12 जून 2025 को अहमदाबाद एयरपोर्ट पर एयर इंडिया का विमान क्रैश हो गया था। इसमें 241 यात्रियों की मौत हो गई थी। मरने वालों में गुजरात के ही रहने वाले कमलेश और उनकी पत्नी धूपबेन भी शामिल थीं। दोनों की नई शादी हुई थी और पहली बार धूपबेन लंदन जा रही थीं। इस घटना को एक साल बीत चुके हैं लेकिन कमलेश के पिता सावधानभाई चौधरी आज भी इससे उबर नहीं पाए हैं। हालांकि कमलेश के लंदन में रहने वाले पाकिस्तानी दोस्त उमर हर दिन सावधानभाई को फोन कॉल करते हैं और पूछते हैं, “कैसे हो आप… ठीक हो।”

उमर के साथ काम करते थे कमलेश

40 साल के उमर अली लंदन में एक फैंसी सामान की दुकान में कमलेश के साथ काम करते थे। हालांकि हादसे के बाद गुजरात के बनासकांठा जिले के थावर गांव के 48 साल के किसान सावधानभाई के बीच एक अनोखा रिश्ता बन गया।

रोज आता है फोन कॉल

रोज़ काम पर जाते समय उमर अली सावधानभाई से बात करने के लिए फ़ोन करते हैं। इस दौरान मौसम के बारे में रोज़ की बातें, सावधानभाई के स्वास्थ्य, लंच में खाई गई ग्वार बीन्स, उमर का क्लीन-शेव लुक- इन सब पर चर्चा होती है। सावधानभाई कहते हैं, “हमें ज़रा सा नाखून में भी दर्द होता है तो उमर पूछता है और अगर उनके घर पर कोई बीमार होता है, भले ही उसे बुखार हो, हमें पता चल जाता है।”

लंदन से बात करते हुए उमर कहते हैं, “मैं हमेशा सावधानभाई से कहता हूं। भगवान ने हमारा रिश्ता मुमकिन बनाया। कमलेश इसके लिए एक ज़रिया था। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इस परिवार के इतने करीब होऊंगा। मेरे दिल को सुकून सा मिलता है इनसे बात करके और तसल्ली देकर।”

छह महीने पहले जब द इंडियन एक्सप्रेस थावर में सावधानभाई के घर गया था, तो उन्होंने अपने फ़ोन पर एक 30 सेकंड का वीडियो निकाला था। 12 जून को अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाहर से शूट किए गए इस वीडियो में कमलेश और धापूबेन एंट्री गेट पर दिख रहे थे। 26 साल की धापूबेन ने ट्रेडिशनल स्कर्ट पहनी हुई थी, जिसके सिर और चेहरे पर एक चमकदार गुलाबी ओढ़नी थी और 26 साल के कमलेश ने टी-शर्ट और जींस पहनी हुई थी।

सावधानभाई गए थे बेटे को छोड़ने

सावधानभाई ने कहा था, “हम उन्हें छोड़ने गए थे। मैं बहुत कम वीडियो बनाता हूं, लेकिन पता नहीं उस दिन मैंने एक वीडियो क्यों बनाया। शायद इसलिए कि मुझे लगा कि मुझे अपनी बहू की पहली फ़्लाइट रिकॉर्ड करनी चाहिए।” सावधानभाई और रत्नीबेन का यह अहमदाबाद का पहला दौरा था। वे 100 किमी से ज़्यादा का सफ़र करके वापस आते समय मेहसाणा ज़िले के ऊंझा पहुंचे थे, जब उन्हें क्रैश के बारे में पता चला। उन्होंने कार घुमाई और तेज़ी से अहमदाबाद की ओर भागे, यह प्रार्थना और उम्मीद करते हुए कि उनके बच्चे किसी तरह ज़िंदा बच जाएंगे।

कमलेश और धापूबेन उन 241 लोगों में शामिल थे जिनकी प्लेन क्रैश में मौत हो गई थी। कमलेश सितंबर 2022 से लंदन में थे और 22 नवंबर, 2024 को अपनी शादी के लिए बनासकांठा घर आए। वह जल्द ही लंदन के लिए निकल गए और कुछ महीने बाद धापूबेन को अपने साथ ले जाने के लिए वापस आ गए।

परिवार का कहना है कि कमलेश को दो साल पहले वर्क वीज़ा मिला था और उन्हें उम्मीद थी कि वे 5 साल में एक छोटा बिज़नेस शुरू करेंगे। वे अपने 23 वर्षीय छोटे भाई हितेश (जो बनासकांठा से एग्रीकल्चर बिज़नेस मैनेजमेंट में मास्टर्स स्टूडेंट हैं) को अपने साथ ले जाना चाहते थे। कमलेश के मामा देवकरण चौधरी ने कहा, “अब तो यह सोचकर ही हमारे रोंगटे खड़े हो जाते हैं।”

इस साल 6 जनवरी को, सावधानभाई और उनके भतीजे ईश्वर चौधरी अहमदाबाद गए अपने गांव से शहर के एक होटल तक पांंच घंटे का सफ़र किया। यहां एयर इंडिया ने एक फ़ैमिली रिटर्न्स सेंटर बनाया था, जहां 241 यात्रियों के रिश्तेदार क्रैश साइट से मिले अपने प्रियजनों का निजी सामान ले सकते थे।

जब बच्चों की तरह रोए सावधानभाई

होटल के उस बड़े से कमरे के अंदर सावधानभाई बच्चों की तरह रोए जब उन्होंने अपनी हथेलियों में कुछ ट्रांसपेरेंट ज़िपलॉक बैग पकड़े हुए थे। उनमें से एक में उनके बेटे कमलेश की जली हुई शादी की एल्बम थी। दूसरे में एक डेस्कटॉप कैलेंडर था जिसमें नए शादीशुदा जोड़े की तस्वीर थी। वहीं एक बैग में उनके पैन कार्ड, आधार, वोटर कार्ड, मैरिज सर्टिफिकेट थे जो सब जले हुए या पीले पड़ गए थे।

सावधानभाई ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया था, “मैं उन आखिरी चीज़ों को संभाल कर रख रहा था जिन्हें कमलेश ने छुआ था। मैं इन्हें हमेशा अपने पास रखना चाहता हूं।” रत्नीबेन कहती हैं कि बॉडी के साथ उन्हें धापूबेन की पायल और एक ईयररिंग और कमलेश की टी-शर्ट के कुछ टुकड़े एक बॉक्स में पैक करके दिए गए थे। एयर इंडिया ने ‘अनएसोसिएटेड आइटम्स’ (क्रैश साइट से मिले पर्सनल सामान जिनका किसी भी पैसेंजर से कोई लेना-देना नहीं था) के लिए जो पोर्टल बनाया था, उस पर परिवार एक सोने का लॉकेट पहचान सका जो रत्नीबेन ने धापूबेन के लिए उड़ान भरने से एक दिन पहले खरीदा था। साथ ही दो कलश और भगवान शिव की तस्वीर वाला एक चांदी का सिक्का भी था। रत्नीबेन कहती हैं, “एयर इंडिया का स्टाफ मार्च में कलश देने आया था। हमसे कहा गया कि बाकी चीज़ें हमारी हैं, इसका सबूत दिखाओ। हम कैसे दिखा सकते थे? इसलिए हमने उसे जाने दिया।”

‘मेरी ज़िंदगी खत्म हो गई’

सावधानभाई कहते हैं कि जिस दिन उनके बड़े बेटे और उनकी दुल्हन की मौत हुई, उसी दिन उनकी ज़िंदगी खत्म हो गई। लेकिन एक और सिलसिला शुरू होना था। अब एक साल से वह और रत्नीबेन रोज़ाना एक ही चीज़ का बेसब्री से इंतज़ार करते हैं और वह है उमर का दोपहर 3 बजे का कॉल। कमलेश के बॉस अंगत सिंह एक अफ़गान सिख हैं और ‘तन्नीभाई’ के नाम से जाने जाते हैं। उन्होंने उमर को चौधरी परिवार को कॉल करके उनका हालचाल पूछने के लिए भेजा था।

उमर कैसे आए कमलेश के परिवार के करीब?

उमर रोज़ काम पर घर से निकलते समय कमलेश के माता-पिता को कॉल करते हैं। उनके शुरुआती कॉल छोटे होते थे। सावधानभाई को हिंदी में दिक्कत होती थी, कभी-कभी गुजराती में बोल देते थे। उमर कहते हैं कि कमलेश और वह ज़्यादा करीब नहीं थे। वे स्टोर में सहकर्मी थे। तन्नीभाई के कर्मचारियों में सबसे वरिष्ठ उमर सेल्स मैनेजर के रूप में काम करते थे, जबकि कमलेश स्टोर में अन्य क्षेत्र संभालते थे। लेकिन जैसे ही उन्होंने एयर इंडिया क्रैश के बारे में सुना और यह कि कमलेश और धापूबेन मरने वालों में शामिल हैं, कुछ हलचल हुई। वे कहते हैं, “मुझे बहुत दुख हुआ और मैं दहाड़े मारकर रोया। पूरा स्टाफ दौड़कर मेरी तरफ आया और मुझे दिलासा देने की कोशिश की।”

तन्नीभाई के कहने पर उमर ने कमलेश के रूममेट दीक्षित पटेल से सावधानभाई का नंबर लिया और उन्हें कॉल करने की कोशिश की। कुछ दिनों बाद उनकी बात हो गई। उमर ने कहा, “मुझे आज भी उनके शब्द याद हैं। ‘मेरा बेटा चला गया।’ मुझे पता था कि वह दूसरी तरफ रो रहे होंगे। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या कहूं और कुछ बुदबुदाया ‘आपका बेटा और हमारा भाई चला गया।’ मैंने उनसे हिम्मत रखने को कहा और भरोसा दिलाया कि मैं फिर कॉल करूंगा।”

इस तरह एक दिल को छू लेने वाली सादगी वाली परंपरा शुरू हुई और फिर कॉल शुरू हुई। उमर कहते हैं, “सावधानभाई और उनका परिवार बहुत मासूम है। मैंने उनसे कहा कि मेरे मम्मी-पापा अब नहीं रहे, यह रिश्ता भगवान की तरफ से है। मैंने एक बार उनसे कहा था कि जब मैं अपने मम्मी-पापा को फ़ोन करता था, तो वे कभी भी सबसे पहले फ़ोन नहीं काटते थे। वे ‘अल्लाह हाफ़िज़, बाय बाय’ कहते थे, लेकिन मेरे फ़ोन काटने का इंतज़ार करते थे। सावधानभाई अब भी ऐसा ही करते हैं। हम रोज़ बात करते हैं, कभी-कभी काम या दूसरी दिक्कतों की वजह से थोड़ी देर के लिए, लेकिन हम हर दिन किसी न किसी तरह से जुड़ते हैं।”

दस भाई-बहनों में सबसे छोटे उमर ने 2022 में एक महीने के अंदर अपने भाई और पिता को खो दिया, उसके अगले साल उनकी मां की भी मौत हो गई। उन्होंने कहा, “मैं अपने मम्मी-पापा के ज़्यादा करीब नहीं था क्योंकि हमारी उम्र में बहुत फ़र्क था। सावधानभाई ज़्यादा बड़े नहीं हैं। असल में मैं कमलेश से ज़्यादा सावधानभाई के ज़्यादा करीब हूं। कमलेश कहते थे कि उनके पापा उन्हें दोस्त जैसे लगते थे। शायद अब मैं भी सावधानभाई के लिए ऐसा ही महसूस करता हूं।” वे एक ऐसे रिश्ते के बारे में बात करते हुए कहते हैं जिसे बताने में उन्हें मुश्किल होती है।”

ज़्यादातर अच्छे रिश्तों की तरह उनका रिश्ता भी धीरे-धीरे बढ़ा, जो रोज़ाना के कॉल और WhatsApp मैसेज से बना रहा। पहले कुछ महीनों तक उमर हर दिन आता था, फिर सावधानभाई ने जवाब देना शुरू किया। उमर ने कहा, ” धीरे-धीरे, रिश्ता बढ़ता गया। अब मैं उन्हें अपने दिल की बात बताता हूं। वह कमलेश की मां, भाई हितेश, कमलेश के ससुराल वालों के बारे में भी सब कुछ बताते हैं। जब मैं उन्हें दर्द में देखता हूं, तो मुझे बहुत बुरा लगता है। वह पहले ही इतने ट्रॉमा से गुज़र चुके हैं। एक आदमी कितना सह सकता है?”

सावधानभाई कैसे जीते हैं जिंदगी?

कमलेश की मौत के बाद सावधानभाई और रत्नीबेन ने अपनी ज़िंदगी वैसे ही जीने का फैसला किया है, जैसा उनका बेटा चाहता था। सावधानभाई कहते हैं, “कमलेश के जाने से पहले, उसने दिवाली पर हमें एक कार खरीदने का वादा किया था। मुआवज़े के तौर पर मिले पैसों से हमने पिछली दिवाली पर एक कार खरीदी, जैसा उसने चाहा था।” सफ़ेद SUV अब उनके घर के बाहर, टिन की छत के नीचे खड़ी है।

सावधानभाई ने मिले मुआवज़े का एक हिस्सा (अंतरिम राहत के तौर पर 25 लाख रुपये, टाटा ट्रस्ट से 1 करोड़ रुपये की एक्स-ग्रेटिया, और गुजरात CM रिलीफ फंड से 4 लाख रुपये) कमलेश को 2022 में लंदन भेजने के लिए अपने परिवार और दोस्तों से लिए गए 55 लाख रुपये चुकाने में इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा, “कमलेश मुझसे अलग तरह से सोचने के लिए कहते रहते थे। इसी तरह दो महीने पहले, मैंने अपनी 10 बीघा ज़मीन के एक हिस्से पर खरबूजा उगाना शुरू किया, जहां हम सरसों और अरंडी उगाते हैं। हाल ही में, हमने लाल मिर्च की कोशिश की। मैंने रिसर्च की और पाया कि कद्दू और खरबूजे के बीज फलों से ज़्यादा कीमत देते हैं। यह सब मुझे बिज़ी रखता है, यह बस ध्यान भटकाने का एक तरीका है। हमने अपनी पांच में से तीन भैंसें और 10 में से नौ गायें भी बेच दीं। कमलेश हमेशा कहते थे कि यह हमारे लिए बहुत ज़्यादा बोझ है।”

ये सभी फ़ैसले उमर को फ़ोन करने के बाद लिए गए हैं। सावधानभाई कहते हैं, “मैं उनसे हर बात पर बात करता हूं। मान लीजिए, अगर मुझे कोई नई फसल बोनी है, तो मैं आगे बढ़ने से पहले अपने प्लान के बारे में उनसे बात करता हूं। उन्हें खेती के बारे में ज़्यादा नहीं पता, लेकिन वे मुझसे कहते हैं, ‘करो, अगर तुम करोगे, तो अच्छा होगा। खुदा आपको बरकत देगा।’ मैंने उन्हें बोई हुई मिर्च, खरबूजा और तरबूज की तस्वीरें और वीडियो दिखाए।”

उमर को भेजा कूरियर

पिछले महीने सावधानभाई ने उमर के लंदन वाले पते पर 10 किलो का एक पैकेट कूरियर किया। इसमें घर का बना घी, पाचक चूरन और उमर की पत्नी समीना के लिए सूखी कचौरी के दो पैकेट थे। ये ठीक वैसे ही जैसे वे कमलेश के लिए करते थे। सावधानभाई मुस्कुराते हुए कहते हैं, “उमरभाई ने मुझसे पूछा कि मैंने कूरियर पर कितना खर्च किया है और मैंने कहा, ‘अपने रिश्ते के कितने पैसे हैं?’ बेचारे उमर, जवाब नहीं दे पाए। उसके बाद उन्होंने कभी पैसे का ज़िक्र नहीं किया।” कुछ महीने पहले, उमर ने कमलेश के छोटे भाई हितेश के लिए एक ब्लेज़र और एक शर्ट, और उसकी मां रत्नीबेन के लिए एक स्वेटर भेजा था।

इन दिनों सावधानभाई इंग्लिश में भी मैसेज भेजते हैं। वे कहते हैं, “मैंने टेक्स्ट ट्रांसलेट करना सीख लिया है। मैं पहले गुजराती से इंग्लिश में ट्रांसलेट करता हूं, फिर उसे वापस गुजराती में ट्रांसलेट करता हूं ताकि उमर और उसके परिवार को भेजने से पहले कोई गलती न हो।” उन्होंने उमर को इंग्लिश में जो मैसेज लिखे, उनमें से एक में लिखा है, “जब तुमने फ़ोन किया तो मैं शोर वाली जगह पर था, इसलिए मुझे फ़ोन न उठाने का अफ़सोस है। मैं कुछ ज़रूरी काम से गया था। तुम ठीक हो जाओगे, थैंक यू और हाथ जोड़ने वाला इमोजी भी है।”

कमलेश के जाने के बाद, सावधानभाई का फ़ोन उनकी यादों का रखवाला है। उनके दिल के करीब कई टेक्स्ट मैसेज हैं, जो उन्होंने लंदन में कमलेश के एम्प्लॉयर तन्नीभाई के साथ शेयर किए थे। इनमें से एक, जिसे तन्नीभाई ने गूगल ट्रांसलेट का उपयोग करके गुजराती में लिखा है। उसमें लिखा है, “तामे केम छो? कमलेश ना भाई केम छे? बधू ठीक चली रह्यु छे ने (आप कैसे हैं? कमलेश का भाई कैसा है? क्या सब ठीक चल रहा है)?”

सावधानभाई को आते हैं पैसे

पिछले 12 महीनों से तन्नीभाई सावधानभाई के अकाउंट में 50,000 रुपये ट्रांसफर कर रहे हैं। लंदन से द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए तन्नीभाई कहते हैं, “मैंने एक फंडरेज़िंग पेज भी बनाया है जहां हमने अपने परिवार और दोस्तों से 2,800 यूरो जमा किए हैं। मैंने अभी तक सावधानभाई के साथ यह शेयर नहीं किया है, लेकिन मेरा प्लान है कि यह रकम या तो हितेश की शादी के लिए या जब मैं उन्हें हर महीने सपोर्ट नहीं कर पाऊंगा, तब भेजूंगा।”

12 जून को हादसे की बरसी पर, सावधानभाई, रत्नीबेन और परिवार के बाकी लोग अहमदाबाद में क्रैश साइट पर जाने का प्लान बना रहे हैं। सावधानभाई कहते हैं, “कभी-कभी, मैं आधी रात को जाग जाता हूं, कमलेश और धापूबेन के बारे में सोचता हूं और बहुत बेबस महसूस करता हूं। हम किसान हैं। हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा बेटा विदेश जाएगा। जाने से पहले, उसने हमसे कहा था कि वह हमें एक बार लंदन ले जाएगा। बड़े सपने, अब सब टूट गए।”

पुरानी यादों के साथ जीते हैं सावधानभाई

फ़ोन अनलॉक करके सावधानभाई, कमलेश के कुछ वीडियो दिखाते हैं जिन्हें उमर ने एडिट करके भेजा है। साथ ही 12 जून को उन्हें अपने WhatsApp स्टेटस पर अपलोड करने के तरीके भी बताए हैं। इनमें से एक वीडियो में कमलेश और धापूबेन की फ़ोटो है, जिसके साथ एक वॉइसओवर है जो कहता है, “हमारे पास बस खूबसूरत यादें बची हैं, वे ज़िंदगी भर हमारे साथ रहेंगी, रेस्ट इन पीस’। दूसरा स्टिल्स का मोंटाज है जिसमें कमलेश शानदार पोज़ दे रहे हैं और एक धापूबेन के साथ। बैकग्राउंड में बॉलीवुड फिल्म बॉर्डर का एक गाना (संदेशे आते हैं) बज रहा है।

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