तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने आसानी से बहुमत साबित कर दिया। टीवीके को कुल 144 विधायकों का साथ मिला, जो बहुमत के आंकड़े (118) से कहीं अधिक हैं। टीवीके के विश्वासमत टेस्ट के दौरान ही एआईएडीएमके की टूट भी सामने आ गई।

फ्लोर टेस्ट के दौरान ही एआईडीएमके दो धड़ों में बंट गई एक गुट एडाप्पी के. पलानीस्वामी (ईपीएस) के साथ है और दूसरा एसपी वेलुमणि के साथ है। एआईडीएमके के 25 विधायकों ने जोसेफ विजय की पार्टी टीवीके को अपना समर्थन दिया।

ईपीएस का बागी विधायकों पर एक्शन

जोसेफ विजय के पक्ष में वोट करने के बाद ईपीएस ने बागी विधायकों पर एक्शन लेना शुरू कर दिया है। ईपीएस ने सीवी शनमुगम और पार्टी के अन्य पदाधिकारियों को पदों से हटा दिया है। साथ ही टीवीके के पक्ष में वोट देने वाले सभी 25 विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने के लिए स्पीकर के पास याचिका भी दाखिल कर दी है। 

एआईएडीएमके ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में कुल 47 सीटों पर जीत हासिल की थी। 25 विधायकों वाले गुट के नेता सीवी शनमुगम के साथ हैं, जबकि 22 विधायकों का नेतृत्व ईपीएस कर रहे हैं।

क्यों हुई यह टूट?

चार मई को रिजल्ट आने के बाद खबर आने लगी कि एआईएडीएमके के महासचिव ईपीएस डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे लेकर पार्टी नेता एस.पी. वेलुमणि और सी.वी. शनमुगम ने इसका विरोध किया और जोर देकर कहा कि डीएमके को समर्थन देना सही नहीं, लोगों ने टीवीके का साथ दिया है, ऐसे में हम टीवीके को समर्थन देंगे।

तब तक टीवीके को कांग्रेस, सीपीआई, सीपीआई (एम), वीसीके और मुस्लिम लीग के साथ बात शुरू कर दी और उनका समर्थन प्राप्त कर लिया। 10 मई को सुबह जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। फिर 11 मई को सभी विधायकों ने विधानसभा में शपथ ग्रहण किया और उसी दिन एआईएडीएमके के 17 विधायकों ने विधानसभा के अंतरिम अध्यक्ष करुपैया को पत्र दिया कि ईपीएस को पार्टी का नेता माना जाए और 30 विधायकों ने एस.पी. वेलुमणि को नेता बनाने के समर्थन में अपना पत्र सौंपा।

12 मई को एस.पी वेलुमणि और सीवी शनमुगम ने चेन्नई में अपने समर्थकों के साथ बैठक की और फिर घोषणा की गई कि एस.पी वेलुमणि को विधानसमिति का अध्यक्ष और सी. विजयभास्कर को सचेतक नियुक्त किया। दूसरी ओर ईपीएस को पार्टी का विधानसमिति अध्यक्ष और एग्री कृष्णमूर्ति को सचेतक चुना गया।

इससे साफ हो चला पार्टी में टूट हो गई है, लेकिन उम्मीद थी कि टीवीके के फ्लोर टेस्ट में पार्टी एक साथ खड़ी दिख सकती है।

अब आगे क्या?

एआईएडीएमके में कुल 47 विधायक हैं, दलविरोधी कानून से बचने के लिए एक गुट को कम से कम 32 विधायकों में दो-तिहाई, दलबदल करने वाले विधायकों के साथ जुड़ना आवश्यक है। इससे न केवल कार्रवाई से बचा जा सकेगा बल्कि पार्टी पर अपने अधिकार का दावा करने का अवसर भी मिलेगा।

इससे पहले जब पूर्व सीएम ओ. पन्नीरसेल्वम के गुट ने एआईएडीएमके से अलग होने के बाद पार्टी पर अधिकार का दावा किया था तो सुप्रीम कोर्ट ने सामान्य समिति के प्रस्ताव के आधार पर ईपीएस के गुट के पक्ष में अपना फैसला दिया था।

इस फैसले के तहत अगर एआईएडीएमके की आम समिति की बैठक बुलाई जाती है और पार्टी महासचिव ईपीएस को हटा दिया जाता है तो पार्टी किसी नए व्यक्ति के अधिकार में आ जाएगा।

ऐसे ही मामला महाराष्ट्र का भी सामने आया था जब 2023 में शिवसेना का विभाजन हुआ तो पार्टी के दो गुटों- एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे ने पार्टी पर अपने-अपने अधिकार का दावा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख किया था।

सुप्रीम कोर्ट के पांच सदस्यीय बेंच जिसमें पूर्व न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे, ने विधानसभा पार्टी नेता और व्हिप का जिक्र किया था।

बेंच ने कहा था, राज्य विधानसभा में व्हिप और विधानसभा पार्टी नेता की नियुक्ति केवल एक विशेष पार्टी द्वारा ही की जा सकती है। उस पार्टी का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायकों का समूह उनकी नियुक्ति नहीं कर सकता और विधानसभा नेता केवल पार्टी के नामांकन को ही मंजूरी दे सकता है।

इस फैसले के आधार पर अध्यक्ष केवल विधानसभा समिति के अध्यक्ष और पार्टी महासचिव ईपीएस द्वारा नियुक्ति व्हिप को ही मंजूरी दे सकते हैं।

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तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पेश किया गया विश्वासमत प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। टीवीके चीफ ने बड़े आराम से फ्लोर टेस्ट पास कर लिया। उन्हें कुल 144 विधायकों ने समर्थन दिया, जो 234 सदस्यीय विधानसभा के बहुमत के आंकड़े 118 से अधिक है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें