Vacancies in AIIMS Hospitals: देश के प्रमुख एम्स अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की भारी कमी का गंभीर मामला सामने आया है। केंद्र सरकार ने संसद में जानकारी दी है कि देशभर के 20 एम्स में डॉक्टरों के लगभग एक-तिहाई पद खाली पड़े हैं। लोकसभा सांसद मुरारी लाल मीणा द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह चिंताजनक आंकड़े पेश किए।
आंकड़ों के मुताबिक देश भर के 20 एम्स में डॉक्टरों यानी फैकल्टी के कुल 6,304 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 2,181 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह गैर-संकाय यानी नॉन-फैकल्टी और अन्य स्टाफ के 59,225 पदों में से 15,159 पद रिक्त हैं। इसका सीधा मतलब यह है कि कर्मचारियों के वर्ग में 25 प्रतिशत से भी ज्यादा सीटें खाली पड़ी हैं।
खाली पदों के संबंध में दी विस्तृत जानकारी
केंद्रीय मंत्री द्वारा दिए गए जवाब में ये स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान नई दिल्ली एम्स की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। दिल्ली एम्स में फैकल्टी के कुल 1,313 पदों में से 436 पद खाली हैं और केवल 877 पदों पर ही तैनाती हो सकी है। वहीं नॉन-फैकल्टी श्रेणी में कुल 13,913 पदों के मुकाबले 2,461 पद खाली पड़े हैं, जबकि 11,452 पदों पर कर्मचारी काम कर रहे हैं।
पिछले कुछ सालों में सुधार के संकेत
हालांकि पिछले कुछ सालों की तुलना में कुल स्थिति में थोड़ा सुधार जरूर दर्ज किया गया है। फैकल्टी पदों की रिक्तियों की दर साल 2023-24 में 39.22 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 34.6 प्रतिशत पर आ गई है। इसी तरह नॉन-फैकल्टी पदों के खाली रहने की दर भी 39.19 प्रतिशत से कम होकर 25.6 प्रतिशत रह गई है।
प्रक्रिया में लगता है समय
सरकार ने संसद में स्पष्ट किया कि नए पदों का सृजन करना और उन पर भर्ती प्रक्रिया पूरा करना एक निरंतर चलने वाली व्यवस्था है। योग्य और अनुभवी डॉक्टरों की उपलब्धता, आरक्षण के नियम और संस्थान के भौगोलिक स्थान जैसे कई महत्वपूर्ण कारणों की वजह से इन भर्तियों में समय लगता है।
विजिटिंग फैकल्टी पर भी फोकस
इन खाली पदों को जल्द से जल्द भरने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठा रही है। इसके तहत चयन प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रत्येक संस्थान में स्थायी समितियों का गठन किया गया है। इसके अलावा 70 वर्ष की आयु तक के अनुभवी सेवानिवृत्त डॉक्टरों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जा रहा है।
सरकार ने बताया है कि देश-विदेश के शीर्ष प्रोफेसरों को पढ़ाने के लिए विजिटिंग फैकल्टी के रूप में जोड़ा जा रहा है और नर्सिंग व अन्य पदों के लिए नॉरसेट जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं।
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दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के मामले में जवाबदेही तय करने को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मांग उठाकर कॉकरोच जनता पार्टी ने छात्रों का विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था। यह विरोध प्रदर्शन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की वजह से सफल भी रहा था। इसके बाद अब सीजेपी अपना दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रही है, जिसके संकेत मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने दिए हैं। पढ़िए पूरी खबर…
