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जब अयोध्या मस्जिद पर बोले ओवैसी- ‘वहां नमाज पढ़ना हराम, चुल्लू भर पानी में डूब मरो’, इकबाल अंसारी बोले- ध्यान न दें

स्वामी परमहंस ने कहा, "असदु्द्दीन ओवैसी देश का ऐसा गद्दार व्यक्ति है, जो भड़काऊ भाषण देकर हमेशा लड़ाने की बात करता रहता है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | January 28, 2021 3:49 PM
Asaduddin Owaisi, AIMIMअसदुद्दीन ओवैसी। (फाइल फोटो)

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो चुका है। वहीं, कुछ दूरी पर पांच एकड़ के इलाके में मस्जिद बनाने का काम भी शुरू हो चुका है। फिलहाल इसके लिए चंदा जुटाया जा रहा है। इस बीच ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने अयोध्या में बन रही मस्जिद में नमाज पढ़ने को हराम करार दे दिया है। उन्होंने इसके संबंध में एक रैली में भाषण दिया। हालांकि, अयोध्या मामले में पक्षकार रहे हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी और हिंदू धर्म के कार्यकर्ता स्वामी परमहंस ने ओवैसी पर जमकर निशाना साधा है।

क्या कहा ओवैसी ने?: ओवैसी ने कहा, “बाबरी मस्जिद की जगह पर पांच एकड़ जमीन लेकर मस्जिद बना रहे हैं। एक मुजाहिद-ए-आजादी अहमदुल्लाह का नाम रखना चाहते हैं। ऐ जालिमों चुल्लू भर पानी में डूब मरो। अगर वे अहमदुल्ला जिंदा होते तो कहते कि ये मस्जिदे जिरार है। मैंने हर मसलग के उलेमाओं से पूछा, मुफ्तियों से पूछा, जिम्मेदारों से पूछा, तो सबने कहा कि उस मस्जिद में नमाज नहीं पढ़ी जा सकती। जिस जगह को बाबरी मस्जिद की शहादत के बाद पांच एकड़ की जमीन पर मस्जिद बनाई जा रही है, उस पर नमाज पढ़ना हराम है।”

परमहंस बोले- ओवैसी जैसों को सलाखों के पीछे होना चाहिए: इस पर स्वामी परमहंस ने कहा, “असदु्द्दीन ओवैसी देश का ऐसा गद्दार व्यक्ति है, जो भड़काऊ भाषण देकर हमेशा लड़ाने की बात करता रहता है। अगर सर्वोच्च न्यायालय के जजमेंट पर जो भी वहां निर्माण हो रहा है, उसे लेकर अगर प्रश्न किया जा रहा है, तो यह न्यायपालिका पर प्रश्न है। यह असंवैधानिक है। अमर्यादित है, भड़काऊ भाषण है। असदुद्दीन ओवैसी जैसे लोगों को सलाखों के पीछे होना चाहिए। ये हमेशा देश को तोड़ने की बात करते हैं।”

अंसारी बोले- बंद हो मंदिर-मस्जिद की राजनीति: दूसरी तरफ अयोध्या मामले के पैरवीकार रहे हाशिम अंसारी के बेटे इकबाल अंसारी ने भी जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ओवैसी जी ने जो कुछ भी कहा है। उन्होंने फतवा जारी किया है कि लोग उसमें नमाज न पढ़ें और चंदा न दें। कौम को चाहिए कि उनकी बात का ध्यान बिल्कुल न दे। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने जो आदेश कर दिया है, जो पांच एकड़ जमीन दिया है। उस पर काम हो रहा है, उस पर काम होने दें, क्योंकि हिंदू-मुसलमानों का जो एक मुकदमा रहा, वो खत्म हो चुका है। अब हिंदू-मुसलमानों में एकता है। मंदिर और मस्जिद की राजनीति बिल्कुल नहीं होनी चाहिए। ओवैसी साहब को चाहिए कि ऐसा फतवा न दें जो हिंदुस्तान के मुसलमानों के लिए ठीक न हो।”

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