एअर इंडिया के बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के अहमदाबाद में हुए हादसे के शुक्रवार को एक साल हो जाने के बाद भी पीड़ित परिवारों को अपने इन सवालों के जवाब का इंतजार है कि विमान हादसे की वजह क्या थी और जांच किस नतीजे पर पहुंची। जांचकर्ताओं ने इस त्रासदी के कारणों पर अंतिम जांच रिपोर्ट अब तक जारी नहीं की है।

नागर विमानन मंत्री के राममोहन नायडू ने कहा कि एआई-171 विमान दुर्घटना की जांच राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रक्रियाओं के अनुसार पेशेवर तरीके से जारी है। विमान दुर्घटना की जांच करने वाली एजेंसी एआईबी ने भी यही कहा कि विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट, जांच से जुड़ी सभी गतिविधियों, जरूरी अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और परामर्श की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की जाएगी।

विमान में सवार केवल एक यात्री जीवित

लंदन जा रही एआई-171 उड़ान पिछले साल 12 जून की दोपहर हादसे का शिकार हो गई थी। हादसे में 260 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 241 यात्री और चालक दल के सदस्य तथा जमीन पर मौजूद 19 लोग शामिल थे। विमान में सवार केवल एक यात्री जीवित है।

एअर इंडिया की ओर से कहा गया है कि विमान हादसे के 15 पीड़ितों के परिवारों ने निजी सामान लेने से इनकार किया है, जबकि 90 फीसदी परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए की अनुग्रह राशि दी गई। 12 जून को विमान एआई-171 अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल हवाई अड्डे से उड़ान भरने के महज 32 सेकंड बाद बीजे मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर पर गिरा था।

अगले तीन महीनों के भीतर रिपोर्ट आने की संभावना

इस हादसे की विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एआईबी) अब तक अपनी अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं कर पाया है, जबकि जांचकर्ताओं से हादसे के एक साल पूरा होने तक अपनी रिपोर्ट तैयार किए जाने की उम्मीद की जा रही थी। सूत्रों ने बताया कि जांच में देरी हो रही है क्योंकि अधिकारी विमान के जीई एयरोस्पेस इंजन और उससे जुड़े नियंत्रण प्रणालियों से संबंधित अहम सबूतों की जांच जारी रखे हुए हैं और अगले तीन महीनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट आने की संभावना है।

विमान दुर्घटना की जांच करने वाली एजेंसी एआईबी ने कहा कि विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट, जांच से जुड़ी सभी गतिविधियों, जरूरी अंतरराष्ट्रीय समीक्षा और परामर्श की प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी की जाएगी। अगले तीन महीनों के भीतर अंतिम रिपोर्ट आने की संभावना है।

रिपोर्ट को लेकर क्या कहते हैं नियम?

गौरतलब है कि कई दशकों तक भारत में किसी भी घातक विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट 12 महीने के भीतर जारी कर दी जाती थी। लेकिन 2010 में हुए एअर इंडिया एक्सप्रेस के मंगलुरु हादसे के बाद यह परंपरा बदल गई। मंगलुरु हादसे की अंतिम रिपोर्ट 2012 में जारी हुई थी, जबकि 2020 में हुए एअर इंडिया एक्सप्रेस के कोझिकोड (कालीकट) विमान हादसे की अंतिम रिपोर्ट दुर्घटना के 13 महीने बाद सामने आई थी। इससे पहले 2000 के एलायंस एयर पटना हादसे, 1996 के चरखी दादरी मिड-एयर टक्कर, 1993 के इंडियन एयरलाइंस औरंगाबाद हादसे, 1991 के इम्फाल हादसे और 1990 के बेंगलुरु विमान हादसे सहित कई मामलों की अंतिम रिपोर्ट एक साल के भीतर जारी कर दी गई थी।

अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों के अनुसार, किसी विमान हादसे की जांच का उद्देश्य दुर्घटना के कारणों का पता लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना होता है। इसी वजह से ICAO की सिफारिश है कि अगर 12 महीने के भीतर अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं हो पाती, तो दुर्घटना की बरसी पर एक अंतरिम रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए। इसके बाद अंतिम रिपोर्ट आने तक हर साल ऐसी रिपोर्ट जारी की जानी चाहिएअर ए।

हालांकि, भारत ने शुक्रवार को ऐसी कोई अंतरिम रिपोर्ट जारी नहीं की। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने कहा कि उसने सरकार से अंतरिम रिपोर्ट जारी नहीं करने का अनुरोध किया था। संगठन के अध्यक्ष कैप्टन सी.एस. रंधावा ने कहा, “एआई-171 हादसे को लेकर चल रहे विवाद को देखते हुए हमने सरकार से अंतरिम रिपोर्ट जारी न करने का अनुरोध किया था।”

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अहमदाबाद विमान दुर्घटना का शुक्रवार को एक साल पूरा हो गया, लेकिन विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) ने इसको लेकर कोई रिपोर्ट जारी नहीं की। इस तरह ब्यूरो अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) द्वारा निर्धारित अंतिम या अंतरिम रिपोर्ट के लिए 12 महीने की समय सीमा को पूरा करने में विफल रहा। पूरी खबर पढ़ें…