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2014 चुनाव में NDA में थे 29 दल, 2019 में रह गए 21; अकाली एक मात्र संस्थापक दल जो लगातार है साथ

शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को कहा, "हम पंजाब जाएंगे जहां पार्टी की लीडरशिप की बैठक होगी। हम सबके साथ बात करेंगे। पंजाब के किसान तीन अध्यादेशों के विरोध में सड़कों पर हैं। अकाली दल किसानों की पार्टी है।"

Author Edited By अभिषेक गुप्ता नई दिल्ली | Updated: September 19, 2020 4:40 PM
Agriculture Bills, NDA, National Democratic Alliance, BJP, SADNDA के पुराने साथियों में से एक SAD ने किसानों के मुद्दे पर बागी तेवर अपनाए हैं। (एक्सप्रेस आर्काइव फोटो)

National Democratic Alliance (NDA) में साल 2014 में 29 दल थे, पर वर्ष 2019 में 21 ही रह गए। फिलहाल इसमें 26 दल हैं, पर टूट का डर बरकरार है। ऐसा इसलिए, क्योंकि किसानों से जुड़े तीन बिलों को लेकर Shiromani Akali Dal (SAD) अड़ा है। मोदी सरकार में अकाली दल की इकलौती मंत्री हरसिमरत कौर बादल के इस्तीफे और फिर उनकी पार्टी के तेवरों के बाद से NDA में टूट की आशंका को बल मिला है।

BJP के साथ गठबंधन में पहले दिन से रहने वाला अकाली दल किसानों के मुद्दे पर अब पार्टी से खफा है। चूंकि, पंजाब में इस पार्टी का बड़ा आधार किसान है। ऐसे में कहा जा रहा है कि यह अन्नदाताओं के लिए NDA से अलग हो सकता है। शनिवार को पार्टी चीफ सुखबीर सिंह बादल ने साफ भी कर दिया कि जब तक केंद्र सरकार इन बिलों को वापस नहीं लेती, तब तक कोई बातचीत संभव नहीं है।

‘जब रद्द नहीं होते बिल, तब तक केंद्र से नहीं होगी कोई बात’: शिरोमणि अकाली दल के सुखबीर सिंह बादल ने शनिवार को कहा, “हम पंजाब जाएंगे जहां पार्टी की लीडरशिप की बैठक होगी। हम सबके साथ बात करेंगे। पंजाब के किसान तीन अध्यादेशों के विरोध में सड़कों पर हैं। अकाली दल किसानों की पार्टी है, इसलिए हम सबसे आगे होकर संघर्ष करेंगे।” आगे सरकार से बात करने के सवाल पर उन्होंने पत्रकारों को साफ कर दिया कि जब तक ये (अध्यादेश) रद्द नहीं होते कोई बात नहीं हो सकती है।

‘अटल काल का NDA था अलग, पर अब’, बोली शिवसेनाः इसी बीच, महाराष्ट्र में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली Shiv Sena ने मोदी सरकार की नीतियों पर सवालिया निशान लगाए हैं। अर्थव्यवस्था, कारोबार और कृषि के मुद्दे को मुखपत्र ‘Saamana’ में आधार बनाते हुए कहा है कि अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के काल में एनडीए अलग था, क्योंकि वे लोग घटक दलों से साथ ‘अच्छा सलूक’ करते थे। वे उनका सम्मान करते थे और चीजों पर परामर्श करते थे।

1998 में गठन, अब तक 6 बार मिलकर लड़े हैं घटक दलः बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने साल 1998 में एनडीए का गठन किया था। अटल बिहारी वाजपेयी चेयमैन रहे, जबकि मौजूदा समय में अमित शाह इस पद पर हैं। एनडीए की सहयोगी पार्टी अब तक मिलकर साथ में छह आम (लोकसभा) चुनाव लड़ चुकी हैं। शुरुआत में इसमें भाजपा, अन्नाद्रमुक, समता पार्टी, बीजद, अकाली दल, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना, पीएमके, लोक शक्ति, एमडीएमके, हरियाणा विकास पार्टी, जनता पार्टी, मिजो नेशनल फ्रंट और एनटीआर टीडीपी एलपी शामिल थीं।

मोदी के PM बनने के बाद 5 साल में 16 पार्टियां हुईं NDA से अलगः गुजरात के मुख्यमंत्री रह चुके नरेंद्र मोदी जब बीजेपी के पीएम कैंडिडेट घोषित हुए थे, उस वक्त एनडीए में 29 दल थे। 2014 के चुनाव के बाद भी कई और पार्टी गठबंधन में आईं, पर मोदी के बतौर पीएम ताजपोशी के बाद 5 साल में 16 पार्टियां धीमे-धीमे कर के अलग हो गईं। वहीं, 2019 में एनडीए में 21 पार्टियां थीं। (पीटीआई, एएनआई इनपुट्स के साथ)

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