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बिना जल्लाद के दी गई थी अफजल गुरु को फांसी, नाराज हो गए थे पवन जल्लाद

CRIME TAK की रिपोर्ट के मुताबिक, तिहाड़ जेल में फांसी देने का काम कालू और फकीरा नाम के जल्लाद करते थे। लेकिन दोनों की मौत हो चुकी थी। तिहाड़ प्रशासन ने तय किया कि अफजल का केस हाईप्रोफाइल केस है। इसलिए किसी नए जल्लाद को काम नहीं सौपेंगे।

tihar jail, afjal guru, pawan jallad, congress government, attack on parliamentपवन जल्लाद (फोटोः स्क्रीनशॉट यूट्यूब वीडियो)

आतंकी अफजल गुरु को फांसी देने का काम तिहाड़ जेल प्रशासन के एक अफसर ने किया था। मेरठ के पवन जल्लाद को जब यह पता चला तो वह नाराज हो गए थे। इसकी एक खास वजह यह है कि पवन पुश्तैनी जल्लाद है और कई पीढ़ियों से उसने फांसी देने का काम सीखा है। ऐसे में उसके जरिए किसी गलती की गुंजाइश नहीं है। उसके परदादा ने भगत सिंह को फांसी पर लटकाया थी, जिसकी टीस आज तक उसके परिवार को है।

CRIME TAK की रिपोर्ट के मुताबिक, तिहाड़ जेल में फांसी देने का काम कालू और फकीरा नाम के जल्लाद करते थे। लेकिन दोनों की मौत हो चुकी थी। तिहाड़ प्रशासन ने तय किया कि अफजल का केस हाईप्रोफाइल केस है। इसलिए किसी नए जल्लाद को काम नहीं सौपेंगे। तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे को यह बात बताई गई तो उन्हें यह अटपटा लगा कि फांसी का काम कोई जेल मुलाजिम करेगा। हालांकि बाद में वह मान गए। 8 फरवरी की रात तक अफजल को पता ही नहीं था कि उसे फांसी होने वाली है।

8 फरवरी की रात को उसकी सेल बदल दी जाती है। तिहाड़ के लॉ अफसर सुनील गुप्ता सरकार के एक अधिकारी को सारा ब्योरा देते हैं और फिर वापस लौटकर फांसी की तैयारी शुरू कर देते हैं। रात को फांसी देने की रिहर्सल होती है। 2005 में अफजल को फांसी देने के लिए बक्सर जेल से मनीला रस्सी मंगाई गई थी। उसकी कीमत 860 रुपये थी। हालांकि अदालत में मर्सी पटीशन लगी होने की वजह से तब उसे फांसी नहीं दी जा सकी थी। रात में रिहर्सल की गई तो दोनों ही बार रस्सी टूट गई। तीसरी कोशिश में रस्सी नहीं टूटी तो ट्रायल पूरा हो गया।

उधर, अफजल इन सारी बातों से बेखबर अपनी सेल में सो रहा था। 9 फरवरी की सुबह अफजल जब सोकर उठता है तो जेल प्रशासन बताता है कि आज ही उसे फांसी दी जाएगी। अफजल जवाब देता है कि उसे पता है। उसके बाद वह गाना गाना शुरू कर देता है, “अपने लिए जिए तो क्या जिए…तू जी ऐ दिल जमाने के लिए।” इस गाने को मन्ना डे ने गाया था और लिखा था जावेद अख्तर ने। बादल फिल्म में इसे संजीव कुमार पर फिल्माया गया था। अफजल के साथ तब सुनील गुप्ता ने भी ये गाना गाया था।

फांसी वाले दिन सुबह अफजल गुरु ने कहा, वह कश्मीरी अलगाववादी नहीं है। वह सिर्फ भ्रष्ट नेताओं की जान लेना चाहता था। इसके बाद उसने गाना गाया। ये गाना उसने पूरा गाया। उसने चाय मांगी, लेकिन उस दिन चाय बनाने वाला चला गया था। अफजल आखिरी बार चाय भी नहीं पी पाया। फांसी पर लटकाने के दो घंटे बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित किया। अफजल को मकबूल बट्ट के बगल में ही दफनाया गया था अफजल गुरु 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था, जिसे 9 फरवरी 2013 को फांसी पर लटकाया था। जब अफजल को फांसी पर लटकाया गया, तब वहां सुनील गुप्ता भी मौजूद थे। सुनील गुप्ता तिहाड़ जेल में लॉ अफसर थे और 1981 से 2016 तक रहे।

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