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जब भी गुजरात जाते राजीव गांधी, विमान तक मूंगफली-चूड़ा लेकर दौड़ जाते थे अहमद पटेल

अहमद पटेल 1980 से 1984 के बीच राजीव गांधी के करीब आए थे, जब उन्हें इंदिरा गांधी के विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा था।

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के साथ अहमद पटेल। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य सभा सांसद अहमद पटेल को बड़ी जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्हें पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया है। वो 90 साल के बुजुर्ग नेता मोतीलाल वोरा की जगह लेंगे। इससे पहले पटेल राहुल की मां और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे हैं। वो 2001 से इस भूमिका का निर्वाह कर रहे हैं। पटेल गांधी परिवार के खास माने जाते हैं। शायद यही वजह है कि सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ में अहमद पटेल का एक रिजर्व ऑफिस भी है। कांग्रेस के वो ऐसे अकेले नेता हैं जिनका निजी दफ्तर 10 जनपथ में भी है। अहमद पटेल सोनिया गांधी से पहले राजीव गांधी के भी निकट रह चुके हैं। 1985 में वो प्रधानमंत्री राजीव गांधी के संसदीय सचिव थे। अहमद पटेल 1980 से 1984 के बीच राजीव गांधी के करीब आए थे, जब उन्हें इंदिरा गांधी के विकल्प के तौर पर तैयार किया जा रहा था।

बीबीसी के मुताबिक शर्मीले स्वभाव के अहमद पटेल ने राजीव गांधी से भी पहले इंदिरा गांधी का भरोसा जीता था। अहमद पटेल ने इंदिरा गांधी से तब नजदीकियां बढ़ाई थीं, जब 1977 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई थी और इंदिरा गांधी भी हार गई थीं। उस वक्त अहमद पटेल भरूच से सांसद चुने गए थे। उन्होंने अपने साथी सनत मेहता के साथ मिलकर इंदिरा गांधी को भरूच बुलाया था। 1977 के हार की कहानी को जीत में बदलने की पटकथा भरूच में ही लिखनी शुरू हुई थी। इसके बाद पटेल इंदिरा के करीबी लोगों में सामिल हो गए लेकिन कांग्रेस की पहली पंक्ति में बैठने में उन्हें थोड़ा और वक्त लग गया और वो 1980 के आसपास इसमें सफल हुए।

बीबीसी के मुताबिक परिवर्तन की कहानी लिखने वाले गुजरात के दौरे पर जब भी राजीव गांधी जाते तब अहमद पटेल चूड़ा और मूंगफली, सेव और भूसा लेकर उनके विमान तक दौड़ जाते। गांधी परिवार गुजराती खानों को बहुत पसंद करता था। अहमद पटेल धीरे-धीरे गांधी परिवार के और करीब आ गए और जब 1984 के चुनावों में राजीव गांधी 400 सीटें जीतकर पीएम बने तब उन्हें पार्टी में संयुक्त सचिव बनाया गया था। उस वक्त राजीव गांधी 40 साल के थे और अहमद पटेल 35 साल के। बाद में उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया। पटेल तीन बार (1977, 1980, 1984) भरुच से लोकसभा के सांसद चुने गए। उनके बाद से आजतक किसी कांग्रेसी ने वहां से चुनाव नहीं जीता है। गांधी परिवार के वो एक मजबूत सिपहसालार हैं। हालांकि, 2004 से 2014 तक दस सालों के दौरान उन्होंने सरकार में कोई पद नहीं लिया।

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