महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की प्लेन क्रैश में मौत हो गयी। बुधवार सुबह मुंबई से उड़ान भरने के बाद एक विमान निर्धारित समय पर उतरने से कुछ मिनट पहले ही दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमें, उपमुख्यमंत्री पवार (66) और विमान में सवार चार अन्य लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों के अनुसार, एनसीपी प्रमुख बुधवार सुबह मुंबई से बारामती के लिए रवाना हुए थे जहां उन्हें 5 फरवरी को होने वाले जिला परिषद चुनावों के सिलसिले में रैलियों को संबोधित करना था। अजित पवार के पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार से पहले उनके काटेवाड़ी स्थित पैतृक आवास पर लाया गया। कड़ी सुरक्षा, अंतिम संस्कार की तैयारियों और वीआईपी लोगों के लगातार आगमन के बीच बारामती में सब तरफ शांति पसरी हुई है।

बारामती में अजित पवार के निधन के मद्देनजर बंद का आयोजन किया गया। बुधवार की सुबह हुए भयानक हादसे ने जहां पूरे देश को स्तब्ध कर दिया और पवार परिवार की धरती बारामती को गहरे शोक में डुबो दिया। बुधवार दोपहर टोल गेट खुला था लेकिन वहां कोई कर्मचारी नहीं था। सभी प्रतिष्ठान बंद थे, सड़कें सुनसान थीं और ऐसा लग रहा था कि सभी वाहन एक ही दिशा में जा रहे हैं, विद्या प्रतिष्ठान कॉलेज के मैदान की ओर, अजित पवार के पार्थिव शरीर को अंतिम श्रद्धांजलि देने के लिए।

स्थानीय बोले- उनके निधन से उत्पन्न शून्य कोई नहीं भर सकता

कल विमान दुर्घटना में उपमुख्यमंत्री की मृत्यु पर एक स्थानीय निवासी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “परिवार कुछ समय पहले तक अलग-अलग था। अब परिवार फिर से एक हो गया है लेकिन जो हुआ है वह बहुत दुखद है। यह बारामती, महाराष्ट्र और पूरे देश के लिए बेहद दुखद घटना है।” एक दूसरे स्थानीय निवासी ने कहा, “अजित दादा ने बारामती के लिए जो किया है वह किसी और के लिए संभव नहीं होगा। उनके निधन से एक ऐसा शून्य उत्पन्न हो गया है जिसे कोई भी नहीं भर सकता, यहां तक ​​कि किसी के सात जन्मों में भी नहीं।”

वहीं, बुधवार को पूरा शहर लाखों की संख्या में ‘अजित दादा’ को अंतिम विदाई देने के लिए वहां पहुंचा था। विशाल मैदान भी छोटा लग रहा था। आंखों में आंसू भरे हुए पिंपरी चिंचवाड़ की पूर्व महापौर मंगला कदम ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “सब कुछ खत्म हो गया, अब क्या बचा है? वह मेरे नेता थे, मेरे मार्गदर्शक थे। मैंने उनके साथ 1992 से अब तक काम किया है। अब महाराष्ट्र के लिए कुछ भी नहीं बचा है।”

Ajit Pawar Plane Crash LIVE

बारामती अनाथ हो गया- स्थानीय निवासी

महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष रूपाली भीड़ के बीच चट्टान की तरह चुपचाप खड़ी रहीं। मंच पर मौजूद अन्य लोग फूट-फूट कर रो रहे थे अधिकांश इतने व्यथित थे कि बोल भी नहीं पा रहे थे। बैंक कर्मचारी अमित ढालपे ने कहा, “बारामती अनाथ हो गया है। हम महाराष्ट्र में गर्व से घूमते थे और कहते थे कि हम बारामतीकर हैं, अब सब कुछ खत्म हो गया है। पहले तो हमें लगा कि दादाजी को चोट लगी होगी और हम अस्पताल गए, जहां हमें सच्चाई पता चली।”

हर गुजरते घंटे के साथ भीड़ बढ़ती गई, बैरिकेड्स की सिक्योरिटी भी कम पड़ने लगी और पुलिस को लाउडस्पीकर पर अपील करनी पड़ी, जिसमें लोगों से धैर्य रखने का आग्रह किया गया कि दादा को यह अनुशासनहीनता पसंद नहीं आती। शाम के 7:30 बज चुके थे जब पार्थिव शरीर को मंच पर रखा गया। एनसीपी कार्यकर्ता श्रद्धांजलि देने के लिए कतार में खड़े थे। उनमें से कई लोगों की कमीजों पर पार्टी का चिन्ह, घड़ी, छपा हुआ था। फिर भी बारामती में मानो समय थम सा गया था।

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