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70 साल बाद टाटा ग्रुप को वापस मिली एयर इंडिया की कमान, जानें कैसे सरकार ने ‘छीन’ ली थी एयरलाइन

दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई डकोटा विमानों को बाजार में उतार दिये। उस दौरान कई उद्योगपति इस तरह के व्यवसाय में आये। भारत में की एक दर्जन से अधिक कंपनियां बाजार में आ गईं।

JRD tata, Air India
Air India की स्थापना J.R.D. Tata ने साल 1932 में की थी(फोटो सोर्स: Express)।

गिरीश कुबेर

एयर इंडिया को खरीदे जाने को लेकर टाटा समूह इसे अपनी बड़ी उपलब्धि की तरह मान रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि टाटा के लिए एयर इंडिया केवल एक व्यवसाय का जरिया ही नहीं था बल्कि यह उनके खास प्रोजेक्ट में शुमार था। बता दें कि लगभग सात दशक बाद टाटा ने एयर इंडिया को सरकार से वापस लिया है।

टाटा एयरलाइंस: दरअसल एयर इंडिया 1947 के बाद से भारत के लिए एक चमकते गहने के समान था। इसकी शुरुआत और इसे चलाने के तरीके पर तत्कालीन भारत सरकार को भी गर्व था। 1930 के दशक में एयर इंडिया को टाटा एयरलाइंस के नाम से लॉन्च किया गया था। जेआरडी टाटा को उम्मीद थी कि आजाद भारत को यह एयरलाइंस कंपनी नई ऊंचाइयों पर ले जाने में मदद करेगी। लेकिन ऐसा हो नहीं सका।

एयर कॉरपोरेशन कानून: शुरुआती दिनों में जेआरडी ने सरकार को प्रस्ताव दिया था कि एयर इंडिया इंटरनेशनल के तहत एक अंतरराष्ट्रीय सेवा की शुरुआत एक सहयोगी कंपनी के रूप में की जाए। इसके लिए सरकार ने अपनी सहमति भी व्यक्त कर दी। और 1948 में टाटा एयरलाइंस की 49 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी। इसके 5 साल बाद भारत सरकार ने 1953 में एयर कॉरपोरेशन कानून बनाया और टाटा एयरलाइंस की हिस्सेदारी में अपनी बढ़त बना ली। बाद में सरकार ने इसका नाम बदलकर ‘एयर इंडिया इंटरनेशनल’ कर दिया।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद आया बदलाव: दरअसल दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका ने कई डकोटा विमानों को बाजार में उतार दिया था और सभी उस दौरान कई उद्योगपति इस तरह के व्यवसाय में आये। वहीं भारत में जहां मुश्किल से कुछ कंपनियां ही टिक पाती थीं, एक दर्जन से अधिक एयरलाइन कंपनियां सामने आ गईं। हालांकि सभी का व्यवसाय एक समान नहीं रहा।

टाटा एयरलाइंस को छोड़कर लगभग सभी को नुकसान हो रहा था। इसी दौरान अंबिका एयरलाइंस और जुपिटर एयरवेज ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया। ऐसे में तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसका राष्ट्रीयकरण करने का प्रस्ताव किया।

सरकार के इस कदम के खिलाफ जेआरडी टाटा ने अपनी आवाज उठाई। उस वक्त सरकार ने 11 एयरलाइनों का राष्ट्रीयकरण करने का फैसला किया। ऐसे में टाटा समूह अकेले विरोध करने में ज्यादा देर ना टिक सका। इसके बाद सभी भारतीय विमानन कंपनियों को एक में विलय कर दिया गया। और इसपर सरकार का नियंत्रण हो गया। बता दें कि सरकार ने एयर इंडिया को खरीदने के बदले में टाटा समूह को 2.8 करोड़ रुपये दिए थे।

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