एआईएडीएमके पार्टी में दो धड़े हो गए हैं, एक ईपीसी गुट और दूसरा सीवी शनमुगम गुट। सीवी शनमुगम गुट ने बुधवार को फ्लोर टेस्ट के दौरान टीवीके को अपना समर्थन दे दिया। इससे नाराज होकर पार्टी के महासचिव एडप्पादी पलानीस्वामी ने कई नेताओं को पार्टी पद के मुक्त कर दिया और सभी 25 विधायकों पर एक्शन लेते हुए दल-बदल की कार्रवाई के लिए विधानसभा स्पीकर के पास याचिका दाखिल कर दी।

अब इस पर बागी विधायक गुट के नेता सीवी शनमुगम ने जवाब देते हुए चेन्नई में कहा, “हमने कुछ गलत किया होता तो पार्टी के महासचिव को हमसे बात करनी चाहिए। उन्होंने अपने कार्यकाल में बस एक ही काम किया है पार्टी और पार्टी के पदों से लोगों को निकालना।”

ईपीएस ने कई नेताओं को पार्टी पद से हटाया

इससे पहले चेन्नई में एआईएडीएमके के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि 25 बागी सदस्यों ने पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया है, इसलिए वे सभी अपने विधायक पद गंवाने के हकदार हैं। पार्टी महासचिव ईपीएस ने सीवी शनमुगम, एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर समेत कई नेताओं को पार्टी के पद से हटा दिया है।

हमसे बात करनी चाहिए थी- सीवी शनमुगम

AIADMK नेता सी.वी. शनमुगम ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, “अगर हमने कुछ भी गलत किया होता, तो पार्टी के महासचिव के तौर पर उन्हें हमसे बात करनी चाहिए थी और पार्टी को और आगे बढ़ाना चाहिए था। लेकिन एडप्पादी पलानीस्वामी ने अपने चार साल के कार्यकाल में केवल एक ही काम किया- पार्टी और पार्टी के पदों से लोगों को निकालना। जो कोई भी उन पर सवाल उठाता है, उसे पद से और यहाँ तक कि पार्टी से भी निकाल दिया जाता है।”

’26 पदाधिकारियों को हटाया’

आगे उन्होंने कहा, “आज रात 8 बजे तक, हमारी पार्टी के 26 पदाधिकारियों को उनके पार्टी पदों से हटा दिया गया। उन्हें यह अधिकार किसने दिया? उनके पास ऐसा कोई अधिकार नहीं है, और उनके द्वारा जारी किया गया बयान स्वीकार नहीं किया जाएगा। एडप्पादी पलानीस्वामी ने AIADMK की मूल नीतियों को कमज़ोर कर दिया है।”

हमें हटाने का कोई अधिकार नहीं- शनमुगम

सीवी शनमुगम ने आगे कहा, “उन्हें हमें पार्टी के पदों से हटाने का कोई अधिकार नहीं है। यह निष्कासन हम नहीं मानते हैं। उनके पास हमें निकालने का कोई अधिकार नहीं है। AIADMK की बैठक में शामिल होने से हमें कोई नहीं रोक सकता।”

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तमिलनाडु विधानसभा में बुधवार को मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने आसानी से बहुमत साबित कर दिया। टीवीके को कुल 144 विधायकों का साथ मिला, जो बहुमत के आंकड़े (118) से कहीं अधिक हैं। टीवीके के विश्वासमत टेस्ट के दौरान ही एआईएडीएमके की टूट भी सामने आ गई। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें