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इलाज तो करना पड़ेगा, ट्रैक्टरों के साथ अपनी तैयारी रखो- केंद्र की चुप्पी के बीच किसान से बोले राकेश टिकैत

राकेश टिकैत ने ट्वीट कर आंदोलन को तेज करने की बात कही है। रविवार को टिकैत ने लिखा "सरकार मानने वाली नहीं है। इलाज तो करना पड़ेगा। ट्रैक्टरों के साथ अपनी तैयारी रखो। जमीन बचाने के लिए आंदोलन तेज करना होगा।"

राकेश टिकैत ने ट्वीट कर आंदोलन को तेज करने की बात कही है।(express file photo)

कोरोना संकट के बीच केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। राजधानी दिल्ली से सटी सीमाओं पर पिछले 200 दिन से भी ज्यादा समय से किसान आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन अब तक सरकार और किसान नेताओं के बीच बात नहीं बनी है। किसान एमएसपी पर कानून और तीनों कृषि कानून रद्द करने की अपनी मांग पर आड़े हुए हैं।

इसी बीच भारतीय किसान यूनियन (BKU) के नेता राकेश टिकैत ने ट्वीट कर आंदोलन को तेज करने की बात कही है। रविवार को टिकैत ने लिखा “सरकार मानने वाली नहीं है। इलाज तो करना पड़ेगा। ट्रैक्टरों के साथ अपनी तैयारी रखो। जमीन बचाने के लिए आंदोलन तेज करना होगा।” इससे एक दिन पहले भी टिकैत ने कहा था कि केंद्र सरकार यह गलतफहमी अपने दिमाग से निकाल दे कि किसान वापस जाएगा। किसान तभी वापस जाएगा, जब मांगें पूरी हो जाएंगी। हमारी मांग है कि तीनों कानून रद्द हों। एमएसपी पर कानून बने।

किसान नेता के इस ट्वीट पर कुछ यूजर्स ने भी अपनी प्रतिकृया दी है। जीवन नाम के एक यूजर ने लिखा “कोन सी सरकार कि बात कर रहे हो आप। छत्तीसगढ़ तो हो ही नहीं सकती, क्योंकि कांग्रेस का नाम आते ही दिल्ली में बेठे किसानों को सांप सूंघ जाता है।”

एक यूजर ने लिखा “भाजपा सरकार द्वारा किसानों की बात नही सुनी जा रही है। हमारे देश के लिए अफसोस की बात है। किसान सड़कों पर है ओर नेता महलो में है।” एचआर सिमन नाम के एक यूजर ने लिखा “बीजेपी राज में ऐसा कोई कानून ही नही बना,जिसका सभी देशवासियों ने दिल खोल के स्वागत किया हो। क्योकि बीजेपी की सभी योजनाएं आरएसएस संचालित करता है और आरएसएस सबके सामने है क्या चाहता है। दिल्ली में आरएसएस और बीजेपी की मीटिंग इस बात का सबूत है आंदोलन में गतिरोध तेज होगा किसान दुगना प्रतिरोध करे।”

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कुछ दिन पहले कहा था कि सरकार किसानों से बातचीत करने के लिए तैयार है। लेकिन कानून रद्द नहीं किए जाएंगे। तोमर ने कहा था कि यदि किसान किसी भी तरह का संशोधन चाहते हैं तो फिर मैं उसका स्वागत करूंगा। लेकिन कानून रद्द नहीं होंगे।

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