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AIMPLB ने कहा- देश के हर जिले में शरिया कोर्ट नहीं, जहां जरूरत है, वहीं बनाएंगे

बीजेपी ने पर्सनल लॉ के इस फैसले का विरोध किया था। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा देशभर में शरिया कोर्ट की स्थापना के प्रस्ताव पर कहा था कि भारतीय संविधान इसकी इजाजत नहीं देता।

जफरयाब जिलानी AIMPLB (फोटो सोर्स- एएनआई ट्विटर)

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य जफरयाब जिलानी ने देश के हर जिले में शरिया कोर्ट बनवाने के मामले में नई बात कही है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक जिलानी ने कहा कि उन्होंने कभी भी ऐसा नहीं कहा था कि देश के हर जिले में शरिया कोर्ट (दारुल-कज़ा) बनवाई जाएगी, बल्कि जहां जरूरत है वहीं बनाई जाएंगी। जिलानी ने कहा, ‘हमने कभी भी ऐसा नहीं कहा कि देश के हर जिले में शरिया कोर्ट बनाएंगे। हमारा उद्देश्य केवल यह है कि जिन जिलों में इस कोर्ट की जरूरत है, केवल वहां इसे बनाना। हम केवल वहीं शरिया कोर्ट बनवाएंगे जहां जरूरत है और जहां लोग चाहते हैं।’

बता दें कि कुछ दिनों से शरिया कोर्ट को लेकर देश में बहस छिड़ी हुई है। यह बहस तब शुरू हुई जब मुस्लिम एआईएमपीएलबी ने कहा कि वह देश के हर जिले में शरिया कोर्ट खोलना चाहता है। उस वक्त जफरयाब जिलानी ने कहा था कि दारुल-कज़ा कमेटी का मकसद है कि हर जिले में शरिया अदालतें हों, ताकि मुस्लिम लोग अपने शरिया मसलों को लेकर अदालतों में जाने के बजाए दारुल-कज़ा में इन्हें सुलझाएं।

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बीजेपी ने पर्सनल लॉ के इस फैसले का विरोध किया था। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने भी पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा देशभर में शरिया कोर्ट की स्थापना के प्रस्ताव पर कहा था कि भारतीय संविधान इसकी इजाजत नहीं देता। उन्होंने कहा था, ‘शरिया अदालतें भारतीय संवैधानिक प्रणाली के तहत एक दुर्लभ दिमागी उपज है, इस पर चर्चा करने का कोई मतलब नहीं है।’ वहीं पूर्व उप राष्ट्रपति हामिस अंसारी ने शरिया कोर्ट के पक्ष में बयान देते हुए कहा था कि देश के सभी समुदाय को अपना पर्सनल लॉ मानने का अधिकार है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में शरिया अदालतों में प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि किसी को शरिया कोर्ट का फैसला मानने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और न ही किसी को शरिया कोर्ट में जाने से रोका जा सकता है।

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