पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (SAD) और बीजेपी के बीच संभावित गठजोड़ को लेकर अभी तस्वीर साफ नहीं है। लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी में दोनों दलों के छात्र संगठनों ने साथ आकर सियासी संकेत जरूर दे दिए हैं। PU कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल (PUCSC) चुनाव से एक दिन पहले रविवार को बीजेपी से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और अकाली दल समर्थित स्टूडेंट्स ऑर्गनाइजेशन ऑफ इंडिया (SOI) ने गठबंधन का ऐलान किया।

SOI ने ABVP के अध्यक्ष पद के उम्मीदवार अंकित बिधान को समर्थन देने का फैसला किया है। संगठन अपने समर्थकों को भी ABVP के पक्ष में लामबंद करेगा। सोमवार को होने वाले मतदान से ठीक पहले हुए इस समझौते को कैंपस चुनाव के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

SOI ने बदली रणनीति

इस बार SOI खुद अध्यक्ष पद के चुनाव में नहीं उतर रही है। उसके उम्मीदवार का नामांकन पात्रता से जुड़े विवाद के चलते खारिज कर दिया गया था। इसके बाद संगठन ने चुनाव से बाहर रहने के बजाय ABVP के उम्मीदवार के समर्थन में अपना संगठनात्मक नेटवर्क और संभावित वोट बैंक लगाने का फैसला किया।

ABVP के लिए भी यह समर्थन महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव से ठीक एक दिन पहले SOI जैसे स्थापित कैंपस संगठन का साथ मिलने से उसकी चुनावी रणनीति और वोट जुटाने की क्षमता मजबूत हो सकती है। ABVP को HIMSA और ISA से भी बिना शर्त समर्थन मिल चुका है। ऐसे में SOI का समर्थन अध्यक्ष पद के मुकाबले में चुनावी समीकरण को और दिलचस्प बना सकता है।

गुरुद्वारे से हुआ गठबंधन का ऐलान

SOI और ABVP ने गठबंधन का ऐलान पंजाब यूनिवर्सिटी के गुरुद्वारे से किया। SOI ने इसे छात्र कल्याण, कैंपस की एकता और विकास के लिए किया गया फैसला बताया। संगठन ने इसे सिख-हिंदू एकता का उदाहरण भी बताया और कहा कि छात्र राजनीति को विभाजनकारी भावनाओं के बजाय मुद्दों, विकास और रचनात्मक प्रतिनिधित्व पर केंद्रित होना चाहिए।

2020 में टूटा था SAD-BJP गठबंधन

कैंपस की यह साझेदारी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके पीछे पंजाब की बड़ी राजनीति का संदर्भ है। SAD और BJP करीब 23 साल तक सहयोगी रहे लेकिन 2020 में कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दल अलग हो गए। अब 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दोनों के संभावित दोबारा साथ आने की अटकलें फिर तेज हैं। हालांकि, दोनों पार्टियों की ओर से इस मुद्दे पर अलग-अलग संकेत मिलते रहे हैं।

ऐसे में छात्र संगठनों का एक साथ आना यह जरूर दिखाता है कि जहां राजनीतिक हित समान हों, वहां दोनों संगठनों के बीच रणनीतिक सहयोग की गुंजाइश अब भी बनी हुई है। हालांकि इसे दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन की वापसी का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

2016 में भी साथ आए थे ABVP और SOI

ABVP और SOI का साथ आना पंजाब यूनिवर्सिटी में नया नहीं है। 2016 के PUCSC चुनाव में SOI, ABVP, INSO और HPSO ने मिलकर चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन ने अध्यक्ष पद के लिए पीयूष आनंद को उम्मीदवार बनाया था और वह दूसरे स्थान पर रहे थे।

उस गठबंधन में INSO की मौजूदगी भी खास थी। INSO का संबंध चौटाला परिवार से है जबकि अकाली दल के बादल परिवार और चौटाला परिवार के बीच लंबे समय से राजनीतिक और निजी संबंध रहे हैं। SOI ने आखिरी बार 2019 में PUCSC अध्यक्ष पद जीता था जब चेतन चौधरी अध्यक्ष चुने गए थे।

अब सोमवार को होगा असली इम्तिहान

फिलहाल ABVP और SOI के गठबंधन का असर सोमवार को होने वाली वोटिंग के बाद ही साफ होगा। अगर SOI अपने समर्थकों के वोट ABVP के पक्ष में ट्रांसफर कराने में सफल रहती है तो इससे ABVP के उम्मीदवार अंकित बिधान को सीधा फायदा मिल सकता है।

लेकिन इस गठबंधन का असली महत्व कैंपस चुनाव से कहीं आगे है। पंजाब में SAD-BJP के दोबारा साथ आने को लेकर अभी सस्पेंस कायम है। लेकिन पंजाब यूनिवर्सिटी में दोनों के छात्र संगठनों ने साझा चुनावी जमीन तलाश ली है। अब सवाल यही ह- कैंपस में बनी यह दोस्ती भविष्य में पंजाब की मुख्यधारा की राजनीति में भी कोई रास्ता खोल सकती है?

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