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70 साल तक जब लूटे जा रहे थे किसान, तब किसी ने नहीं किया प्रदर्शन, जिनकी दुकानें हुईं बंद वे मचा रहे शोर- बोले कृषि विशेषज्ञ

कृषि विशेषज्ञ ने कहा कि ये एमएसपी और नए तमाशे इसलिए लाए गए हैं, ताकि पूरा कानून ही डीरेल हो जाए।

farmers rally, dilli chalo, delhi metroपंजाब और हरियाणा के किसानों ने हाल ही में कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली कूच किया।

पंजाब और हरियाणा के किसानों की ओर से कृषि कानून के खिलाफ दिल्ली तक मार्च निकाले जाने के बाद देश में एक बार फिर माहौल गर्मा गया है। दरअसल, केंद्र सरकार पर आरोप लग रहा है कि वह नए कानूनों को लागू कर किसानों की अनदेखी कर रही है। विपक्ष का कहना है कि नए प्रावधानों में उद्योगपतियों का फायदा है और किसानों को लूटा जाएगा। हालांकि, इस पर एक कृषि विशेषज्ञ ने कहा कि किसान जब पिछले 70 साल से लूटे जा रहे थे, तब कहीं प्रदर्शन नहीं हुआ। अब जिनकी दुकानें बंद हो रहीं, शोर वे लोग मचा रहे हैं।

क्या कहा था कृषि विशेषज्ञ ने?: एक टीवी चैनल की डिबेट में कृषि कानून पर बहस के दौरान जब कृषि विशेषज्ञ विजय सरदाना ने कहा, “आप 50 रुपए सब्जी के देते हैं, किसान के पास महज 5 रुपए पहुंचते हैं। यह बीच के 45 रुपए कौन रखता है, किसान का हक कौन मारता था। पिछले 70 सालों में इस पर कभी बहस क्यों नहीं हुई। जब पिछले 70 सालों से किसानों को लूटा जा रहा था, तब तक ये लोग (विपक्ष) चुप थे। मोदी सरकार ने सिर्फ एक कानून पास किया कि अगर किसानों को मंडी के अंदर उचित मूल्य नहीं मिल रहा, तो वे उसे बाहर भी बेच सकते हैं। ये एमएसपी और नए तमाशे इसलिए लाए गए हैं, ताकि पूरा कानून ही डीरेल हो जाए।”

कृषि विशेषज्ञ की इस बात पर कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे भड़क गए। उन्होंने एनडीए शासित बिहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सबसे बुरी स्थिति बिहार के किसानों की है। हालांकि, इस पर भी कृषि विशेषज्ञ ने कहा कि अगर बिहार का किसान परेशान था, तो पंजाब का किसान सड़कों पर क्यों है। आपको भी पता है कि बिहार में किसान को स्वतंत्रता है। सरदाना ने बताया कि पर यूनिट एरिया के हिसाब से बिहार में किसानों की इनकम सबसे ज्यादा है।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कृषि कानूनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर समर्थन मूल्य को अनिवार्य कर दें तो क्या दिक्कत है। इस पर कृषि विशेषज्ञ ने कहा कि समर्थन मूल्य किस क्वालिटी का चाहिए, वह भी तय करना चाहिए। आपका जो 90 फीसदी माल आता है खेतों से, वह न खाने लायक होता है, न प्रोसेसिंग लायक होता है, उसे तैयार करना पड़ता है। आप एमएसपी की क्वालिटी बोलिए।

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