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Air Fare Rules: यात्रियों से मनमर्जी का किराया वसूल कर सकेंगी एयरलाइंस, 31 से बदल रहे नियम

साल 2020 में कोरोना काल के दौरान सरकार ने एयरलाइनों के लिए एयरकैप सिस्टम लागू किया था। इसके तहत सरकार हर 15 दिन बाद एय़रलाइंस के न्यूनतम और अधिकतम किराये का एक बैंड निर्धारित करती थीं और कंपनियां इस सीमा से ऊपर या नीचे किराया नहीं वसूल सकती थीं।

Air Fare Rules: यात्रियों से मनमर्जी का किराया वसूल कर सकेंगी एयरलाइंस, 31 से बदल रहे नियम
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit – Pixabay)

हवाई यात्रा के किराए में आने वाले समय में बदलाव हो सकता है। सरकार ने हवाई किराए की सीमाओं को हटा दिया है। एयरलाइंस को आजादी दी गई है कि वो अपने हिसाब से यात्रियों से किराया वसूल सकती हैं। कोरोना महामारी के दौरान लगाई गई ऊपरी और निचली सीमाएं दोनों हटा दी गई हैं और 31 अगस्त से यह नियम लागू कर दिया जाएगा।

कई एयरलाइंस कंपनियों ने भारी नुकसान की जानकारी दी है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने कीमतों पर प्रतिबंध हटाते हुए कहा कि विमान किराया कैप 31 अगस्त से हटा दिया जाएगा। ऐसे में कंपनियां टिकटों के रेट कम कर ऑफर भी निकाल सकती हैं, ताकि यात्रियों की संख्या बढ़े।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक, डेली मांग प्राइस विश्लेषण के बाद विमान किराया कैप हटाने का निर्णय लिया गया है। अब कंपनियों के पास अपने हिसाब से रेट तय करने का अधिकार होगा। उधर, नई एयरलाइन कंपनी अकासा एयरलाइन ने टिकटों का दाम कम करके अन्य एयरलाइंस के लिए कॉम्पीटीशन बढ़ा दिया है।

सरीन एंड कंपनी के संचालन प्रमुख विनमरा लोंगानी ने एक टीवी चैनल को बताया, “मैं इसे यात्रियों के लिए सकारात्मक मानता हूं क्योंकि इससे किराए में कमी आनी चाहिए।” विमानन विशेषज्ञ परवेज दमानिया ने कहा, “मुझे लगता है कि यह उपभोक्ताओं के साथ-साथ एयरलाइंस के लिए भी एक उत्कृष्ट कदम है।”

नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर कहा, “हवाई किराए की सीमा को हटाने का निर्णय दैनिक मांग और एयर टर्बाइन ईंधन की कीमतों के सावधानीपूर्वक विश्लेषण के बाद लिया गया है। अब स्थिति बदल रही है और हम जानते हैं कि यह क्षेत्र आने वाले समय में घरेलू यातायात में वृद्धि के लिए तैयार है।”

बता दें कि साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान सरकार ने एयरलाइनों के लिए एक किराया कैप सिस्टम एयरकैप लागू किया था। इसके तहत सरकार हर 15 दिन बाद एय़रलाइंस के न्यूनतम और अधिकतम किराये का एक बैंड निर्धारित करती थीं। एयरलाइंस कंपनियों के पास इस बैंड के ऊपर या नीचे किराया निर्धारित करने का अधिकार नहीं था। महामारी के दौरान विमानन उद्योग सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था।

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