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सीबीएसई: इस साल से दसवीं के सभी विद्यार्थी देंगे बोर्ड परीक्षा

सीबीएसई ने दसवीं कक्षा में लागू स्कूल आधारित और बोर्ड आधारित परीक्षा प्रणाली को बंद कर इस वर्ष से सिर्फ बोर्ड आधारित परीक्षा कराने का निर्णय किया है।

Author नई दिल्ली | June 8, 2017 4:37 AM
सांकेतिक फोटो

सीबीएसई ने दसवीं कक्षा में लागू स्कूल आधारित और बोर्ड आधारित परीक्षा प्रणाली को बंद कर इस वर्ष से सिर्फ बोर्ड आधारित परीक्षा कराने का निर्णय किया है। वर्ष 2009-10 में परीक्षा सुधार करते हुए केंद्र सरकार ने निरंतर एवं व्यापक मूल्यांकन (सीसीई) लागू किया गया। अब छह साल बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले सीबीएसई इसमें बदलाव करने का फैसला किया है। इसको लेकर अभिभावकों से लेकर शिक्षकों की राय अलग-अलग है। एक निजी स्कूल के प्रधानाचार्य कहते हैं कि सीसीई एक बेहतर परीक्षा प्रणाली है जिसके अंतर्गत फोर्मेटिव टेस्ट (रचनात्मक परीक्षा) से पढ़ाने से सीखना के बीच के अंतराल को समाप्त किया जा रहा था। इसके माध्यम से बच्चे के अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर आने का मौका मिल रहा था। छह साल में शिक्षा और स्कूल से जुड़े लोगों ने इसे लागू करने में बहुत मेहनत की और जब इसका फल लेने का मौका आया तो इससे बंद करने का निर्णय किया गया। आरोप लगाए गए कि सीसीई की वजह से बच्चों के शिक्षा के स्तर में कमी आ रही है। उनके मुताबिक सीसीई के बंद होने के बाद पढ़ाई में शिक्षकों की ओर से किए गए इनोवेशन गायब हो जाएंगे।

हालांकि केंद्रीय विद्यालय की एक प्रधानाचार्य कुछ अलग सोच रखती हैं। उनका कहना है कि एक अच्छा शिक्षक हमेशा अपने विद्यार्थियों में कुछ न कुछ अलग ढूंढ़ता ही रहता है। ऐसे में यह कहना बिल्कुल गलत होगा कि सीसीई के नहीं रहने से बच्चों में छिपी प्रतिभा को बाहर आने का मौका नहीं मिलेगा। उनके मुताबिक सीसीई नहीं रहने से सिर्फ मूल्यांकन का तरीका बदलेगा और कुछ नहीं। प्रधानाचार्य ने कहा कि ऐसा कहना बिल्कुल गलत होगा कि सीसीई से पहले विद्यालयों में बच्चों की प्रतिभा को नहीं पहचाना जा रहा था या इसके बाद पहचानी नहीं जाएगी। दक्षिण दिल्ली में रहने वाले रामअवतार चौहान करीब दो दशक से शिक्षा क्षेत्र से जुड़े हुए हैं और इस वर्ष उनकी बेटी ऋतिका कक्षा दस में आई हैं। उनका है कि सीसीई के बेहतर प्रणाली थी और उसे बेहतर सोच के साथ ही लागू किया गया था लेकिन इस नई प्रणाली के मुताबिक न तो शिक्षकों प्रशिक्षण दिया गया और न ही स्कूलों में ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराई गर्इं। रामअवतार का कहना है कि भारतीय लोगों की मानसिकता है कि जब बिना मेहनत किए ही सब कुछ मिल रहा है तो मेहनत करने की क्या आवश्यकता है। यह मानसिकता सिर्फ छात्रों की ही नहीं बल्कि शिक्षकों की भी रही। इसी वजह से शिक्षकों ने पढ़ाना और विद्यार्थियों ने पढ़ना कम कर दिया। इसकी वजह से शिक्षा की गुणवत्ता में कमी आई।

वहीं सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक केके चौधरी के मुताबिक ऐसा कहना बिल्कुल गलत होगा कि सीसीई को सीबीएसई ने बंद या खत्म कर दिया है। उन्होंने बताया कि अगले साल से कक्षा दस में सभी विद्यार्थियों को बोर्ड आधारित ही परीक्षा देनी होगी लेकिन सीसीई उसी तरह से जारी रहेगा। पहले जहां स्कूल से 70 फीसद अंक मिलते थे, उन्हें कम करके 20 फीसद किया गया है।

 

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