Agniveer Pension Rights: केंद्र की मोदी सरकार ने बॉम्बे हाई कोर्ट में दायर हलफनामे में स्पष्ट किया है कि अग्निवीर नियमित सैनिकों की श्रेणी में नहीं आते हैं। ऐसे में युद्ध या किसी सैन्य कार्रवाई के दौरान उनकी मृत्यु होने पर उनके परिवार को सामान्य सैनिकों की तरह पेंशन का लाभ नहीं दिया जा सकता।
केंद्र सरकार ने यह हलफनामा तब दायर किया जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में मारे गए अग्निवीर मुरली नाइक की मां ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि अग्निवीर भी नियमित सैनिकों की तरह अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। उन्हें भी उन्हीं खतरों का सामना करना पड़ता है जिनका सामना दूसरे सैनिक करते हैं। ऐसे में उनके परिवारों को दीर्घकालिक पेंशन और दूसरी कल्याणकारी योजनाओं से वंचित नहीं रखा जाना चाहिए।
सरकार ने हलफनामे में क्या बताया?
इस याचिका के जवाब में केंद्र सरकार ने हलफनामा दाखिल किया। हलफनामे में सरकार ने कहा कि नियमित सैनिकों और अग्निवीरों का वर्गीकरण संवैधानिक रूप से वैध है। सरकार ने अग्निवीर योजना को एक अल्पकालिक भर्ती योजना बताया। उनके मुताबिक राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस योजना को तैयार किया गया था।
सरकार ने इस बात पर भी जोर दिया कि अग्निवीरों की सेवा अवधि सिर्फ चार साल की होती है। ऐसे में उनकी तुलना नियमित सैनिकों से नहीं की जा सकती। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि नियमित सैनिकों को मिलने वाली पेंशन उनकी लंबी सेवा अवधि से सीधे तौर पर जुड़ी होती है। इसलिए दोनों अलग-अलग श्रेणियों के लोगों के बीच समानता की उम्मीद नहीं की जा सकती।
केंद्र ने यह भी कहा कि इस मामले में समानता के अधिकार का कोई उल्लंघन नहीं हो रहा है। सरकार के मुताबिक सशस्त्र बलों के लिए अलग कानूनी व्यवस्था लागू होती है। सरकार ने यह भी बताया कि शहीद अग्निवीरों के लिए मुआवजे की राशि तय की गई है और उन्हें पूरा सम्मान भी दिया जाता है।
शहीद मुरली नाइक को लेकर क्या बोली सरकार?
अग्निवीर मुरली नाइक का जिक्र करते हुए सरकार ने बताया कि उनके परिवार को 2.3 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है। सरकार ने उन्हें ‘युद्ध में मारे गए’ घोषित किया है। साथ ही उनका अंतिम संस्कार पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया था। उनके परिवार को रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर की तरफ से शोक पत्र भी दिया गया। सरकार के अनुसार, अग्निवीर योजना के तहत बीमा कवर, मुआवजा और दूसरी आर्थिक सहायता भी परिवार को उपलब्ध कराई गई हैं।
दरअसल, केंद्र सरकार ने यह हलफनामा तब दाखिल किया जब हाई कोर्ट ने उसे कड़ी फटकार लगाई थी। यह मामला पिछले साल से लंबित था और सरकार की तरफ से याचिका पर कोई जवाब नहीं दिया जा रहा था। इसी वजह से बॉम्बे हाई कोर्ट ने 6 मई तक का अल्टीमेटम दिया था। अदालत ने यह भी कहा था कि अगर हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो सरकार पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। इसी चेतावनी के बाद केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर किया और साफ कर दिया कि अग्निवीरों और नियमित सैनिकों को एक समान नहीं माना जा सकता।
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