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अगस्ता वेस्टलैंड मामला: कोर्ट की निगरानी में जांच की याचिका पर सुनवाई को तैयार शीर्ष अदालत

आरोप है कि अगस्त वेस्टलैंड की मूल कंपनी फिनमेक्कानिका ने भारतीय पत्रकारों के एक दल को इटली आतंत्रित किया था।

Author नई दिल्ली | Published on: January 3, 2017 7:32 PM
आईएएस अफसरों ने मौज-मस्ती के लिए सरकारी हेलिकॉप्टर मंगवा लिया। (फाइल फोटो)

सुप्रीम कोर्ट अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला प्रकरण और इस सौदे के सिलसिले में विदेशी हथियारों के सौदागरों से कुछ मीडियाकर्मियों द्वारा कथित रूप से रिश्वत लेने के मामले में अदालती निगरानी में सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय की जांच के लिए दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के लिए मंगलवार (3 जनवरी) को सहमत हो गया। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की पीठ ने जनहित याचिका दायर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार हरि जयसिंह के वकील से कहा कि इसकी प्रतियां गृह मंत्रालय, सीबीआइ और प्रवर्तन निदेशालय को दी जाएं। इस याचिका में कहा गया है कि मामले की जांच कर रहे जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय को अब तक की जांच की प्रगति का विवरण सीलबंद लिफाफे में अदालत में पेश करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कुछ मीडियाकर्मियों के भ्रष्ट आचरण में संलिप्त होने के आरोपों की जांच के लिए शीर्ष अदालत के ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी अन्य प्रबुद्ध व्यक्ति के नेतृत्व में जांच आयोग गठित करने का अनुरोध किया गया है।

वकील जय अनंद देहादराइ के माध्यम से दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि अगस्त वेस्टलैंड की मूल कंपनी फिनमेक्कानिका ने भारतीय पत्रकारों के एक दल को इटली आतंत्रित किया था। जिसका सारा खर्च कंपनी ने वहन किया था। याचिका में मिलान की अपीली अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि अगस्ता वेस्टलैंड की ओर से एक बिचौलिए या एजंट की भूमिका उभर कर सामने आई है। याचिका के अनुसार नई दिल्ली में अगस्ता वेस्टलैंड के प्रतिनिधि के रूप में तैनात एक व्यक्ति को विशेष रूप से यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी कि भारतीय अधिकारियों और भारतीय मीडिया के प्रभावशाली सदस्यों के लिए निर्धारित धन का सुचारू रूप से वितरण किया जाए।

याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह विदेशी और घरेलू रक्षा और इससे संबंधित दूसरे उद्योगों से धन और उनका आतिथ्य स्वीकार करने वाले मीडिया के सदस्यों की वित्तीय स्थिति के बारे में हलफनामे मांगे और इस जानकारी को सार्वजनिक करे। यही नहीं हलफनामे पर अदालत को यह भी बताया जाए कि क्या इस राशि पर कर का भुगतान किया गया है या नहीं। सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडल की समिति ने 2010 में अतिविशिष्ट व्यक्तियों के इस्तेमाल के लिए 12 हेलीकाप्टर खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। लेकिन इससे पहले इस सौदे को हेलीकॉप्टर के मानदंडों में कुछ बदलाव, इनके मूल्यांकन और बातचीत व इन हेलीकॉप्टर को वायु सेना के संचार स्क्वैड्रन द्वारा इस्तेमाल की लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ा था। इस सौदे को बाद में रद्द कर दिया गया था।

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