Ahmedabad Air India Plane Crash: पिछले साल 12 जून को बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर टैडी म्रा के हॉस्टल मेस की बिल्डिंग पर क्रैश हो गया। इस हादसे में जमीन पर मौजूद 19 लोगों और प्लेन में सवार 241 लोगों की मौत हो गई थी। 32 साल के टैडी म्रा बाल-बाल बचे थे। उन्होंने एक इमरजेंसी कॉल के लिए अपना लंच बीच में ही छोड़ दिया था और चार मिनट के अंदर ही यह हादसा हो गया।

अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले टैडी म्रा हादसे के बाद से सिर्फ दो बार ही उस जगह पर गए हैं। उन्हें मेडिकल स्टूडेंट्स के लिए उसी जगह पर पीजी हॉस्टल कॉम्प्लेक्स बनाने की सरकार की योजनाओं पर शक है।

गुजरात कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट में फाइनल ईयर के पीजी स्टूडेंट टैडी म्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “मुझे लगता है कि अगर वे वहां नया (हॉस्टल) बनाते हैं, तो वहां कोई नहीं रहेगा। जरा सोचिए, वहां लगभग 260 लोगों की मौत हुई है। मुझे नहीं लगता कि कोई वहां रहेगा। इतनी भयानक (घटना) हुई थी। वहां कोई नहीं रहेगा।”

एक मिनट भी बहुत कीमती होता है- टैडी म्रा

इस घटना से मिले सबक के बारे में बात करते हुए टैडी म्रा ने कहा, “समय बहुत जरूरी है। एक मिनट भी बहुत कीमती होता है। क्योंकि, यह आपकी जान बचा सकता है। मेरी जान भी चार मिनट की वजह से ही बची थी और दूसरी बात, मुझे एहसास हुआ है कि कभी भी तनाव में नहीं रहना चाहिए। आप कभी नहीं जानते कि मौत या कोई हादसा कब हो सकता है। यह किसी भी रूप में आ सकता है। इसलिए, कभी भी तनाव नहीं लेना चाहिए। इंसान को वर्तमान में खुश रहना चाहिए। हम अतीत को वापस नहीं ला सकते और भविष्य का अनुमान नहीं लगा सकते। हम जो जी रहे हैं, वह वर्तमान है और यह बहुत जरूरी है।”

उनका सुझाव है कि हॉस्टल के बजाय वहां एक ऑफिस बनाया जा सकता है। टैडी ने कहा, “मैं वहां हॉस्टल बनाने की सलाह नहीं दूंगा। कोई वहां नहीं रहेगा। वह जगह अब ऐसी हो गई है कि लोग उसे डरावनी या भूतिया मानते हैं। लोगों के मन में डर होगा। दिन के समय ऑफिस के इस्तेमाल के लिए यह बेहतर रहेगा। वहां हॉस्टल नहीं बनाना चाहिए। इसे आस-पास कहीं बनाया जा सकता है। लेकिन उसी जगह पर हॉस्टल बनाना सही नहीं होगा। कोई भी वहां रहना पसंद नहीं करेगा। वे डरे हुए रहेंगे यह मेरी निजी राय है।”

हाल ही में, गुजरात सरकार ने दुर्घटना वाली जगह पर 105 करोड़ रुपये की लागत से एक हॉस्टल कॉम्प्लेक्स बनाने की घोषणा की थी, क्योंकि दुर्घटना में ‘अतुल्यम’ इमारतें बुरी तरह बर्बाद हो गई थीं। टैडी ‘अतुल्यम-2’ के कमरा नंबर 302 में थे, जो उन कमरों में से एक है जो जलकर खाक हो गए।

अगर मैं रुका होता तो शायद जिंदा नहीं होता- टैडी

12 जून 2025 के उस दिन को याद करते हुए टैडी ने बताया कि सुबह वे अस्पताल में डे-केयर सर्जरी यूनिट में ड्यूटी पर थे। टैडी ने कहा, “दोपहर 1:10 बजे मैं लंच के लिए मेस बिल्डिंग गया। उस दिन आज से ज्यादा गर्मी थी। तभी मुझे सीटी स्कैन रूम से कॉल आया कि वहां पहुंचना है क्योंकि एक जरूरी बायोप्सी करनी थी। लेकिन मेरे कपड़ों पर थोड़ी दाल गिर गई थी, इसलिए मैं कपड़े बदलने अपने कमरे (अतुल्यम ब्लॉक में) गया। उस समय मैं नहाना भी चाहता था। लेकिन समय की कमी के कारण मैं नहाया नहीं और तुरंत अस्पताल के लिए निकल गया। अगर मैं नहाने के लिए रुक जाता, तो शायद बच नहीं पाता। मेरा पूरा कमरा जलकर खाक हो गया था। मेरे कमरे के सामने रहने वाले एक और डॉक्टर के परिवार वाले उस हादसे में मारे गए थे।”

हॉस्टल का कमरा छोड़ने के बाद टैडी ने बताया कि जब वे अहमदाबाद सिविल अस्पताल परिसर में 1200 बेड वाली हॉस्पिटल की बिल्डिंग में पहुंचे, तो उन्हें एक जोरदार आवाज सुनाई दी।

दूर से धुएं का गुबार दिखाई दे रहा था- टैडी

टैडी ने कहा, “किसी ने कहा कि गैस सिलेंडर फट गया है। लेकिन फिर मुझे पता चला कि प्लेन ‘अतुल्यम’ पर क्रैश हो गया है। दूर से ही मुझे उस तरफ से धुएं के बड़े गुबार उठते दिख रहे थे। फिर मेरे सीनियर डॉक्टरों के एक व्हाट्सएप ग्रुप पर एक वीडियो आया। मैं तुरंत अपना कमरा और सामान देखने वापस गया। हालांकि, पुलिस ने मुझे अंदर नहीं जाने दिया। फायर ब्रिगेड के लोग आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन कामयाब नहीं हो पा रहे थे। इस दौरान, मैंने घटनास्थल पर कई लोगों के शवों को जलते हुए देखा।”

उन्होंने आगे कहा, “हम रोज आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में मरीजों का इलाज करते हैं, लेकिन (क्रैश वाली जगह पर) जो महसूस हुआ, वह बहुत डरावना था। मुझे वहां जाने से डर लगता है (आज भी) घटना के बाद मैं वहां सिर्फ दो बार गया हूं। एक बार हमें अपना सामान देखने के लिए बुलाया गया था और फिर हमें अपना सामान लेने के लिए बुलाया गया। उसके बाद, हम कभी वहां नहीं गए। उस जगह से बहुत डरावनी यादें जुड़ी हैं। मैं वहां दोबारा नहीं जाना चाहता। इतने सारे लोग मारे गए, उस बिल्डिंग को देखकर हमें बुरे सपने आते हैं।”

अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के डपोरिजो शहर के रहने वाले टैडी ने कहा कि वह 12 जून (शुक्रवार) को मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए क्रैश वाली जगह पर जाना पसंद करते। उन्होंने कहा, “लेकिन अस्पताल में काम का बहुत ज्यादा बोझ होने के कारण, मुझे नहीं लगता कि मैं वहां जा पाऊंगा।”

यह भी पढे़ं: ‘कैसे हो आप… ठीक हो?’ एयर इंडिया प्लेन हादसे के बाद एक कॉल ने जोड़े दो टूटे परिवार

12 जून 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया था। इसमें 241 यात्रियों की मौत हो गई थी। मरने वालों में गुजरात के ही रहने वाले कमलेश और उनकी पत्नी धूपबेन भी शामिल थीं। दोनों की नई शादी हुई थी और पहली बार धूपबेन लंदन जा रही थीं। इस घटना को एक साल बीत चुके हैं लेकिन कमलेश के पिता सावधानभाई चौधरी आज भी इससे उबर नहीं पाए हैं। हालांकि कमलेश के लंदन में रहने वाले पाकिस्तानी दोस्त उमर हर दिन सावधानभाई को फोन कॉल करते हैं और पूछते हैं, “कैसे हो आप… ठीक हो।” यहां क्लिक कर पढे़ं पूरी खबर…