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एम्स की ओपीडी अगले आदेश तक बंद, सामान्य मरीजों की छुट्टी

एम्स के सामने स्थित सफदरजंग अस्पताल में कोरोना के संदिग्ध व पुष्ट मामलों को मिलाकर कुल 20 मरीज अभी भी भर्ती हैं। अस्पताल के वरिष्ठ चिकत्सक डॉ राकेश वर्मा ने बताया कि यहां ओपीडी तो खुली रही और आगे भी खुली ही रहेगी। लेकिन परिवहन के साधन कम होने से कोरोना के डर से करीब एक तिहाई से भी कम मरीज आए।

अफवाहों के चलते कुछ मकान मालिकों ने इन डॉक्टरों को घर से निकल जाने का फरमान सुनाया है। (file)

कोरोना विषाणु के प्रसार को देखते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में सभी वाह्यरोगी विभाग (ओपीडी) अगले आदेश तक के लिए बंद कर दी गई है। इसके साथ ही यहां भर्ती दूसरे मरीजों में से जो मरीज घर पर रखकर ठीक किए जा सकते है उन्हें भी अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। इमरजंसी वार्ड खुला हुआ है। इसी तरह सफदरजंग सहित दिल्ली सरकार के तमाम अस्पतालों की ओपीडी तो खुली रही लेकिन मरीज इक्का-दुक्का ही पहुंच पाए।

एम्स की ओपीडी सोमवार से बंद कर दी गई है। हालांकि सभी डॉक्टर व स्पास्थ्यकर्मी सतर्क हैं। यहां एम्स ने एक प्रोटोकॉल तय किया है। जिसके तहत आपातस्थिति में मरीजों को कैसे देखना है इसके लिए योजना बनाई गई है। एम्स के सामने फुटपाथ पर व डीटीसी के बस स्टैंड पर उन मरीजों व उनके तीमारदारों का का डेरा अभी भी जमा हुआ है जो किसी न किसी बीमारी के इलाज के लिए दूसरे राज्यों से एम्स आए हुए हैं। रैन बसेरों में मरीजों व तीमारदारों का डेरा है।

एम्स के सामने स्थित सफदरजंग अस्पताल में कोरोना के संदिग्ध व पुष्ट मामलों को मिलाकर कुल 20 मरीज अभी भी भर्ती हैं। अस्पताल के वरिष्ठ चिकत्सक डॉ राकेश वर्मा ने बताया कि यहां ओपीडी तो खुली रही और आगे भी खुली ही रहेगी। लेकिन परिवहन के साधन कम होने से कोरोना के डर से करीब एक तिहाई से भी कम मरीज आए। उन्होंने बताया कि उनकी हृदय रोग की ओपीडी में जहां डेढ़ से दो सौ मरीज आते थे वहीं आज महज 35 -40 मरीज ही आ सके। आरएमएल की ओपीडी में भी करीब एक चौथाई मरीज पहुंचे।

नेत्र चिकित्सालय बंद, कर्मी शिफ्ट
दिल्ली सरकार का गुरुनानक नेत्र चिकित्सालय बंद कर दिया गया है और इसके कर्मचारियों को लोकनायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल में लगा दिया गया है। जहां कोरोना के करीब 26 मरीज भर्ती हैं। हालांकि राहत कि बात यह है कि यहां सोमवार को कोई नया मरीज नहीं आया। फिर भी अस्पताल की छठवीं मिंजल से सभी मरीजों को हटा लिया गया है। गंभीर मरीजों को अस्पताल के दूसरी जगहों पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

निधन में नहीं जा सकें
ट्रेनों व बसों पर लगी रोक से कुछ लोग अपनों के निधन पर घर नहीं पहुंच पाए। छतरपुर निवासी अर्चना मिश्र के पिता की सोमवार को सोनभद्र के राबर्ट्सगंज में दिल का दौरा पड़ने की वजह से मौत हो गई है। बिलखते हुए अर्चना ने बताया कि वह अपने पिता का अंतिम बार मुंह देखने भी नहीं जा पा रही है। सीमाएं सील होने से कोई गाड़ी नही जा रही है। मयूर विहार फेज तीन निवासी राकेश शर्मा ने भी अपने एक रिश्तेदार की अंत्येष्टि में नहीं जा पाए।

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