इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक छात्रा को स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की अनुमति देने की अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी। इस बीच एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने हाई कोर्ट के फैसले से असहमति जताई।
दारुस्सलाम स्थित पार्टी मुख्यालय में मंगलवार को आयोजित जलसा-ए-रहमतुल-लिल-आलमीन सम्मेलन में भाग लेते हुए एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “आज इलाहाबाद उच्च न्यायालय का एक फैसला आया है। एक लड़की स्कूल में हिजाब पहनकर आई थी और न्यायालय ने फैसला सुनाया कि हिजाब पहनना मना है। मैं हाई कोर्ट इस के फैसले से असहमत हूं, मैं इससे सहमत नहीं हूं।”
ओवैसी बोले- यह इस्लाम पर हमला
ओवैसी ने आगे कहा, “आज का फैसला भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 और 19 का उल्लंघन करता है। इस्लाम के लिए क्या आवश्यक है, यह तय करने वाले आप कौन होते हैं? यह इस्लाम पर हमला है।”
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा, “आंदोलन को मजबूत करें और प्रार्थना करें कि मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के उम्मीदवार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में सफल हों। हमने बिहार में पांच सीटें जीतीं। उत्तर प्रदेश में भी अल्लाह मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के सदस्यों को सफलता प्रदान करे। आरोप लगाने वालों, लगाइए।”
‘हर समुदाय का नेतृत्व तो भारत के मुसलमानों का क्यों नहीं’
असदुद्दीन ने आगे कहा, “अगर हर समुदाय का अपना नेतृत्व हो सकता है तो भारत के मुसलमानों का क्यों नहीं? भारत मजबूत होगा, भारत का लोकतंत्र और संविधान मजबूत होगा। यह कैसी स्थिति है जहां 18 करोड़ की आबादी वाले समुदाय के पास भारतीय संसद में केवल 24 सांसद हैं? उनके लिए बोलने वाला कोई नहीं है, वे वंदे मातरम के मुद्दे पर भी नहीं बोल सकते। क्या नरेंद्र मोदी महात्मा गांधी, नेताजी बोस, रवींद्रनाथ टैगोर से अधिक बौद्धिक, देशभक्त हैं?”
SIR के मुद्दे पर क्या बोले AIMIM प्रमुख
एआईएमआईएम अध्यक्ष ने कहा, “क्या आप जानते हैं कि तेलंगाना में एसआईआर प्रक्रिया चल रही है? चुनाव आयोग ने 17 अगस्त को एक ड्राफ्ट लिस्ट जारी की थी। हमारे पास अब 17 सितंबर तक का समय है। मैं आप सभी से विनम्र निवेदन करता हूं। जब आपको ईआरओ (मतदाता पंजीकरण अधिकारी) से नोटिस प्राप्त हो तो उसमें आपकी सुनवाई की तिथि और समय दिया होगा, आपको उस दिन अवश्य उपस्थित होना चाहिए। किसी कारणवश अगर आप उपस्थित नहीं हो सकते हैं तो आप किसी अन्य व्यक्ति को अपना प्रतिनिधि भेज सकते हैं।”
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, जिन लोगों ने अपने जनगणना फॉर्म जमा नहीं किए हैं और जिनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं हैं, चिंता न करें। बस फॉर्म 6 भरें और इसे बीएलओ (बूथ स्तरीय अधिकारी) को जमा करें। आपका नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल कर लिया जाएगा। जिन लोगों को जनगणना फॉर्म नहीं मिला है, उनके लिए भी फॉर्म 6 जमा करना अनिवार्य है। इस संबंध में, दारुस्सलाम स्थित मजलिस के द्वार हमेशा खुले रहते हैं।”
इलाहाबाद उच्च न्यायालय का हिजाब पर फैसला
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती देने की तैयारी में है, जिसमें एक छात्रा को स्कूल की निर्धारित वर्दी के साथ हिजाब या सिर पर स्कार्फ पहनने की अनुमति देने की अनुरोध वाली याचिका खारिज कर दी गई थी। याचिकाकर्ता प्रयागराज के अतरसुइया स्थित एक निजी स्कूल की छात्रा है और इसी विद्यालय में 11 वीं कक्षा में नामांकन ले रही है।
न्यायमूर्ति जे जे मुनीर एवं न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की दो सदस्यीय पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सकी कि सिर ढकना इस्लाम की ऐसी आवश्यक धार्मिक प्रथा है, जिसके पालन के बिना उसकी आस्था खतरे में पड़ जाएगी। पीठ ने कहा, “हमने याचिकाकर्ता से जुड़ी विभिन्न कक्षाओं की तस्वीरें देखी हैं और केवल उसे छोड़कर किसी भी छात्रा ने हिजाब नहीं पहना है। यहां तक कि जिस धार्मिक समुदाय से वह आती है, उस समुदाय की छात्राओं ने भी हिजाब नहीं पहना है।” खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
