छेड़छाड़ के एक मामले में पीड़िता के बयान के बाद वायुसेना के जवान को बरी कर दिया गया है। कानपुर की एक विशेष अदालत ने अपनी नाबालिग साली से छेड़छाड़ के मामले में वायुसेना के एक जवान को कथित पीड़िता के बयान के बाद बरी कर दिया गया। बयान में लड़की ने कहा कि घटना ‘सपने में हुई थी’ और उसने गलतफहमी में शोर मचा दिया था। हालांकि इस मामले में वायुसेना के जवान को 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे।

बचाव पक्ष के वकील करीम अहमद सिद्दीकी ने न्यूज एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि 15 साल की एक लड़की ने आरोप लगाया था कि 8 मार्च 2019 को नौबस्ता के खाड़ेपुर में बहन के ससुराल में उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उससे कथित तौर पर छेड़छाड़ की जब वह सो रही थी। उन्होंने बताया कि लड़की के आरोपों के आधार पर लगभग पांच महीने बाद 3 अगस्त 2019 को नौबस्ता थाने में पॉक्सो (POCSO) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई थी और जमानत मिलने से पहले शुक्ला को 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे।

पीड़िता का बयान- गलतफहमी में शिकायत दर्ज कराई

वकील सिद्दीकी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान लड़की ने अदालत को बताया कि वह ‘एंटीबायोटिक’ दवाएं ले रही थी और घटना वाली रात वह अर्द्धबेहोशी की हालत में थी। नाबालिग ने बताया कि उसे ‘सपने में महसूस’ हुआ कि उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उसे पकड़ लिया और उससे छेड़छाड़ की, जिसके बाद वह डरकर जाग गई और शोर मचा दिया। उन्होंने बताया कि लड़की के पिता और बड़ी बहन ने भी अदालत को बताया कि शुक्ला के खिलाफ शिकायत गलतफहमी में दर्ज कराई गई थी।

वकील ने बताया कि विशेष पॉक्सो अदालत की न्यायाधीश रश्मि सिंह ने 7 मार्च को शुक्ला को बरी कर दिया, जिससे सात साल की कानूनी लड़ाई खत्म हो गई। अनुराग शुक्ला ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उनके खिलाफ 3 अगस्त 2019 को एफ़आईआर दर्ज की गई थी और उन्हें उसी साल 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर को जमानत मिलने से पहले उन्हें 19 दिन जेल में बिताने पड़े।

वायुसेना जवान बोला- मुझे मामले में झूठा फंसाया गया

वायुसेना जवान ने कहा कि इस मुकदमे की वजह से उन्हें बहुत मानसिक तनाव हुआ, उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा और करियर की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा। उन्होंने दावा किया कि इस मुकदमे के कारण वह 2020 में कॉर्पोरल के पद पर प्रोन्नति नहीं पा सके और उन्हें ‘लीडिंग एयरक्राफ्टमैन’ के तौर पर ही काम करना पड़ा। शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया, ”मुझे इस मामले में झूठा फंसाया गया क्योंकि मेरे ससुर विजय तिवारी चाहते थे कि मैं अपनी जमीन, घर और दूसरी संपत्ति अपनी पत्नी और साली के नाम कर दूं।”

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को लुधियाना के एक कपड़ा व्यापारी द्वारा दायर उस जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया जिसमें याचिका का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल करने की बात स्वीकार की गई। व्यापारी उसमें इस्तेमाल किए गए जटिल कानूनी शब्दों की व्याख्या करने में असमर्थ था। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें

(इनपुट- भाषा)