उद्धव के शपथ से एक दिन पहले और फडणवीस के इस्तीफे के एक दिन बाद अजित पवार को ऐसे मिली क्लीन चिट, कोर्ट में सौंपा गया 16 पन्नों का एफिडेविट

पवार एक दशक पहले हुए करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले का सामना कर रहे थे। इस मामले में सौंपे हलफनामे में जांच एजेंसी ने कहा है कि इस घोटाले के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

पूर्व जल संसाधन मंत्री अजित पवार ऐसे मिली क्लीन चिट।

महाराष्ट्र में शिवसेना-एनसीपी-कांग्रेस सरकार के शपथ ग्रहण (28 नवंबर) से ठीक एक दिन पहले महाराष्ट्र भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ के समक्ष एक हलफनामा पेश किया, जिसमें राज्य के पूर्व जल संसाधन मंत्री अजित पवार का पक्ष लिया गया है। पवार एक दशक पहले हुए करोड़ों रुपये के सिंचाई घोटाले का सामना कर रहे थे। इस मामले में सौंपे हलफनामे में जांच एजेंसी ने कहा है कि इस घोटाले के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एसपी रश्मि नांदेकर ने 27 नवंबर को 16 पन्नों के हलफनामे में नागपुर खंडपीठ को बताया है, “VIDC के चेयरमैन/ जल संसाधन मंत्री को कार्यदायी एजेंसियों के कृत्यों के लिए इस मामले में जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है, क्योंकि उनकी ओर से कोई कानूनी कर्तव्य नहीं किए गए हैं।”

नांदेकर ने हलफनामे में अजित पवार के कार्यकाल को विदर्भ सिंचाई विकास निगम (VIDC) के चेयरमैन और जल संसाधन विकास मंत्री के तौर पर उद्धृत किया है। पवार उस वक्त राज्य की कांग्रेस-एनसीपी सरकार में मंत्री थे।

यह कालखंड इसलिए अहम है क्योंकि देवेन्द्र फडणवीस और अजित पवार के सीएम और डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा देने से छीक एक दिन पहले 25 नवंबर को एसीबी ने कथित सिंचाई घोटाले में शुरू की गई नौ “खुली पूछताछ” को बंद कर दिया था। इसके अगले ही दिन एसीबी ने हाईकोर्ट में शपथ पत्र सौंपा। और इलके अगले दिन यानी 28 नवंबर को राज्य में उद्धव ठाकरे सरकार का शपथ ग्रहण हुआ।

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