कोरोना के बाद बेड को दर-दर भटक रहे थे पुजारी, ओवैसी की मदद से मिला बिस्तर

हैदराबाद के प्रसिद्ध लाल दरवाजा मंदिर के मुख्य पुजारी कोरोना संक्रमित हो गए थे। इलाज के लिए वे अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई मदद नहीं मिली थी।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र हैदराबाद | April 23, 2021 1:10 PM
Asaduddin Owaisi, TMC , AIMIMएआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी (फोटोः INDIAN EXPRESS/Nirmal Harindran)

भारत में कोरोनावायरस की वजह से मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। संक्रमण की जद में बड़े-बूढ़ों से लेकर युवा तक आ रहे हैं। देश में मौजूदा समय में 24 लाख से ज्यादा एक्टिव केस हैं, जिसके चलते ज्यादातर राज्यों में ऑक्सीजन और जीवनरक्षक दवाओं की कमी तक पैदा हो गई है। इसके चलते मरीजों को इलाज के लिए बेड तक नहीं मिल पा रहे। कुछ ऐसा ही हाल तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का भी है, जहां सभी अस्पतालों के बेड्स पहले से ही भरे हैं। इन सबके बीच भी जब यहां एक मंदिर के पुजारी की तबियत कोरोना से बहुत बिगड़ गई और उन्हें मदद नहीं मिली, तब AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी मदद के लिए आगे आए।

बताया गया है कि हैदराबाद के प्रसिद्ध लाल दरवाजा मंदिर के मुख्य पुजारी कोरोना संक्रमित हो गए थे। इलाज के लिए वे अस्पतालों के चक्कर काटते रहे, लेकिन कोई बेड खाली नहीं मिल पाया। ऐसे में पुजारी की हालत लगातार गंभीर हो रही थी। जब इस बात की जानकारी शहर के सांसद असदुद्दीन ओवैसी को मिली तो उन्होंने अपनी पार्टी की तरफ से संचालित असरा हॉस्पिटल में पुजारी को भर्ती करवाया।

हैदराबाद में बढ़ी है एक्टिव मरीजों की संख्या: बता दें कि तेलंगाना में इस वक्त कोरोना से हालात काफी खराब हैं। यहां मौजूदा समय में कोरोना के 3.73 लाख केस हैं। इनमें 49 हजार 781 सक्रिय मरीज हैं, जबकि कुल 1899 लोगों की जान जा चुकी है। हैदराबाद में ही पिछले एक दिन में कोरोना के एक हजार से ज्यादा मामले मिले हैं। इसके चलते शहर में भी बेड्स की कमी पैदा होने लगी है।

लॉकडाउन का विरोध कर चुके हैं ओवैसी: इससे पहले AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी कोरोना के बढ़ते केसों के बावजूद लॉकडाउन लगाने का विरोध कर चुके हैं। उन्होंने कुछ दिनों पहले ही अपने ट्विटर अकाउंट से कहा था कि एक बार फिर पूरे भारत में लॉकडाउन लागू करते हैं, तो यह एक गलती होगी। ओवैसी ने पिछले साल का उदाहरण देते हुए कहा था कि मार्च 2020 में देशव्यापी लॉकडाउन की घोषणा के चलते गरीबों को अपनी नौकरी गंवानी पड़ी और कई की मौत हो गई थी। इसलिए, मुझे आशा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च 2020 में जो गलती की थी वह इस साल नहीं दोहराई जाएगी. कोरोना से निपटने के लिए लॉकडाउन सही तरीका नहीं है।

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