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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- हमारे धर्म से जुड़ा है तलाक और एक से ज्यादा शादी का मामला, आप नहीं दे सकते दखल

AIMPLB ने कहा कि सभी मुसलमान पैगम्बर के आदेशों को मानने के लिए बाध्य हैं और जो भी पैगम्बर मानने से मना करता है तो वह उनपर भी लागू है।

ग्राफिक्‍स का इस्‍तेमाल केवल प्रस्‍तुतिकरण के लिए किया गया है।

ट्रिपल तलाक मामले पर अॉल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा कि अगर ट्रिपल तलाक को अवैध करार कर दिया जाता है तो यह अल्लाह के निर्देशों की अनदेखी और पवित्र कुरान को फिर से लिखने जैसा होगा। AIMPLB ने संविधान के आर्टिकल 25 का हवाला देते हुए कहा कि इसमें व्यक्तिगत कानून प्रावधानों को पवित्र माना गया है। उन्होंने कहा कि अगर पवित्र पुस्तक के छंदों की एेसे निंदा होती रही, तो जल्द ही इस्लाम खत्म हो जाएगा। उन्होंने कहा कि हालांकि ट्रिपल तलाक इस्लाम में तलाक का एक असामान्य तरीका है, लेकिन इसे अवैध करार नहीं दिया जा सकता, क्योंकि यह कुरान में लिखा है।

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक कुरान में ट्रिपल तलाक को अनिवार्य बताते हुए AIMPLB ने इस मामले की सुनवाई से तीन दिन पहले अपने लिखित जवाब में कहा, पवित्र किताब के मुताबिक तीन बार तलाक कहने के बाद पत्नी अपने पूर्व पति के लिए गैरकानूनी हो जाती है, जब तक कि ‘हलाला’ की प्रक्रिया अपने प्राकृतिक स्वरूप में न हो। जवाब में कहा गया कि ट्रिपल तलाक को कुरान में स्थिरता साफ तौर पर दी गई है। उन्होंने कहा कि तलाक के बाद वह शख्स महिला से दोबारा शादी नहीं कर सकता, जब तक कि महिला अपनी पसंद के किसी और शख्स से शादी न कर ले और फिर वह शादी पति की मौत या तलाक के कारण खत्म न हो जाए। AIMPLB के वकील एजाज मकबूल ने कहा है कि इसका मकसद एक तलाकशुदा महिला को दोबारा अपनी मर्जी से शादी करने का अधिकार देना है।

‘आपको नहीं है हक’: बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि उसे व्यक्तिगत कानून प्रावधानों की वैधता की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी मुसलमान पैगम्बर के आदेशों को मानने के लिए बाध्य हैं और जो भी पैगम्बर मानने से मना करता है तो वह उनपर भी लागू है। उन्होंने कहा कि पैगम्बर ने तीन तलाक के बाद पार्टियों को अलग होने का निर्देश दिया है और यह भी कहा है कि अगर पूर्व पति महिला से दोबारा शादी करता है तो वह पाप होगा। साथ ही तीन बार तलाक बोलने के बाद किसी भी शख्स को महिला को अपने पास रखने का अधिकार नहीं है। बोर्ड ने यह भी कहा कि इस पाप का नतीजा बहुत बुरा होगा क्योंकि एेसे रिश्ते से पैदा होने वाले बच्चे नाजायज होंगे और पिता की संपत्ति में उनके हक पर भी सवाल उठेंगे।

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