ताज़ा खबर
 

नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले CAA के खिलाफ AASU ने असम में निकाला मशाल जुलूस

इस बीच, आसु के सदस्य पुलिस के साथ हुई एक झड़प में घायल हो गये। दरअसल, पुलिस ने तेजपुर में उन्हें मशाल जुलूस निकालने से रोकने की कोशिश की थी।

Author गुवाहाटी | Updated: January 23, 2021 8:00 AM
CAA, AASU, Torch Rallyगुवाहाटी में All Assam Students Union (AASU) के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार रात टॉर्च रैली निकाली। यह प्रदर्शन CAA के खिलाफ था। (फोटोः पीटीआई)

ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसु) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की असम की यात्रा से ठीक पहले अपनी मांगों के समर्थन में शुक्रवार को मशाल जुलूस निकाला। उनकी मांगों में मुख्य रूप से संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) रद्द करना शामिल है।

आसु के सलाहकार समुज्ज्ल भट्टाचार्य और अध्यक्ष दीपांक कुमार नाथ को पुलिस अधिकारियों के साथ तीखी बहस करते देखा गया। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि मशाल सौंपे जाने पर ही उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति दी जाएगी।

भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘हमने मशालें सौंपने से इनकार कर दिया क्योंकि यह हमारे विरोध प्रदर्शन कार्यक्रम का हिस्सा था और हम इसे नहीं बदलेंगे।’’
उन्होंने प्रदर्शन को कुचलने के लिए पुलिस भेजने को लेकर मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल की आलोचना की।

उल्लेखनीय है कि सोनोवाल उस वक्त आसु के अध्यक्ष थे, जब भट्टाचार्य इसके महासचिव हुआ करते थे। भट्टाचार्य ने कहा, ‘‘सोनोवाला स्वाहीद भवन से मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे और अब वह लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस भेज रहे हैं। यह शर्मनाक है और हम इसकी निंदा करते हैं।’’

प्रदर्शनकारियों ने मोदी, शाह और सोनोवाल के खिलाफ नारेबाजी की। प्रधानमंत्री शनिवार को शिवसागर जिले में असम सरकार द्वारा एक लाख से भी अधिक निवासियों को भूमि पट्टा वितरित किए जाने के कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। वहीं, शाह के रविवार को राज्य की यात्रा करने का कार्यक्रम है।

इस बीच, आसु के सदस्य पुलिस के साथ हुई एक झड़प में घायल हो गये। दरअसल, पुलिस ने तेजपुर में उन्हें मशाल जुलूस निकालने से रोकने की कोशिश की थी।

आसु ने घोषणा की है कि मोदी की शनिवार की यात्रा के दौरान उसके कार्यकर्ता सभी जिलों और अनुमंडलों में काले कपड़े से चेहरे को ढंक कर प्रदर्शन करेंगे। साथ ही, आसु ने 24 जनवरी को शाह की यात्रा के दौरान सीएए की प्रतियां जला कर काला दिवस मनाने की घोषणा की है।

आसु पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिनियम रद्द करने और असम संधि की धारा छह पर समिति की रिपोर्ट का क्रियान्वयन करने के भी पक्ष में है। यह धारा मूल निवासियों के संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण करती है।

Next Stories
1 सारे मंत्री हमारे साथ हैं- अर्नब गोस्वामी की चैट लीक के बाद बीजेपी बना रही दूरी
2 कृषि कानून विवाद: अड़े रहे किसान संगठन, केंद्र सरकार का रुख भी कड़ा
3 ट्रैक्टर परेड में 4 किसान नेताओं को गोली मारने की थी साजिश! आरोपी धराया, अन्नदाताओं ने PC में उगलवाया प्लान
ये पढ़ा क्या?
X