केंद्र सरकार ने हवाई किराए के लिए लगाई गई सीमा को हटाने का फैसला किया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा घरेलू हवाई किरायों पर लगाई गई लिमिट (cap) हटाने के फैसले से यात्रा लागत बढ़ने को लेकर चिंता बढ़ गई है। आम आदमी पार्टी के संयोजक ने चेतावनी दी है कि सरकार के इस फैसले से हवाई यात्रा मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर हो सकती है। यह फैसला सोमवार (23 मार्च 2026) से लागू हो गया है जिससे किरायों में तेजी से इजाफा होने की उम्मीद है।
क्यों लगाई गई थी हवाई किराए पर कैपिंग?
घरेलू हवाई किरायों पर अस्थायी कैपिंग लागू हुए करीब तीन महीने से ज्यादा का समय हो गया है। अब सरकार ने इसे हटाने का हटाने का फैसला किया है। बता दें कि यह कैप पिछले साल दिसंबर में IndiGo की फ्लाइट्स में हुई रुकावट के बाद लागू की गई थी।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार, हवाई किरायों पर लगी यह लिमिट 23 मार्च 2026 से हटा दी गई है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर एयरलाइंस को परिचालन संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्रालय ने अपने आदेश में यह भी कहा कि एयरलाइंस को किराया तय करने में अनुशासन बनाए रखना होगा और जिम्मेदारी से काम करना होगा ताकि यात्रियों के हितों पर किसी तरह से बुरा प्रभाव ना पड़े।
हवाई यात्रयों पर क्या असर होगा?
हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ने की उम्मीद है क्योंकि एयरफेयर कैप हटने से हवाई किराए महंगे हो सकते हैं। बढ़ती लागत से जूझ रही एयरलाइंस अब मांग और आपूर्ति के आधार पर किरायों को स्वतंत्र रूप से तय कर सकेंगी।
इसका मतलब है कि छुट्टियों, त्योहारों और आखिरी समय में बुकिंग करने पर फ्लाइट टिकट की कीमतों में भारी इजाफा हो सकता है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर अरविंद केजरीवाल ने कहा, ”हवाई किराए लगातार मध्यम वर्ग की पहुंच से बाहर होते जा रहे हैं। नरेंद्र मोदी सरकार हवाई किराए पर लगी कैपिंग (सीमा) हटा रही है जिससे टिकट की कीमतों में भारी बढ़ोत्तरी हो सकती है। इसके बजाय सरकार को किराए को बेहतर तरीके से नियंत्रित करना चाहिए। हवाई यात्रा अब लग्जरी नहीं बल्कि मिडिल क्लास के लिए एक जरूरत बन चुकी है।”
कितनी थी हवाई किराए पर कैपिंग?
| फ्लाइट डिस्टेंस | अधिकतम वन-वे फेयर कैप |
| 500 किलोमीटर तक | 7,500 रुपये |
| 500 -1,000 किलोमीटर | 12,000 रुपये |
| 1,000 -1,500 किलोमीटर | 15,000 रुपये |
| 1,500 किलोमीटर के ऊपर | 18,000 रुपये |
यह भी पढ़ें: मनमाने ‘सीट शुल्क’ पर तो लगाम, लेकिन अचानक बढ़ाए जाने वाले टिकट दाम पर भी कुछ कर पाएगी सरकार
सुरक्षित और जल्दी गंतव्य तक पहुंचने के लिए अब लोग हवाई यात्रा को प्राथमिकता देते हैं। इससे भारत में घरेलू हवाई यात्रा तेजी से बढ़ी है। मगर विमानन कंपनियां अपनी आय बढ़ाने के लिए जिस तरह से अलग-अलग सुविधाओं के नाम पर शुल्क ले रही हैं, उससे यात्रियों की जेब पर नाहक ही बोझ बढ़ा है।
