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‘J&K जा सकते हैं विदेशी राजदूत, पर मैं नाम भी लूंगा, तो धर लिया जाऊंगा’, बोले असदुद्दीन ओवैसी

पिछले साल पांच अगस्त सरकार द्वारा उठाये गये कदम के बाद पहली बार अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर समेत 15 देशों के राजनयिकों ने पिछले सप्ताह जम्मू कश्मीर की यात्रा की थी।

Author हैदराबाद | January 13, 2020 11:51 AM
एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी। (Express Photo by Renuka Puri)

विदेशी राजदूतों की हालिया जम्मू-कश्मीर यात्रा को लेकर नरेन्द्र मोदी सरकार की आलोचना करते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि अगर उन्होंने कश्मीर जाने का नाम भी लिया तो उन्हें हैदराबाद हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। कश्मीर से अनुच्छेद 370 समाप्त करने के केन्द्र के फैसले की आलोचना करते हुए हैदराबाद के सांसद ने कहा कि तभी से (पांच अगस्त से) कश्मीर में इंटरनेट सेवा नहीं है।

तेलंगाना में होने वाले शहरी निकाय चुनावों के मद्देनजर नारायणपेट जिले में शनिवार को एक रैली में ओवौसी ने कहा कि अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधानों को समाप्त करना केन्द्र की दूसरी सबसे बड़ी गलती है। उसकी पहली गलती जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख अब्दुल्ला की गिरफ्तारी थी। उन्होंने कहा, अनुच्छेद 370 हटे 5-6 महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी भी इंटरनेट सेवा बाधित है। प्रधानमंत्री (नरेन्द्र मोदी) ने बड़ी-बड़ी बातें की है, और कहा है कि वहां विकास होगा, जैसे कि पहले कश्मीर में कुछ नहीं हो रहा था।

ओवैसी ने कहा, ‘‘मोदी सरकार विदेशी राजदूतों को कश्मीर लेकर गई और कश्मीर की शांति उन्हें दिखाई। लेकिन, अगर मैं कह दूं कि मुझे कश्मीर जाना है कि सीआईएसएफ वाले मुझे हैदराबाद हवाई अड्डे पर ही गिरफ्तार कर लेंगे। मैंने भारतीय संविधान की शपथ ली है, लेकिन मैं वहां नहीं जा सकता, पर अमेरिका और अन्य देशों के विदेशी राजदूत वहां जा सकते हैं।’’

वहीं अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने अमेरिका समेत 15 देशों के राजनयिकों की हाल की जम्मू-कश्मीर यात्रा को शनिवार को ‘महत्वपूर्ण कदम’ करार दिया लेकिन नेताओं को लगातार नजरबंद रखे जाने और इंटरनेट पर पाबंदी पर चिंता जाहिर की। संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर को प्राप्त विशेष दर्जा को केंद्र सरकार ने पिछले साल पांच अगस्त को वापस ले लिया था और राज्य को दो केंद्र शाषित प्रदेशों में बांट दिया था। उसके बाद वहां पाबंदियां लगा दी गयी थीं।

पिछले साल पांच अगस्त सरकार द्वारा उठाये गये कदम के बाद पहली बार अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर समेत 15 देशों के राजनयिकों ने पिछले सप्ताह जम्मू कश्मीर की यात्रा की थी। यहां उन्होंने कई राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधियों, नागरिक संस्थाओं के सदस्यों और सेना के शीर्ष अधिकारियों के साथ मुलाकात की। हालांकि इस यात्रा को लेकर सरकार पर आरोप लग रहा है कि यह ‘निर्देशित यात्रा’ है लेकिन सरकार इससे इनकार कर रही है।

दक्षिण एवं मध्य एशिया मामलों की प्रधान उप सहायक विदेश मंत्री एलिस जी वेल्स ने शनिवार को उम्मीद जताई कि इस क्षेत्र में स्थिति सामान्य होगी। वेल्स इस सप्ताह दक्षिण एशिया की यात्रा पर आने वाली हैं। उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ वह भारत में अमेरिकी राजदूत तथा अन्य विदेशी राजनयिकों की जम्मू-कश्मीर यात्रा पर बारीकी से नजर रखी हुई हैं। यह एक महत्वपूर्ण कदम है। हम नेताओं, लोगों को हिरासत में लिए जाने और इंटरनेट पर प्रतिबंध से चिंतित हैं। हमें उम्मीद है कि स्थिति सामान्य होगी।’’ वेल्स रायसीना डायलॉग में हिस्सा लेने के लिए 15-18 जनवरी तक नई दिल्ली की यात्रा पर होंगी।

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