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नरेंद्र मोदी ने किया था ‘जहां झुग्गी, वहीं मकान’ का वादा, अब सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर से 48000 झुग्गियों पर खतरा, SC गई कांग्रेस

अजय माकन ने पूर्व न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा दिए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है। जिसमें अदालत ने दिल्ली में लगभग 48,000 झुग्गियों जो रेलवे पटरियों के पास हैं उन्हें तीन महीने में ध्वस्त करने का निर्देश दिया था।

Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: September 11, 2020 3:33 PM
कांग्रेस के नेता अजय माकन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ याचिका दायर की है। (file)

2019 के लोकसभा चुनाव में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने “जहाँ झुग्गी, वहीं मकान” का वादा किया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश की वजह से दिल्ली के 48000 झुग्गियों पर संकट आ गया है। पूर्व न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली में लगभग 48,000 झुग्गियों को जो रेलवे पटरियों के पास हैं उन्हें तीन महीने में ध्वस्त करने का निर्देश दिया था। कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ कांग्रेस के नेता अजय माकन ने याचिका दायर की है।

अजय माकन ने पूर्व न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा दिए गए निर्देशों को चुनौती देते हुए यह याचिका दायर की है। याचिका में माकन ने तर्क दिया कि चूंकि प्रत्यक्ष निर्देश विध्वंस को झुग्गीवासियों या प्रतिनिधि को सुने बिना पारित किया गया था, इसलिए इसे बरकरार नहीं रखा जा सकता है। दलील में कहा गया है कि अगर वर्तमान महामारी के बीच बस्तियों को ध्वस्त किया जाता है, तो 2,50,000 से अधिक व्यक्ति आश्रय और आजीविका की तलाश में शहर में घूमने के लिए मजबूर होंगे।

31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने के भीतर दिल्ली में 140 किलोमीटर लंबी रेल पटरियों के आसपास की लगभग 48,000 झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने का आदेश दिया था। इसके अलावा कोर्ट ने निर्देश दिया था कि अदालत झुग्गी-झोपड़ियों को हटाने पर कोई स्टे न दे।

कोर्ट ने ज़ोर देते हुए कहा था कि तिक्रमण हटाने के काम में किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव और दखलंदाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सुनवाई के दौरान रेलवे ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि दिल्ली में 140 किलोमीटर लंबी रेलवे लाइन के साथ झुग्गीवासियों का अतिक्रमण है जिसमें 70 किलोमीटर लाइन के साथ है। रेलवे ने कहा कि एनजीटी ने अक्टूबर 2018 में आदेश दिया था, जिसके तहत इन झुग्गी बस्ती को हटाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया था. लेकिन राजनीतिक दखलंदाजी के चलते रेलवे लाइन के आसपास का यह अतिक्रमण हटाया नहीं जा सका।

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