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‘हम बाबरी मस्जिद नहीं भूलेंगे’, पीएम ने किया राम मंदिर ट्रस्ट का ऐलान तो बोले असदुद्दीन ओवैसी

ओवैसी ने आगे कहा कि जिन्होंने मस्जिद को शहीद किया था, जिनके ऊपर क्रिमिनल केस चल रहा है, उनको नरेंद्र मोदी ने पद्म अवार्ड से नवाजा। उनको नरेंद्र मोदी ने राज्यपाल बनाया।

एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि हम बाबरी मस्जिद को कभी नहीं भूलाएंगे। (Express File Photo by Renuka Puri)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक बुधवार को संसद में श्रीराम मंदिर ट्रस्ट ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ बनाने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद सांसदों ने लोकसभा में ही जय श्री राम के नारे लगाए। पीएम मोदी की इस घोषणा के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि हम बाबरी मस्जिद को नहीं भूलेंगे। कांग्रेस ने भी इस घोषणा के समय को लेकर सवाल उठाया है।

न्यूज 24 से बात करते हुए ओवैसी ने कहा, “हमेशा चुनाव को देखकर ही ऐसा कदम उठाया जाता है। आप हर चीज को देख सकते हैं। चाहे वह प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री, हर फैसला चुनाव के समय को देखकर ही उठाते हैं। इसमें कोई शक करने की जरुरत नहीं है। प्रधानमंत्री ने दिल्ली चुनाव के लिए यह आखिरी पत्ता फेंका है। मुझे नहीं लगता है कि दिल्ली की जनता इस तरह की घोषणा से प्रभावित होगी, बल्कि बीजेपी चुनाव हार जाएगी।”

ओवैसी ने आगे कहा, “जिन्होंने मस्जिद को शहीद किया था, जिनके ऊपर क्रिमिनल केस चल रहा है, उनको नरेंद्र मोदी ने पद्म अवार्ड से नवाजा। उनको नरेंद्र मोदी ने राज्यपाल बनाया। उनको गंगा सफाई का मंत्रालय दिया गया। जिन्होंने 6 दिसंबर को मस्जिद शहीद की थी, आज वही उस जगह पर, उस मुकाम पर जहां पर हमने सजदे किए थे, वहां पर मंदिर बनाने जा रहे हैं। आप याद रखिए कि हम याद रखेंगे अपनी मस्जिद को, हम आने वाली नस्ल को भी याद दिलाएंगे। हम नहीं भूलेंगे।”

वहीं दूसरी ओर प्रमुख मुस्लिम संगठनों ने अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिये पांच एकड़ जमीन उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को देने को लेकर उत्तर प्रदेश मंत्रिमण्डल की रजामंदी को बोर्ड का नितांत निजी मामला बताया है। आल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के वरिष्ठ कार्यकारिणी सदस्य मौलाना यासीन उस्मानी ने मंत्रिमण्डल के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए पीटीआई से कहा कि बोर्ड, उससे जुड़ी प्रमुख तंजीमों और लगभग सभी मुसलमानों का फैसला है कि हम अयोध्या में मस्जिद के बदले कोई और जमीन नहीं लेंगे।

उन्होंने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड मुसलमानों का नुमाइंदा नहीं है। वह सरकार की संस्था है। बोर्ड अगर जमीन लेता है तो इसे मुसलमानों का फैसला नहीं माना जाना चाहिये। इस बीच, आल इण्डिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने सुन्नी वक्फ बोर्ड को वह जमीन देने का आदेश दिया है। जमीन लेने या न लेने के बारे में उसे ही निर्णय लेना है। उन्होंने कहा कि वक्फ बोर्ड जो भी फैसला ले उससे अमन कायम रहे। अब मजहब के नाम पर फसाद नहीं होना चाहिये। सियासी लोग फसाद कराते हैं। (भाषा इनपुट के साथ)

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