दिया लेकिन वे सही तरीके से काम कर रही हैं या नहीं इस पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया।

क्या टीसीएस मामले से कनेक्शन?

राज्य सरकार के नोटिस में किसी एक कंपनी का जिक्र नहीं है, लेकिन यह कार्रवाई टीसीएस मामले के बाद शुरू हुई है। ऐसे में इसे उसी मामले से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार इस सर्कुलर के जरिए जानना चाहती है कि क्या कंपनियां अपने कर्मचारियों को पूरी सुरक्षा दे पा रही हैं या नहीं। साथ ही अगर कोई शिकायतकर्ता है तो उसकी शिकायत की निष्पक्ष और सही तरीके से सुनवाई हो रही है या नहीं।

सर्कुलर में यह भी कहा गया है कि जांच अधिकारी POSH कानून की धारा 25 के तहत कंपनियों की जांच कर सकते हैं। अगर कोई कंपनी नियमों का पालन नहीं करती पाई गई, तो उसके खिलाफ धारा 26 के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

TCS मामला क्या है?

नासिक पुलिस ने एक सीक्रेट ऑपरेशन कर टीसीएस कर्मचारियों के खिलाफ सबूत इकट्ठे किए थे। जांच के दौरान यौन उत्पीड़न, दबाव डालना और जबरन धर्म परिवर्तन कराने के आरोप सामने आए थे।

इस मामले मे 8 महिला कर्मचारियों ने सामने आकर आरोप लगाए कि उन पर लंबे समय से जबरन धर्म परिवर्तन का दबाव डाला जा रहा था। उन्हें शारीरिक शोषण का भी सामना करना पड़ा और कुछ विशेष धार्मिक प्रथाएं अपनाने के लिए मजबूर किया गया। इन आरोपों की जांच के लिए महिला पुलिसकर्मी हाउसकीपिंग वर्कर बन दफ्तर में दाखिल हुईं, वहीं पुरुष पुलिस अधिकारियों ने सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी शुरू की। कुछ महीनों तक लगातार जांच की गई, कंपनी में रहकर कंपनी की गतिविधियों पर ध्यान दिया गया। उसी आधार पर कई सबूत इकट्ठे हुए और इतने बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ। पुलिस ने इस मामले में आरोपी निदा खान को गिरफ्तार कर लिया है।

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