बिहार में 25 जुलाई को बंद और ‘जंतर-मंतर’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा को लेकर बिहार पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है। पुलिस ने अदालत को बताया कि सिवान में भीड़ में फंसने के बाद जिला इंटेलिजेंस यूनिट (DIU) के एक कांस्टेबल ने अपनी AK-47 राइफल से हवा में चार राउंड फायर किए थे। हालांकि इस फायरिंग में कोई घायल नहीं हुआ।

11 अगस्त को दाखिल जवाबी हलफनामे में एडीजीपी (कानून-व्यवस्था) के. सुहिता अनुपम ने कहा कि 25 जुलाई 2026 को सिवान में AISA और RYA (CPI-ML के छात्र व युवा संगठन) के प्रदर्शनकारी गांधी मैदान में इकट्ठा हुए। इसके बाद वहां से जेपी चौक की ओर मार्च करने लगे। हलफनामे के अनुसार, दोपहर करीब 12.30 बजे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके बाद मैरवा रोड और गोपालगंज रोड से आए कुछ उपद्रवी भी पथराव में शामिल हो गए।

बिहार पुलिस ने बताया कि इस हिंसा में सिवान के पुलिस अधीक्षक (SP), दो एसडीपीओ, दो इंस्पेक्टर, दो सब-इंस्पेक्टर और 13 कांस्टेबल समेत कुल 20 पुलिसकर्मी घायल हुए। हिंसा के दौरान पुलिस के दो वाहन और बड़ी संख्या में ट्रैफिक ट्रॉलियों को भी नुकसान पहुंचा। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया। इस मामले में 82 लोगों के खिलाफ छह एफआईआर दर्ज की गईं जिनमें से 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

भीड़ में फंसने पर कांस्टेबल ने चलाई AK-47 से गोलियां

हलफनामे में आगे कहा गया है कि मौके पर तैनात पुलिस बल पर्याप्त नहीं था। इसलिए विभिन्न शाखाओं और पुलिस लाइन से अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। इसी दौरान जेपी जौक के पास जिला इंटेलिजेंस यूनिट का एक कांस्टेबल भीड़ में फंस गया और उसने अपनी AK-47 से हवा में चार गोलियांं चलाईं। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इस फायरिंग में किसी व्यक्ति को चोट नहीं आई।

हलफनामे में आगे कहा गया है कि जेपी चौक से करीब 1.5 से 2 किलोमीटर दूर हाथी चौक पर भी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए एक सहायक उप-निरीक्षक (ASI) ने अपनी 9 मिमी पिस्तौल से दो राउंड फायर किए। बिहार पुलिस के अनुसार, घटना के बाद मौके से .315 बोर के दो खाली कारतूस और 7.65 मिमी का एक खाली कारतूस भी बरामद किया गया।

AK-47 से कोई नहीं हुआ घायल

हलफनामे में कहा गया है कि तीन प्रदर्शनकारियों को गोली लगने से मामूली चोटें आई थीं। उन्हें सिवान सदर अस्पताल में सबसे बेहतर संभव उपचार दिया गया और बेहतर इलाज के लिए तुरंत पटना के मेदांता अस्पताल भेजा गया। चोटें ठीक होने के बाद सभी घायलों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

राज्य पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनकारियों को लगी चोटें ना तो AK-47 से हुई थीं और ना ही घायल लोग उस स्थान पर मौजूद थे जहां कांस्टेबल ने AK-47 से फायरिंग की थी। यह पता लगाने के लिए बैलिस्टिक जांच कराई जा रही है कि किस तरह के हथियार का इस्तेमाल हुआ, कितनी दूरी से गोली चलाई गई, फायरिंग का एंगल आदि।

हलफनामे में आगे कहा गया है कि AK-47 से फायरिंग करने वाले कांस्टेबल को अनुचित आचरण (Undesired Conduct) के चलते निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

राज्य सरकार ने यह भी कहा कि AK-47 प्लाटून लेवल का हथियार है जिसका इस्तेमाल विशेष अभियानों के लिए किया जाना चाहिए ना कि कानून-व्यवस्था की सामान्य परिस्थितियों में। हलफनामे के अनुसार, ”AK-47 के इस्तेमाल को लेकर पुलिस महानिदेशक (DGP) ने 1 अगस्त को विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।” इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि इस तरह के आदेश पहले भी अलग-अलग मौकों पर जारी किए जा चुके हैं।

AK-47 फायरिंग विवाद: क्या प्रदर्शन के दौरान पुलिस ऐसे हथियार चला सकती है?

शनिवार (25 जुलाई) को बिहार के सिवान में हुए प्रदर्शन के दौरान एक कांस्टेबल ने AK-47 राइफल से हवा में चार राउंड फायरिंग कर दी। बिहार पुलिस ने इसके बाद विवाद होने पर सिवान के कांस्टेबल अभिषेक कुमार को निलंबित कर दिया है। हालांकि, इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या बंद और विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल कर सकती है?