AIMPLB says Halala is totally unrelated to Islam- मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा- हलाला का इस्‍लाम से कोई ताल्‍लुक नहीं - Jansatta
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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा- हलाला का इस्‍लाम से कोई ताल्‍लुक नहीं

निकाह हलाला के तहत एक व्यक्ति अपनी पूर्व पत्नी से तब तक दोबारा शादी नहीं कर सकता… जब तक कि वह महिला किसी अन्य पुरूष से शादी कर उससे शारीरिक संबंध नहीं बना लेती और फिर उससे तलाक लेकर अलग रहने की अवधि (इद्दत) पूरा नहीं कर लेती।

एक मुस्लिम पति को एक से ज्यादा पत्नियां रखने का अधिकार है। (Photos : Express Archive)

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने कहा है कि ‘हलाला’ का इस्‍लाम से कोई ताल्‍लुक नहीं है। एएनआई के अनुसार, बोर्ड ने कहा, ”हलाला को इस्‍लाम की चीज बता कर, बना कर पेश किया है। पूरे देश में जिस हलाला को इस्‍लाम की तरफ मंसूब किया गया, इस्‍लाम की चीज कहा गया, इस्‍लाम और मुसलमानों को बदलाम करने और औरतों पर जुल्‍म करने का ताना दिया है, उस हलाला से इस्‍लाम का कोई ताल्‍लुक नहीं है।” निकाह हलाला के अंतर्गत, अगर तीन तलाक दी गई मुस्लिम महिला अपने पति के पास वापस जाना चाहती है, तो उसे एक अन्य मर्द से शादी करनी होगी, फिर उसे तलाक देना होगा और उसके बाद ही वह अपने पहले पति से शादी कर सकती है। एक मुस्लिम पति को एक से ज्यादा बीवियां रखने का अधिकार है। निकाह हलाला की कानूनी वैधता की अब उच्चतम न्यायालय पड़ताल करेगा। न्यायालय की एक संविधान पीठ इस प्रथा की वैधता को चुनौती देने वाली चार याचिकाओं पर सुनवाई करेगी।

गौरतलब है क‍ि सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर कई याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई चल रही है। इन याचिकाओं के जरिए बहुविवाह प्रथा, निकाह हलाला, निकाह मुता (शिया समुदाय में अस्थाई विवाह की प्रथा) और निकाह मिस्यार (सुन्नी समुदाय में कम अवधि के विवाह की प्रथा) को चुनौती दी गई है। इन्हें संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन बताया है।

क्‍या है हलाला, ज‍िसके नाम पर मुस्लिम मह‍िलाओं की इज्‍जत से खेलता है समाज, एक रात संबंध बनाकर देते हैं तलाक

संविधान का अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता की गारंटी, अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग, स्थान और जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित और अनुच्छेद 21 जिंदगी और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा की गारंटी प्रदान करता है।

केंद्र सरकार ने तीन तलाक का विरोध किया है। इस प्रथा के खिलाफ लोकसभा में पहले ही विधेयक पारित हो चुका है और राज्यसभा में लंबित है। यह तीन तलाक को अवैध बनाता है और पति के लिए तीन साल तक की कैद की सजा का प्रावधान करता है। मसौदा कानून के तहत तीन तलाक किसी भी रूप में (मौखिक , लिखित या ईमेल , एसएमएस और व्हाट्सऐप सहित इलेक्ट्रानिक तरीके से) अवैध और अमान्य होगा।

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