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मोदी-शाह जिन्हें फॉलो कर रहे वही ‘नाथूराम गोडसे अमर रहे’ ट्रेंड चला रहे, डिबेट में बोलीं अलका लांबा; नाम भी बताए

कांग्रेस नेत्री अलका लांबा ने डिबेट शो में कहा कि 30 जनवरी का दिन बेहद ही अहम होता है। आजाद हिंदुस्तान की पहली गोली महात्मा गाँधी जी के सीने को चीर कर गयी थी। आगे अलका लांबा ने कहा कि जिसकी वो गोली थी वो आज ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है।

alka lamba , congress , mahatma gandhi , nathuram godseकांग्रेस नेता अल्का लांबा (फोटो-द इंडियन एक्सप्रेस)।

कल 30 जनवरी को देशभर में महात्मा गांधी की पुण्यतिथि मनाई गयी. लेकिन ट्विटर पर नाथूराम गोडसे अमर रहे का ट्रेंड भी चलता रहा है। इसी को लेकर टीवी चैनल पर एक डिबेट शो में कांग्रेस नेत्री अलका लांबा ने कहा कि मोदी और शाह जिनको ट्विटर पर फॉलो करते हैं वे लोग महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि पर “नाथूराम गोडसे अमर रहे”  का ट्रेंड चला रहे हैं। 

कांग्रेस नेत्री अलका लांबा ने डिबेट शो में कहा कि 30 जनवरी का दिन बेहद ही अहम होता है। आजाद हिंदुस्तान की पहली गोली महात्मा गाँधी जी के सीने को चीर कर गयी थी। आगे अलका लांबा ने कहा कि जिसकी वो गोली थी वो आज ट्विटर पर ट्रेंड कर रहा है। साथ ही इस दौरान अलका लम्बा ने ट्विटर पर नाथूराम गोडसे अमर रहे  ट्रेंड कराने वाले कुछ लोगों का नाम भी लिया। अलका ने कहा कि हार्दिक भवसार नाम के एक व्यक्ति इस ट्रेंड को चला रहे हैं जिन्हें देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री दोनों फॉलो करते हैं। इससे उनकी सोच का भी पता चलता है।

वैसे यह पहली बार नहीं जब नाथूराम गोडसे ट्विटर पर ट्रेंड हो रहा हो। बीते कई सालों से महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि 30 जनवरी को इस तरह के ट्विटर ट्रेंड देखने को मिलते हैं। हालाँकि सिर्फ ट्विटर पर ही नहीं बल्कि कई राजनेताओं की जुबान पर भी नाथूराम गोडसे का नाम आ जाता है। कुछ साल पहले भोपाल से भाजपा संसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर ने तो लोकसभा में ही गोडसे को देश का सबसे बड़ा देशभक्त बता दिया था। जिसपर उनकी पार्टी ने उनके बयान से पल्ला झाड़ लिया था। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने इस बयान पर खेद भी व्यक्त किया था और कहा कि वे ऐसे नेताओं को कभी दिल से माफ़ नहीं कर पायेंगे।

आजादी के बाद गाँधी शांति के लिए अनशन किया करते थे। जिससे खिन्न होकर हिंदूवादी युवक नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी, 1948 को पॉइंट ब्‍लैंक रेंज से गोली मार कर गाँधी जी की हत्या कर दी थी। गोडसे को लगता था कि गाँधी जी के अनशन की वजहों से देश के हिंदुओं का नुकसान हो रहा है। गाँधी जी की हत्या के बाद गोडसे को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया था और बाद में 15 नवंबर 1949 को उसे अम्बाला की जेल में फांसी दे दी गयी थी। 

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