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अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट केसः ATS ने गुजरात से फरार आरोपी सुरेश नायर को किया अरेस्ट

सुरेश नायर भरूच से दबोचा गया है।

साल 2007 में हुई घटना के बाद दरगाह के पास तैनात पुलिसकर्मी। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

एंटी टेररिज्म स्क्वॉड (एटीएस) ने साल 2007 के अजमेर दरगाह बम ब्लास्ट केस में फरार चल रहे एक आरोपी को रविवार (25 नवंबर) को गुजरात से गिरफ्तार कर लिया। सुरेश नायर भरूच से दबोचा गया। आरोप है कि अजमेर शरीफ में धमाका करने वालों को उसी ने बम मुहैया कराए थे। इससे पहले, मामले में उम्र कैद की सजा पाने वाले दो दोषियों में से एक भावेश पटेल को सितंबर 2018 में राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई थी। भरूच में घल लौटने पर उसका किसी हीरो की तरह स्वागत किया गया था, जबकि पिछले साल मार्च में राजस्थान के जयपुर स्थित स्पेशल एनआईए कोर्ट ने पटेल (40) व देवेंद्र गुप्ता (42) को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

बता दें कि 11 अक्टूबर, 2007 को अजमेर स्थित दरगाह ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती परिसर में बम धमाका हुआ था। अजमेर शरीफ में यह घटना इफ्तार से ठीक पहले हुई थी। रमजान के महीने में तब नमाज खत्म ही हुई थी और नमाजी रोजा खोलने के लिए परिसर में जुटे थे। अचानक उसी दौरान एक बम धमाका हो गया था।

बम तब वहां एक टिफिन के भीतर रख कर पहुंचाया गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसे में तीन लोगों की मौत हुई थी, जबकि करीब 17 लोग जख्मी हुए थे। हालांकि, उस धमाके के बाद बम निरोधक दस्ते ने वहां छिपाए गए दूसरे बम को ढूंढकर उसे डिफ्यूज कर दिया था।

जांच-पड़ताल में दावा किया गया था कि धमाके में पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था। हालांकि, बाद में जांच की दिशा घूमी और संघ कार्यकर्ता पर लिप्त होने की आशंका जताई गई। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) कोर्ट ने सुनील जोशी व देवेंद्र गुप्ता को इसकी साजिश रचने व भावेश भाई पटेल को घटनास्थल पर विस्फोटक रखने का दोषी पाया था। आरएसएस से जुड़े जोशी की इस घटना के कुछ ही दिनों बाद मौत हो गई थी। मध्य प्रदेश के देवास में उन्हें रहस्यमयी हालत में मृत पाया गया था, जिसकी बाद में जांच भी हुई थी।

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