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भुज मंदिर के स्वामी बोले- यदि मासिक धर्म वाली औरतें खाना बनाएंगी तो वह अगले जन्म में @#$% पैदा होंगी

बीते दिनों भुज के श्री सहजनानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट में हॉस्टल में रहने वाली 68 छात्राओं को मासिक धर्म है या नहीं, बाथरूम में उनके अंडरगारमेंट उतरवाकर चेक करने का मामला सामने आया था।

स्वामी करुष्णा दासजी महाराज। (यूट्यूब/वीडियो ग्रैब इमेज)

स्वामीनारायण भुज मंदिर के प्रमुख स्वामी करुष्णास्वरूप दासजी ने अपने एक बयान में मासिक धर्म के दौरान खाना बनाने वाली महिलाओं के लिए अपशब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि यदि मासिक धर्म के दौरान महिला खाना बनाती है तो वह अगले जन्म में @#$% पैदा होंगी। हालांकि स्वामी करुष्णास्वरूप दासजी का यह बयान कई साल पुराना है। एक प्रवचन के दौरान उन्होंने यह बात कही थी। जिसका वीडियो भी सामने आया है।

बता दें कि बीते दिनों भुज के श्री सहजनानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट में हॉस्टल में रहने वाली 68 छात्राओं को मासिक धर्म है या नहीं, बाथरूम में उनके अंडरगारमेंट उतरवाकर चेक करने का मामला सामने आया था। घटना के खुलासे के बाद इसे लेकर काफी हंगामा हुआ था। जिसके बाद इस मामले में इंस्टीट्यूट के प्रिंसीपल समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उल्लेखनीय है कि स्वामी करुष्णास्वरूप दासजी द्वारा ही संचालन किया जाता है।

अहदाबाद मिरर की एक रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में दिखाई दे रहा है कि स्वामी करुष्णास्वरूप दासजी ने कहा कि “एक बार मासिक धर्म वाली महिला के हाथों की रोटी जो व्यक्ति खाता है, वो अगले जन्म में बैल बनता है। वहीं एक बार जो स्त्री मासिक धर्म के दौरान खाना बनाती है तो वह अगले जन्म में @#$% बनती है।”

करुष्णास्वरूप दासजी ने प्रवचन के दौरान लोगों से कहा कि ‘आप जो चाहें वो महसूस कर सकते हैं, लेकिन ये नियम हैं और शास्त्रों में लिखे हैं।’ उन्होंने कहा कि “यह 10 साल में पहली बार है कि मैं आपको सलाह दे रहा हूं। संतों ने कहा था कि अपने धर्म के इन रहस्यों के बारे में नहीं बताना है, लेकिन अगर मैं आपको नहीं बताऊंगा तो आप कभी नहीं समझ पाएंगे।”

श्री सहजानंद गर्ल्स इंस्टीट्यूट की शुरूआत साल 2012 में हुई थी लेकिन साल 2014 में इसे नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया गया था। भुज के स्वामीनारायण मंदिर के धर्मगुरूओं का कहना है कि मासिक धर्म के दौरान महिलाओं को मंदिर और रसोई में जाने की इजाजत नहीं होनी चाहिए। इंस्टीट्यूट में जिन छात्राओं को मासिक धर्म होता था, उन्हें अन्य छात्राओं को छूने की भी मनाही थी।

इस दौरान मासिक धर्म वाली छात्राओं को अन्य छात्राओं से अलग रहना होता था और उन्हें कॉलेज के बेसमेंट में बने कमरों में ठहराया जाता था। छात्राओं की मेस में भी एंट्री बंद थी और उन्हें अलग जगह पर खाना दिया जाता था।

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