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2 साल में दोगुनी होगी Aiims की क्षमता, राज्यों में स्थित aiims को भी मिलेगी दिल्ली जैसी सुविधाएं

सरकार ने बताया है कि दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की क्षमता दो साल में दोगुनी की जाएगी और राज्यों में स्थित एम्स को भी दिल्ली जैसा बनाए जाने का प्रयास किया जाएगा।

Author नई दिल्ली | March 16, 2016 3:13 AM
(File Photo)

सरकार ने बताया है कि दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की क्षमता दो साल में दोगुनी की जाएगी और राज्यों में स्थित एम्स को भी दिल्ली जैसा बनाए जाने का प्रयास किया जाएगा। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया कि मरीजों की परेशानियों को देखते हुए सरकार चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के प्रयास कर रही है।

इस कड़ी में दिल्ली स्थित एम्स की क्षमता दो साल में दोगुनी की जाएगी। उन्होंने कहा कि एम्स में बिस्तरों की संख्या भी दोगुनी की जाएगी। राज्यों में स्थित एम्स की गुणवत्ता भी दिल्ली जैसी करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार चिकित्सा क्षेत्र में सुधार के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी पर विचार कर रही है। मरीजों की संख्या के बोझ के मामले में सफदरजंग और राम मनोहर लोहिया जैसे अस्पतालों की हालत भी एम्स जैसी ही है और सरकार बोझ व गुणवत्ता को संतुलित करने के प्रयास कर रही है।

उन्होंने कहा कि निजी अस्पतालों की मनमानी पर नियंत्रण रखने के लिए राज्यों को केंद्र के क्लिनिकल प्रतिष्ठान कानून को अनुमोदित करना होगा। कुछ राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों ने यह काम कर दिया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार लोगों की सुविधा के लिए स्वास्थ्य बीमा और स्वास्थ्य आश्वासन पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि 3000 जन औषधि केंद्र बनाने का प्रस्ताव है जहां जेनरिक दवाएं मिलेंगी।
नड्डा ने जनसंख्या को स्थिर करने से संबंधित सवाल के जवाब में कहा कि वर्तमान में सरकार के पास दो बच्चों की नीति से संबंधित मानदंड का कोई प्रावधान नहीं है क्योंकि भारत 1994 के आइसीपीडी घोषणा पत्र का हस्ताक्षरकर्ता है जोकि लक्ष्य मुक्त दृष्टिकोण व बच्चों की संख्या और उनमें अंतर रखने के संबंध में निर्णय लेने व जिम्मेदारी लेने के दंपति के प्रजनन अधिकारों का सम्मान करने की वकालत करता है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या स्थिरीकरण के मामले में सरकार के प्रयासों के परिणामस्वरूप दशकीय वृद्धि दर 1991-2001 की अवधि 21.54 फीसद से घटकर 2001-2011 के दौरान 17.64 फीसद हो गई है।

मंत्री ने बताया कि कुल प्रजनन दर 2008 में 2.6 से कम होकर 2013 में 2.3 तक हो गई है। दो राज्यों की प्रजनन दर 3.0 से अधिक है। इनमें उत्तर प्रदेश में प्रजनन दर 3.1 और बिहार में प्रजनन दर 3.4 है। उन्होंने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए पीएनडीटी कानून के तहत प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत कुल 1,573 अल्ट्रासाउंड मशीन जब्त की गई हैं और 2152 मामले चल रहे हैं। लगभग 306 दोषसिद्धि हुई है और 100 डॉक्टरों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं। मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो ने 2014 से कन्या भ्रूण हत्या के अपराध को एक अलग श्रेणी में श्रेणीबद्ध किया है।

इसके अनुसार 2014 में देशभर में कन्या भ्रूण हत्या के कुल 50 मामले दर्ज किए गए हैं। नड्डा ने कहा कि ऐसे मामलों में डॉक्टर और परिवार दोनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि लैंगिक अनुपात में सुधार हो रहा है, लेकिन अभी काफी कुछ किए जाने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ पहल के तहत भी लोगों को इस बारे में जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि देश में 1990 के मुकाबले टीबी (तपेदिक) के मामलों की दर में कमी आई है, जबकि डायबिटीज रोगियों की संख्या पिछले तीन साल में बढ़ी है।

मंत्री ने कहा कि टीबी के मामले में 1990 में इसकी व्यापकता और प्रसार दर प्रति लाख 216 और 465 थी जो विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2015 में बताए गए 2014 के आंकड़ों के अनुसार घटकर 167 और 195 प्रति लाख हो गई है।
उन्होंने कहा कि हालांकि इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन के अनुसार भारत में मधुमेह से पीड़ित लोगों (20 से 79 वर्ष) की संख्या का 2013, 2014 और 2015 का आंकड़ा क्रमश: 6.5 करोड़, 6.68 करोड़ और 6.91 करोड़ है।

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