भारतीय रेल में सुरक्षा और परिचालन दक्षता को सुधारने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) और ‘मशीन लर्निंग’ (एमएल) आधारित कई आधुनिक तकनीकों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इन तकनीकों के माध्यम से ट्रेनों, पहियों, पटरियों और ओवरहेड उपकरणों की वास्तविक समय में निगरानी की जा रही है।

वहीं, धुंध और खराब मौसम में लोको पायलटों की मदद के लिए ‘ट्राई-नेत्र’ प्रणाली विकसित की जा रही है। इसमें ऑप्टिकल व इंफ्रारेड कैमरा और रडार/लिडार जैसी तकनीकों का उपयोग कर लोको पायलट को बेहतर दृश्य उपलब्ध कराया जाएगा। रेलवे अधिकारी ने बताया कि मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस) को शुरुआती योजना के आधार पर लागू किया गया है।

यह एआई आधारित सिस्टम चलती ट्रेनों में ढीले, लटके या गायब हिस्सों का पता लगाकर तुरंत सूचना देता है। इसके तहत उत्तर-पूर्वी सीमा रेलवे में तीन, भारतीय समर्पित माल गलियारा निगम में दो और दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में एक सिस्टम लगाया गया है। रेलवे ने व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (डब्ल्यूआईएलडी) के 24 सिस्टम लगाए हैं, जो ट्रेनों के पहियों में खराबी का पता लगाते हैं। वहीं ‘आनलाइन मानिटरिंग आफ रोलिंग स्टाक’ (ओएमआरएस) के 25 सिस्टम लगाए गए हैं।

‘रेल पार्सल’ एप का चल रहा है परीक्षण

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा है कि भारतीय रेल ने देश में माल ढुलाई और पार्सल ढुलाई को मजबूत बनाने के लिए एप की सुविधा की शुरू की है। इसके शुरुआती परिणाम बेहतर हैं। योजना को दक्षिण मध्य रेलवे ने ‘रेल पार्सल’ नामक एप के माध्यम से शुरू किया है। इस एप का परीक्षण हैदराबाद, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा, गुंटूर, राजामुंद्री, बेंगलुरु और चेन्नई सहित सात शहरों के 17 रेलवे स्टेशनों पर किया जा रहा है।