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बालाकोट में पहुंचाए नुकसान के सबूत वायुसेना ने सरकार को सौंपे

दरअसल, जिन बमों का भारतीय वायुसेना ने इस्तेमाल किया था, उनके इस्तेमाल के बाद इमारतों में चार काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं। असर कैसा होता है, यह बताने के लिए रिपोर्ट में पोखरण में इस्तेमाल बंकर बस्टर बमों के असर का वीडियो और विवरण दिया गया है।

एयरस्ट्राइक के बाद जाबा, बालाकोट जाते पाकिस्तानी रिपोटर्स और ट्रूप्स, फोटो सोर्स- एपी

पाकिस्तान के बालाकोट में भारतीय वायुसेना के लक्षित हमले में भारी तबाही हुई है और लड़ाकू विमानों से दागे गए 80 फीसद बम (स्पाइस ग्लाइड बम 2000) निशाने पर लगे। वायुसेना ने अभियान के 10 दिनों के बाद बुधवार को वहां हुए नुकसान के सबूत सरकार को सौंप दिए। वायुसेना ने तबाह हुए निशानों की उपग्रह तस्वीरों और इस्तेमाल किए गए बमों के विवरण के साथ सरकार को 12 पन्नों की रिपोर्ट सौंपी है। वायुसेना ने स्पाइस 2000 ग्लाइड बमों का इस्तेमाल किया था जो विशेष लक्ष्यों को नष्ट करती है। पुलवामा में आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के फिदायीन हमले के बाद वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट एवं पाक अधिकृत कश्मीर में स्थित तीन जगहों पर स्थित जैश के ठिकानों पर हवाई हमला कर आतंकी शिविरों पर बम गिराए थे।

वायुसेना के एक आला अधिकारी के मुताबिक, 26 फरवरी को की गई कार्रवाई के इन सबूतों में सभी तस्वीरों को सरकार को सौंपा गया है। यह बताया गया है कि किस तरह उनके अधिकतर निशाने सटीक लगे हैं। वायुसेना ने सरकार को 12 पेज की रिपोर्ट सौंपी है। इसमें वायुसेना ने बालाकोट के उस क्षेत्र की हाई रिजोल्यूलेशन तस्वीर भी साझा की है। अधिकारियों के मुताबिक, यह रिपोर्ट सार्वजनिक होगी या नहीं इस पर फैसला सरकार ही लेगी।

पाकिस्तान में घुसकर आतंकी ठिकानों पर भारतीय वायुसेना के हवाई हमले में हुए नुकसान को लेकर विपक्षी दलों समेत कई हलकों में सवाल उठे हैं। ताजा विवाद कुछ अतंरराष्ट्रीय मीडिया की उन रिपोर्ट्स के बाद शुरू हुआ, जिसमें तस्वीरों के आधार पर दावा किया गया कि वायुसेना के लक्षित हमले के बाद भी आतंकी ठिकानों में इमारतें जस की तस खड़ी हैं। जबकि, वायुसेना ने अपनी रिपोर्ट में जो तस्वीरें दी हैं, उनमें हवाई हमले के नुकसान के निशान साफ दिखाई दे रहे हैं। पिछले 12 घंटों में यह रिपोर्ट तैयार की गई है। तस्वीरों से साफ है कि भारतीय बमों से इमारतों में कई छेद हुए हैं। वायुसेना की रिपोर्ट का दावा है कि जरूरी नहीं है कि बंकर बस्टिंग ग्लाइड बमों के हमले में इमारत पूरी तरह से ध्वस्त हो जाए।

दरअसल, जिन बमों का भारतीय वायुसेना ने इस्तेमाल किया था, उनके इस्तेमाल के बाद इमारतों में चार काले धब्बे दिखाई दे रहे हैं। असर कैसा होता है, यह बताने के लिए रिपोर्ट में पोखरण में इस्तेमाल बंकर बस्टर बमों के असर का वीडियो और विवरण दिया गया है। इससे साफ है कि मिसाइल के लगने के बाद भी इमारत पूरी तरह से ध्वस्त नहीं होती है। वायुसेना की तस्वीरों में कुछ पेड़ भी नष्ट हुए दिखाई देते हैं। स्पाइस 2000 ग्लाइड बम को इजराइल ने विकसित किया है और इसी का इस्तेमाल भारतीय वायुसेना के मिराज 2000 प्लेन ने पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए किया था। रिपोर्ट के मुताबिक सेना के 80 फीसद तक अचूक थे और जिन-जिन इमारतों को निशाना बनाया गया था, वे सभी सही जगह पर जाकर गिरे।

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