कुछ कहानियां किसी दिलचस्प बातों से शुरू होती हैं और कुछ ठोस तथ्यों से। लेकिन यह कहानी सिर्फ एक नंबर और एक अक्षर से शुरू होती है — 11A। शुक्रवार को एअर इंडिया विमान दुर्घटना को एक साल पूरा हो रहा है, लेकिन हादसे में एकमात्र जीवित बचे यात्री विश्वास आज भी उस दिन की भयावह यादों से उबर नहीं पाए हैं। वह कहते हैं, “मुझे नहीं लगता कि मैं कभी पूरी तरह से सामान्य हो पाऊंगा। जो कुछ मैंने झेला है और जो कुछ खोया है, उसके साथ मुझे जिंदगी भर जीना होगा।”
ब्रिटिश नागरिक विश्वास जिनकी जड़ें दीव से जुड़ी हैं, उन्होंने द इंडियन एक्सप्रेस से फोन पर खास बातचीत की। यह बातचीत उनके पीआर और सलाहकार संजीव पटेल, जो लीसेस्टर में रहने वाले एक मोटिवेशनल स्पीकर हैं, उनकी मदद से हो पाई। इस विमान हादसे में विश्वास ने अपने 35 वर्षीय भाई अजय को खो दिया था। उनका कहना है कि अब उन्हें अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है।
विश्वास कहते हैं, “अंतिम जांच रिपोर्ट बहुत जरूरी है। इससे हमें पता चलेगा कि आखिर हुआ क्या था और यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो।”
हादसे की रिपोर्ट अब तक नहीं आई
हादसे के एक महीने बाद एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि विमान के इंजन के फ्यूल कंट्रोल स्विच उड़ान भरने के तुरंत बाद “रन” से “कटऑफ” स्थिति में चले गए थे। ये स्विच इंजन तक जेट ईंधन की आपूर्ति को कंट्रोल करते हैं।
पिछले महीने केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा था कि अंतिम जांच रिपोर्ट आखिरी चरण में है और इसे एक महीने के भीतर पूरा किया जा सकता है। संभावना है कि यह रिपोर्ट हादसे की पहली बरसी तक जारी हो जाए। विश्वास का कहना है कि इस मुश्किल दौर में उनके परिवार और संजीव पटेल ने उन्हें संभाले रखा। वह कहते हैं, “मेरे परिवार और संजीवभाई के सहयोग से ही मुझे इस दुख और सदमे का सामना करने की ताकत मिलती है।”
विश्वास का परिवार पहले दीव में मछली पकड़ने का कारोबार करता था। बाद में परिवार के अधिकांश सदस्य ब्रिटेन चले गए। चार भाइयों में सबसे बड़े विश्वास लीसेस्टर में अपनी पत्नी हिरल, पांच वर्षीय बेटे दिवांग, माता-पिता रमेशभाई और जयाबेन तथा सबसे छोटे भाई नयन के साथ रहते हैं। उनके तीसरे भाई सनी अभी भी दीव में रहते हैं।
विमान के मलबे से दूर जा गिरे थे विश्वास
हादसे वाले दिन विश्वास विमान में इमरजेंसी एग्जिट के पास वाली सीट पर बैठे थे। विमान अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास भवनों से टकरा गया और तीन हिस्सों में टूट गया। हादसे के दौरान विश्वास विमान के मलबे से दूर जा गिरे। बाद में आपातकालीन सेवाओं के कर्मियों ने उन्हें चलते हुए पाया और अहमदाबाद सिविल अस्पताल पहुंचाया।
हालांकि, अपने भाई अजय की मौत के सदमे से परिवार बुरी तरह टूट गया था। अजय विमान में विश्वास से कुछ सीट दूर बैठे थे। इसके बाद परिवार ने संजीव पटेल से सहायता मांगी। BAPS संस्था से जुड़े संजीव पटेल ने पिछले साल 15 जून को हादसे के पीड़ित परिवारों के लिए एक प्रार्थना सभा आयोजित करने में मदद की थी। इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के राजा चार्ल्स के प्रतिनिधि और लीसेस्टरशायर के लॉर्ड लेफ्टिनेंट माइकल कपूर भी शामिल हुए थे।
संजीव पटेल कहते हैं, “श्रद्धांजलि सभा बेहद सम्मानजनक तरीके से आयोजित की गई थी। विश्वास के चाचा महेशभाई समुदाय के वरिष्ठ सदस्य हैं और उन्होंने मुझसे संपर्क किया था।”
कुल 260 लोगों की हुई थी मौत
पटेल बताते हैं कि वह इस हादसे में अपने प्रियजनों को खोने वाले कम से कम एक दर्जन ब्रिटिश परिवारों की भी मदद कर रहे हैं, जिनमें जरूरी दस्तावेजी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। इस दुर्घटना में कुल 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 52 ब्रिटिश नागरिक शामिल थे। इनमें से 19 लोग मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर में मौजूद थे।
पटेल कहते हैं, “इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। ऐसे अनुभवों को भुलाना आसान नहीं होता। चिंता और मानसिक आघात हर दिन उनके साथ रहता है। विश्वास के लिए यह संघर्ष रोज का है।” पटेल यह सहायता नि:शुल्क दे रहे हैं।
विश्वास के परिवार को एअर इंडिया की ओर से अन्य पीड़ित परिवारों की तरह 25 लाख रुपये का अंतरिम मुआवजा मिला है। इसके अलावा एअर इंडिया विश्वास के इलाज का खर्च भी उठा रही है। संजीव पटेल कहते हैं, “कई परिवार आज भी इस हादसे के परिणामों के साथ जी रहे हैं। यह सिर्फ शारीरिक चोट या मानसिक आघात का मामला नहीं है, बल्कि पूरे परिवार पर इसका गहरा असर पड़ा है।”
विश्वास के परिवार को ब्रिटेन की कानूनी फर्म हजेल सॉलिसिटर्स भी सहायता दे रही है। एअर इंडिया से आगे क्या अपेक्षा है, इस सवाल पर पटेल ने कहा, “अब तक मिली चिकित्सा सहायता की हम सराहना करते हैं। इसके अलावा हम ऐसी उचित आर्थिक सहायता चाहते हैं जो विश्वास के जीवन पर पड़े दीर्घकालिक प्रभाव को ध्यान में रखे। हमारी उम्मीद है कि ऐसा समाधान निकले जिससे उन्हें आर्थिक स्थिरता मिले और उनका परिवार इस कठिन समय में सुरक्षित भविष्य की ओर बढ़ सके।”
