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अपने बंगले को होटल नहीं बनाएंगे अखिलेश, कोर्ट ने कहा- सिर्फ रहने के लिए इस्‍तेमाल करें

अखिलेश और डिंपल ने अदालत को आश्वस्त किया कि पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने बदली परिस्थितियों में हेरिटेज होटल बनाने का इरादा त्याग दिया है और उक्त बंगले का सिर्फ खुद के रहने के लिए इस्तेमाल करेंगे।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी सांसद पत्नी डिंपल यादव को राहत देते हुए विक्रमादित्य मार्ग पर स्थित उनके बंगला नंबर ए 1 के जीर्णोधार की अनुमति दे दी है। अदालत ने साथ ही चेतावनी भी दी है कि वहां पर किसी तरह के आधारभूत ढांचे का निर्माण नहीं किया जायेगा। दरअसल, दोनों लोगों ने अदालत को आश्वस्त किया कि पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी ने बदली परिस्थितियों में हेरिटेज होटल बनाने का इरादा त्याग दिया है और उक्त बंगले का सिर्फ खुद के रहने के लिए इस्तेमाल करेंगे।

यह आदेश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन की पीठ ने पूर्व मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी की एक अर्जी पर जारी किया। उक्त भूखंड पर 1940 के आसपास एक बंगला बनाया गया था। पूर्व मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी की ओर से वरिष्ठ वकील जे एन माथुर और अमित कुमार सिंह भदौरिया ने कहा कि उक्त भूखंड पर हेरिटेज होटल बनाने के लिए एलडीए से अनुमति मांगने के लिए अर्जी दी गयी थी, लेकिन अब अर्जी वापस ले ले ली जाएगी और उस बंगले को केवल रहने के लिए उपयोग में लायेंगे।

अखिलेश अपना सरकारी बंगला खाली कर विवादों में आए थे, जिसके बाद उन्‍होंने इस निजी बंगले को होटल में तब्‍दील करने का प्‍लान बनाया था। पूर्व सीएम पर सरकारी बंगला खाली करने के दौरान वहां तोड़फोड़ किए जाने के आरोप भाजपा ने लगाए थे। अखिलेश ने कहा कि बंगले में तोड़फोड़ का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह योगी सरकार की एक साजिश के अलावा और कुछ नहीं है। उन्होंने दावा किया कि बंगला खाली करने के बाद कुछ लोग हथौड़ा लेकर उनके द्वारा खाली किए गए आवास में गए थे, ताकि सपा की छवि खराब की जा सके।

18 अगस्‍त को न्‍यायालय ने यहां होटल के निर्माण पर रोक लगाई थी। तब अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है कि वीवीआईपी हाईसिक्योरिटी जोन में होटल निर्माण की इजाजत किस अधिकारी ने दे दी। गौरतलब है कि याचिकाकर्ता अधिवक्ता शिशिर चतुर्वेदी ने इस संबंध में याचिका दाखिल की थी। इस मामले में अखिलेश यादव, उनकी पत्नी सांसद डिंपल यादव, पिता मुलायम सिंह यादव, जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट समेत कुल 13 लोगों को पार्टी बनाया गया था। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि उन पर पीआईएल वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।

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