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कोरोना, लॉकडाउन की भेंट चढ़े काम-धंधे और उद्योग! सर्वे में खुलासा- हर 3 में से एक छोटा कारोबार बंदी के कगार पर

देश की विकास दर 2019-20 में 11 साल के न्यूनतम स्तर 4.2 फीसदी पर आ गई। RBI ने हाल ही में कहा कि विकास दर 2020-21 में नकारात्मक रह सकती है।

Author Translated By Ikram नई दिल्ली | Published on: June 2, 2020 9:46 AM
businessesकोरोना वायरस महामारी के चलते देश में कारोबार जगत को खासी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

भारत में कोरोना वायरस महामारी और राष्ट्रीय व्यापी लॉकडाउन के चलते छोटे और मध्यम उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऑल इंडिया मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (AIMO) के साथ नौ अन्य उद्योग निकायों के साथ कराए गए एक सर्वे के मुताबिक देश में एक तिहाई से अधिक स्व-नियोजित छोटे और मध्यम उद्योगों में रिकवरी का कोई आधार नजर नहीं आता। ये उद्योग बंदी की कगार पर पहुंच गए हैं।

AIMO के सर्वे में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME), स्व-नियोजित, कॉर्पोरेट सीईओ और कर्मचारियों की 46,525 प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया है। ये ऑनलाइन सर्वे से 24 मई से 30 मई के बीच कराया गया। इसमें 35 फीसदी MSME और 37 फीसदी स्व-नियोजित रोजगार से जुड़े लोगों ने कहा कि उनके उद्योग पटरी पर लौटना बहुत मुश्किल हैं। 32 फीसदी MSME ने कहा कि उनके उद्योगों को स्थिति से उबरने में छह महीने का समय लगेगा जबकि महज 12 फीसदी ने कहा कि तीन महीने से भी कम वक्त में उनके उद्योग की स्थिति संभल जाएंगी।

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सर्वे से पता चलता है कि कि तीन महीने में रिकवरी की उम्मीद करने वाले कॉरपोरेट सीईओ की प्रतिक्रिया में कारोबार के लिए धारणा अधिक आशावादी है।

एआईएमओ के पूर्व अध्यक्ष केई रघुनाथन ने कहा कि उद्योगों के संचालन में कमी, भविष्य के बारे में अनिश्चितता छोटे और मध्यम उद्योगों से संबंधित प्रमुख कारकों में एक है। मगर उद्योगों को बंद करने का कारण पूरी तरह से कोरोना महामारी नहीं हो सकती। उद्योग पहले से ही विभिन्न परेशानियों का सामना कर रहे हैं। चाहे नोटबंदी हो या जीएसटी, पिछले तीन वर्षों में अर्थव्यवस्था में मंदी के कारण उद्योगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। इसके अलावा कोरोना महामारी ताबूत में आखिरी कील साबित हुई। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से इस तरह बड़े पैमाने पर व्यापार का विनाश नहीं हुआ है।

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राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा पिछले सप्ताह जारी जीडीपी आंकड़ों के मुताबिक, देश की विकास दर 2019-20 में 11 साल के न्यूनतम स्तर 4.2 फीसदी पर आ गई। RBI ने हाल ही में कहा कि विकास दर 2020-21 में नकारात्मक रह सकती है। सर्वे में यह भी पता चला है कि एमएसएमई के केवल 3 फीसदी, कॉरपोरेट्स के 6 फीसदी, और 11 फीसदी स्व-नियोजित उत्तरदाताओं ने कहा कि वे स्थितियों से अप्रभावित रहे और अच्छा प्रदर्शन करते रहेंगे। लॉकडाउन के दौरान ये मुख्य रूप से आवश्यक सेवाओं की आपूत्ति में लगे हुए थे। समेकित आधार पर, सर्वे से पता चला कि उत्तरदाताओं में से 32 फीसदी का मानना ​​है कि उनका उद्यम रिकवरी से परे है, जबकि 29 फीसदी उत्तरदाताओं ने कहा कि उन्हें ठीक होने में छह महीने लगेंगे।

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