तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा पेश किया गया विश्वासमत प्रस्ताव बहुमत से पारित हो गया। टीवीके चीफ ने बड़े आराम से फ्लोर टेस्ट पास कर लिया। उन्हें कुल 144 विधायकों ने समर्थन दिया, जो 234 सदस्यीय विधानसभा के बहुमत के आंकड़े 118 से अधिक है।
सुपरस्टार विजय ने तो विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया। इसके साथ ही एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) की टूट सतह पर आ गई। फ्लोर टेस्ट ने AIADMK की दरारों को उजागर कर दिया। ईपीएस ने बगावत की सुगबुगाहट के बीच यह दावा किया था कि पार्टी के सारे विधायक टीवीके के विरोध में वोटिंग करेंगे।
देखा जाए तो विजय का फ्लोर टेस्ट एक तरह से AIADMK की एकता की भी परीक्षा थी, जिसमें पार्टी असफल रही। चूंकि पार्टी के 47 विधायकों में से 25 ने ध्वनिमत से विजय का समर्थन किया। हालिया विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी 47 सीटों पर जीत हासिल करने के साथ ही राज्य में तीसरी सबसे पार्टी के रूप में उभरी थी। जबकि सुपरस्टार से राजनेता बने विजय की टीवीके को कुल 108 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, एमके स्टालिन की नेतृत्व वाली DMK 59 विधायकों के साथ राज्य की दूसरी सबसे पार्टी है।
टूट के खतरे से जूझ रही पार्टी
अब देखा जाए तो AIADMK के 47 में से 25 विधायकों के समर्थन से शनमुगम के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के भीतर बहुमत वाले गुट के रूप में उभर सकता है। पार्टी के 25 विधायकों के इस खेमे ने मंगलवार को पार्टी के वरिष्ठ नेता और थोंडामुथुर के विधायक एस.पी. वेलुमणि को अपना नेता घोषित करते हुए उनका समर्थन किया था।
चार मई को चुनाव परिणाम आने के बाद 10 मई को सी.जे. विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं, विश्वासमत भी हासिल कर लिया। बुधवार को ईपीएस द्वारा टीवीके नेतृत्व वाले गठबंधन को दी गई चुनौती को सरकार के खिलाफ कदम से ज्यादा पार्टी पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
विधानसभा में बोलते हुए ईपीएस ने यह भी आरोप लगाया कि विजय के पक्ष में वोट करने के लिए AIADMK विधायकों को पैसे दिए गए थे। हालांकि, EPS का यह दांव काफी जोखिम भरा माना जा रहा है। AIADMK इस समय बड़ी टूट के खतरे का सामना कर रही है। पार्टी के 47 विधायकों में से 25 विधायक, वरिष्ठ नेता एसपी वेलुमणी के नेतृत्व में कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री विजय को समर्थन दे चुके हैं।
क्यों AIADMK में बढ़ा अंदरूनी विवाद?
AIADMK के भीतर जारी टकराव की जड़ पार्टी की उस मूल विचारधारा से जुड़ी है, जिसके तहत इसकी स्थापना दिवंगत नेता एम. जी. रामचंद्रन (एमजीआर) ने 1972 में डीएमके के विरोध में की थी। वरिष्ठ नेता डिंडीगुल सी. श्रीनिवासन शनमुगम ने आरोप लगाया कि AIADMK महासचिव ईपीएस पार्टी की पुरानी प्रतिद्वंद्वी डीएमके के साथ हाथ मिलाने की कोशिश कर रहे थे।
उन्होंने कहा, “AIADMK की स्थापना एमजीआर ने डीएमके का विरोध करने के लिए की थी और पिछले पांच दशकों से हम राजनीतिक रूप से उनसे लड़ते रहे हैं। लेकिन EPS ने डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने और खुद को मुख्यमंत्री बनाए जाने की कोशिश की। किसी भी विधायक ने इस विचार का समर्थन नहीं किया और हम हैरान रह गए।”
हालांकि AIADMK ने मंगलवार को बागी गुट पर पलटवार किया। पार्टी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कहा कि यह समूह “झूठ का पुलिंदा” फैला रहा है। पार्टी ने आरोप लगाया कि बागी नेता उन 1.34 करोड़ मतदाताओं के साथ विश्वासघात कर रहे हैं जिन्होंने EPS के नेतृत्व वाले गठबंधन को वोट दिया था।
AIADMK ने यह भी कहा कि पार्टी केवल कुछ विधायकों की नहीं बल्कि कार्यकर्ताओं का आंदोलन है। बयान में कहा गया, “जब-जब पार्टी संकट में आई, आखिरकार कार्यकर्ताओं का फैसला ही सर्वोपरि रहा।”
गौरतलब है कि AIADMK लंबे समय तक डीएमके के मुख्य राजनीतिक विकल्प के रूप में खुद को पेश करती रही। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता के निधन के बाद पार्टी लगातार चुनावी हार और नेतृत्व संकट से जूझ रही है, जिससे अंदरूनी खेमेबाजी बढ़ गई। इसी राजनीतिक खालीपन के बीच अभिनेता से नेता बने Vijay की पार्टी TVK ने तीसरी ताकत के रूप में उभरकर एंटी-इनकंबेंसी और मतदाताओं की नाराजगी का फायदा उठाया।
बुधवार को हुए फ्लोर टेस्ट ने विजय की अल्पमत सरकार को मजबूती दी है। वहीं, इस घटनाक्रम ने AIADMK में औपचारिक विभाजन की संभावनाओं को भी तेज कर दिया है।
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय ने ज्योतिषी रिकी रादन पंडित वेट्रिवेल को OSD पद से हटा दिया है। विजय ने यह फैसला बुधवार को तमिलनाडु विधानसभा में फ्लोर टेस्ट पास करने के तुरंत बाद लिया। पूरी खबर पढ़ें…
