श्री राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के आरोपों को लेकर विपक्षी दल योगी आदित्यनाथ सरकार और बीजेपी पर हमलावर हैं। इस बीच, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के हालिया कुछ कदमों से ऐसा लगता है कि वह सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति पर आगे बढ़ रहे हैं। ये क्या कदम हैं, आइए इनके बारे में थोड़ा पढ़ते हैं।

अखिलेश यादव ने गुरुवार (9 जुलाई) को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मुलाकात की। चार महीने में उनकी स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से यह दूसरी मुलाकात थी।

पिछले महीने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव और अखिलेश यादव की सांसद पत्नी डिंपल यादव इटावा में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से मिले थे।

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले को सबसे पहले समाजवादी पार्टी ने ही उठाया था। यादव ने कहा था कि राम मंदिर के चढ़ावा चोरी के मामले में भगवान श्री राम की मर्यादा के साथ खिलवाड़ हुआ है और महापाप किया गया है। अखिलेश यादव यह भी कह चुके हैं कि इटावा में बन रहे केदारेश्वर मंदिर का काम जोर-शोर से चल रहा है।

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं हैं और ऐसे में यह सवाल जरूर उठता है कि पिछड़ा, दलित अल्पसंख्यक (पीडीए) के फॉर्मूले की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति क्यों करना चाहते हैं?

अविमुक्तेश्वरानंद का योगी आदित्यनाथ से छत्तीस का आंकड़ा

यहां इस बात को बताना जरूरी होगा कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का योगी आदित्यनाथ सरकार से छत्तीस का आंकड़ा चल रहा है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उत्तर प्रदेश की सरकार के बीच यह विवाद इस साल जनवरी में शंकराचार्य का रथ रोके जाने से शुरू हुआ था। इसके बाद शंकराचार्य ने सीएम योगी आदित्यनाथ के हिंदुत्व पर सवाल उठाया तो योगी आदित्यनाथ ने भी ‘हर कोई शंकराचार्य नहीं लिख सकता’ कहकर इसका जवाब दिया था।

अविमुक्तेश्वरानंद ने सीएम योगी की भाषा को लेकर आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह किसी संत की भाषा नहीं है। अखिलेश यादव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग का भी समर्थन कर चुके हैं। अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी के राज में सनातनी बहुत दुखी हैं।

अखिलेश यादव की अविमुक्तेश्वरानंद के सामने जमीन पर बैठने की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुई है।

यूपी में हुआ था बीजेपी को नुकसान

सवाल यह है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए के समीकरण के दम पर उत्तर प्रदेश में कामयाबी हासिल करने वाले और बीजेपी को पीछे छोड़ देने वाले अखिलेश यादव सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर क्यों आगे बढ़ रहे हैं? यूपी चुनाव में सपा को 37 सीटों पर जीत मिली थी जबकि बीजेपी को 33। बीजेपी को 2019 के मुकाबले 29 लोकसभा सीटों का नुकसान हुआ था।

अखिलेश यादव इस बात को जानते हैं कि बीजेपी हिंदुत्व के मुद्दे पर उन्हें घेर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी कई राजनीतिक सभाओं में मुलायम सिंह यादव की सरकार में राम भक्तों पर गोली चलाए जाने का जिक्र अक्सर करते हैं। बीजेपी का यह भी कहना है कि समाजवादी पार्टी और विपक्षी दलों ने हमेशा ही राम मंदिर के निर्माण का विरोध किया और मोदी सरकार के शासन में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

बीजेपी के नेता अक्सर सपा को हिंदू विरोधी और राम मंदिर विरोधी कहकर हमला करते हैं। अखिलेश यादव इस बात को जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में अगर 2027 के चुनाव में बीजेपी से मुकाबला करना है और राज्य में सरकार बनानी है तो सिर्फ पीडीए समीकरण से ही काम नहीं चलेगा। उन्हें राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी सहित हिंदू समाज के मुद्दों को भी उठाना होगा और पिछले दो महीना में अखिलेश यादव ऐसा ही करते दिखाई दिए हैं।

समाजवादी पार्टी बीजेपी के द्वारा उस पर लगाए जाने वाले हिंदू विरोधी या राम मंदिर विरोधी होने के आरोपों का भी खुलकर जवाब दे रही है।

हिंदू मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश

सपा ने यह साफ करने की कोशिश की है कि वह राम मंदिर, गो रक्षा और सनातन धर्म के मुद्दों पर बीजेपी से पीछे नहीं है और इन मुद्दों पर बीजेपी का एकाधिकार नहीं है। एक ओर सपा सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर आगे बढ़ रही है तो बीजेपी राम मंदिर चढ़ावे के विवाद में बैक फुट पर दिख रही है। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए सपा और अन्य विपक्षी दल राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी का मुद्दा काफी बड़े पैमाने पर उठा रहे हैं।

यह साफ है कि समाजवादी पार्टी अपनी मूल राजनीति (पीडीए समीकरण) के साथ ही हिंदू मतदाताओं के बड़े वर्ग तक पहुंचकर 2027 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार बनाना चाहती है। देखना है कि उसे इसमें कितनी कामयाबी मिलेगी?

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अयोध्या में श्री राम मंदिर एक बार फिर सुर्खियों में है। हालांकि इस बार मामला भूमि विवाद या मंदिर निर्माण का नहीं बल्कि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की चोरी और उससे जुड़ी जांच का है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।