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संस्कृत बोलने वाले छात्र से कैसे आलमजेब अफरीदी बना देश का मोस्ट वांटेड आतंकी, पढ़ें पूरी कहानी

2014 तक अफरीदी ने कट्टर इस्‍लाम और इस्‍लामिक स्‍टेट से संपर्क के लिए कम से कम 40 फेसबुक और 24 जीमेल अकाउंट खोल लिए।

26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में हुए धमाकों में 56 लोग मारे गए थे।

पूर्व सिमी कार्यकर्ता आलमजेब अफरीदी ने दक्षिण बेंगलुरु थाने में अपने मालिक पर मारपीट का आरोप लगाया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तब पुलिस को पता नहीं था कि यह वहीं शख्स है जिसने अहमदाबाद के हीरा मार्केट में 26 जुलाई 2008 को आईईडी वाली साइकिल खड़ी की थी। अहमदाबाद धमाकों में 56 लोग मारे गए। अफरीदी को पिछले महीने एनआईए ने 2014 बेंगलुरु ब्‍लास्‍ट मामले में गिरफ्तार किया था तब उसका सच सामने आया।

अफरीदी की जांच रिपोर्ट से पता चलता है कि किस कदर वह छात्र से एक खतरनाक आतंकी के रूप में बदल गया। 2004 में वह छात्र जीवन में अच्छी संस्कृत बोलता था लेकिन 12 साल बाद आज वह इस्लामिक स्टेट का संभावित आतंकी बन गया। दो आतंकी हमलों में वह आरोपी है। इस दौरान वह यूपी में मिट्टी ठेकेदार, महाराष्ट्र में सिक्योरिटी गार्ड, हरियाणा में मिठाई विक्रेता, गुजरात में एक्सरे टेक्नीशियन और बेंगलुरु में एसी मैकेनिक बन कर रहा।

एनआईए जांचकर्ता ने बताया कि अगर वह एक और आतंकी वारदात नहीं करता तो शायद पकड़ में नहीं आता। बेंगलुरु में वह मोहम्मद रफीक के नाम से मशहूर था। वहां पर उसकी एक एलआर्इसी पॉलिसी, आधार कार्ड और एसबीआई अकाउंट था जिसमें 70 हजार रुपये थे। उसने जांचकर्ताओं को बताया कि वह वहां पर इतना मशहूर था कि उसके मालिक ने 2013 में उसे पीटने के लिए 10 लोगों को भेजा ताकि वह उसका बिजनेस कब्जा सके। वहां पर उसने एक व्यक्ति को दोस्त बनाया और फिर उसकी बहन से शादी भी कर ली।

2014 तक अफरीदी ने कट्टर इस्लाम और इस्‍लामिक स्टेट से संपर्क के लिए कम से कम 40 फेसबुक और 24 जीमेल अकाउंट खोल लिए। सूत्रों ने बताया वह एक आईएस हैंडलर के संपर्क में आया जिसके कहने पर उसने बेंगलुरु में इजरायली वीजा सेंटर में आगजनी की। अफरीदी का जन्म सितंबर 1986 में अहमदाबाद के जुहापुरा में हुआ। अफरीदी ने 10वीं की पढ़ाई तक संस्‍कृत, ऊर्दू और अरबी सीखी। 1993 में उसके पिता को चाकू मारने के मामले में जेल हो गई। सूत्रों ने बताया कि गुजरात दंगों के कारण उसकी जिंदगी बदल गई। अफरीदी ने जांचकर्ताओं को बताया, ‘नरोदा पाटिया नरसंहार में मैंने परिवार के तीन लोगों को खो दिया। मेरे ननिहाल का परिवार बुरी तरह बर्बाद हो गया।’ 2004 में अफरीदी 12वीं में फेल हो गया। उसने पढ़ार्इ छोड़ दी और जमात ए इस्लामी में शामिल हो गया। वहां पर कट्टरपंथी की ओर बढ़ गया।

सूत्रों के अनुसार उसने बताया कि वडोदरा के करीब हलोल में उसने आतंकी कैंप में भी हिसा लिया। वहां पर उसने तालिबान, अल कायदा और चेचेन्या आतंकियों के वीडियो देखे। इस दौरान वह एक पीसीओ पर काम करता रहा। उसके दोस्त कयामुद्दीन ने उसे साइकिलें खरीदने के लिए 6 हजार रुपये दिए। उसने साइकिलों पर आईईडी लगाई और हीरा मार्केट में खड़ा कर दिया। इसके तुरंत बाद वह फर्रूखाबाद भाग गया। उसने सिमी से भी अपने रिश्ते तोड़ लिए। जब उसका नाम मीडिया में आया तो उसके माता-पिता ने उसे सरेंडर करने को कहा लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बाद वह देश के अलग अलग राज्यों में अलग अलग काम करता रहा।

अक्‍टूबर 2014 में वह अब्दुल खान के नाम के व्यक्ति से मिला। बाबरी विध्वंस मामले पर उससे चर्चा के बाद उसने सीरिया जाने के बारे में पूछताछ की। खान ने उसे बम बनाना सिखाया। फरवरी 2015 में वह नफीस खान से मिला। दोनों को एनआईए ने बाद में गिरफ्तार कर लिया।

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