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AIMIM के आसिम वकार का सवाल- बोलने की आज़ादी केवल इस्लाम और पैग़म्बर मोहम्मद के ख़िलाफ़ ही क्यों?

मुनव्वर राणा के बाद अब AIMIM के आसिम वकार भी फ्रांस के हत्यारों के साथ दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई प्यारे नबी की शान में गुस्ताखी करेगा तो यह बर्दाश्त नहीं होगा। उन्होंने कहा, बोलने की सारी आज़ादी आखिर इस्लाम और पैगंबर के खिलाफ ही क्यों है?

France murder, asaduddin owaisi, munawwar ranaफ्रांस के आतंकियों के साथ AIMIM के आसिम वक़ार। (फाइल फोटो)

फ्रांस में पैगंबर मोहम्मद के विवादित कार्टून के बाद सिलसिलेवार ढंग से कई हत्याएं हो चुकी हैं। पहले एक शिक्षक को मौत के घाट उतारा गया और इसके बाद महिला के साथ दो अन्य लोगों की भी गर्दन रेतकर हत्या कर दी गई। मशहूर शायर मुनव्वर राणा ने इन हत्याओं को सही ठहरा दिया है। अब AIMIM के आसिम वकार भी इन हत्यारों के पक्ष में उतर आए हैं। उन्होंने एक टीवी शो में कहा, अगर पैगंबर मोहम्मद की कोई भी बेज्जती करेगा तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘आखिर बोलने की आज़ादी केवल इस्लाम और पैग़म्बर मोहम्मद के ख़िलाफ़ ही क्यों है?’

वक़ार ने कहा, ‘मैं आपको एक लाइन बताना चाहता हूं। एक घटिया दुश्मन होता है उसकी पहली पहचान होती है कि जब वह आपका ज़मीं पर मुकाबला नहीं कर पाता है तो मज़हब पर हमला करता है। मैं किसी भी तरह से हिंसा का समर्थन नहीं करता हूं लेकिन मैं यह भी बर्दाश्त नहीं कर पाऊंगा कि हमारे प्यारे नबी पैगंबर मोहम्मद की शान में कोई गुस्ताखी करे। मैं कभी किसी मजहब को बुरा करता हूं न किसी मजहब की बेइज्जती करता हूं।’

उन्होंने कहा, ‘यह कोई फ्रांस ने पहली बार नहीं किया है। फ्रांस पहले भी ऐसा ही कर चुका है। 1895 से 1901 के बीच में कई बार कोशिश हुई। फ्रांस में थिएटर बनाया गया था जिसमें रसूलअल्लाह की बेज्जती करने की कोशिश की गई थी। पूरी दुनिया के मुसलमानों ने इसका विरोध किया था। अगर आपको ज़बान की आज़ादी चाहिए तो इस्लाम और मोहम्मद साहब के खिलाफ क्यों? ईसा के खिलाफ क्यों नहीं, गीता के खिलाफ क्यों नहीं?’


वक़ार ने कहा, ‘हो सकता है हिंदुस्तान के मुसलमानों के पैगंबर मोहम्मद साहब हों और फ्रांस वालों के न हों।’ इसपर सामाजिक कार्यकर्ता सुबुही खान ने कहा, राणा जैसे लोग सड़कछाप शायर हैं। उन्होंने अपनी जिहादी मानसिकता दिखा दी है। यही इस्लाम का दुर्भाग्य है कि इस्लाम के नाम पर राजनीति की जाती है। यही इस्लाम के इतिहास में भी होता आया है। आतंकी नवाजे रसूल के न हुए तो क्या भारत के होंगे और क्या इस्लाम के होंगे।

इन घटनाओं पर शायर मुनव्वर राणा ने कहा था, अगर कोई हमारे मां-बाप का कार्टून बना दे तो हम उसे मार देंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि जब एमएफ हुसैन ने हिंद देवी-देवताओं की विवादित पेंटिंग बनाई तो उसे 90 की उम्र में देश छोड़कर भागना पड़ा था। उन्होंने कहा कि जब हिंदुस्तान में ऑनर किलिंग को जायज ठहरा दिया जाता है तो फ्रांस का वाकया नाजायज क्यों है? फ्रांस में हत्यारों के समर्थन में भोपाल में भी भारी भीड़ इकट्ठी हुई थी और मुस्लिम नेताओं ने पीएम मोदी से फ्रांस की निंदा करने की मांग की थी।

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