खेती के लिए सटीक मौसम पूर्वानुमान, अत्याधुनिक मशीनों के साथ AI की मदद से कृषि क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। बिजाई, कटाई, सिंचाई, उर्वरकों और कीटनाशकों का छिड़काव, अब कृषि क्षेत्र में ज्यादातर कार्यों को पूरा करने के लिए कृत्रिम मेधा एक बेहतरीन विकल्प के तौर पर उभरा है।

अचानक मौसम में होने वाले बदलाव, सिंचाई, बिजाइ, बुवाइ, कीट नियंत्रण या उर्वरकों के छिड़काव समेत खेती के लिए जरूरी तमाम विकल्पों में सहूलियतें बढ़ने से कम समय में उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी। हालांकि, विशेषज्ञों की चिंता है कि किसानों को इसका पूरा फायदा मिले, इसके लिए उन्हें जागरूक और प्रशिक्षित करना बेहद जरूरी है। सीमांत किसानों तक एआइ का फायदा पहुंचने में अभी वक्त लग सकता है।

AI की मदद से मौसम के पूर्वानुमान का किसानों को वास्तविक स्थिति का पता लगने से नुकसान की आशंका काफी कम हो जाती है। हालांकि, कृत्रिम मेधा के इस्तेमाल के लिए मशीनों और उपकरणों पर होने वाला खर्च छोटे किसानों के लिए आसान नहीं है।

खेती में AI कहां-कहां कर रहा मदद?

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, क्षेत्रीय स्टेशन (रामपुर प्लांडू, झारखंड) के प्रमुख अवनि कुमार सिंह के मुताबिक, AI की मदद से कृषि में अपनाई जाने वाली मशीनों से खेती में बारिश, सूखा, कीट से बचाव और सिंचाई के लिए काफी कारगर है। मौसम केंद्रों से सटीक जानकारी मिलने सक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से निपटने में किसानों को काफी मदद मिलती है। सेंसर के जरिए फसल में रोग, चक्रवात या बारिश से नुकसान और फसलें की कटाई के दौरान नुकसान की आशंका नगण्य रहती है।

AI आधारित मशीनें जलवायु के प्रति संवेदनशील हैं और डेटा सेंसर की मदद से खेती में उपयोगिता बढ़ाई जा सकती है। सिंचाई, कटाई या ड्रोन के जरिए कीटों की निगरानी और खराब मौसम के कारण फसलों को होने वाले नुकसान का आकलन, पारदर्शी तरीके से संभव होता है जो किसानों के लिए बड़ी राहत है। फसल बीमा के लिए किसानों को अब मुआवजे के लिए न तो इंतजार करना पड़ेगा और न ही कम मुआवजा की चिंता सताएगी। एआइ के जरिए गेहूं या किसी अन्य फसल की साइज, रंग और स्वाद को भी जरूरत के मुताबिक बनाया जा सकता है।

क्या AI से किसानों की आय बढ़ेगी?

कृषि विशेषज्ञ दविंदर शर्मा ने कहा, AI से किसानों की आय में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। उन्होंने कहा, इससे मशीनों की बुद्धिमत्ता बढेगी, लेकिन सीमांत किसानों की राह आसान नहीं होगी। उन्होंने ने कहा, उन्नत बीज, मशीनें होने के बाद भी देश का किसान निचले पायदान पर हैं और ऐसे में कृत्रिम मेधा से किसानों की आय में बढ़ोतरी नहीं हो रही है। धान की खेती में पानी की अधिक खपत को कम करने के लिए नए नए तरीके तलाशे जा रहे हैं, लेकिन डेटा सेंटर पर पानी और बिजली की खपत की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।

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‘अन्नम डाट AI’ में कार्यक्रम प्रबंधक दिव्या मोगा ने बताया कि यह डिजिटल एग्रीकल्चर के लिए एआइ आधारित किसानों की समस्याओं का हल है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हम केवल पंजाब के किसानों को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। यहां पढ़िए पूरी खबर