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JNU row: ऐश्वर्य को मिली सजा लेकिन रिपोर्ट में नाम का जिक्र नहीं

जवाहर लाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने गुरुवार को कहा कि वह जांच कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर विचार नहीं किया है।

Author नई दिल्ली | March 18, 2016 4:32 AM
(Jnu Row File Photo)

जवाहर लाल नेहरू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने गुरुवार को कहा कि वह जांच कमेटी की रिपोर्ट को स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि प्रशासन ने छात्रों की मांगों पर विचार नहीं किया है। छात्र संघ की उपाध्यक्ष शहला राशिद ने जांच कमेटी में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग करने वाला प्रस्ताव रखा जिसे बुधवार को पारित किया गया। जेएनयूएसयू ने कहा कि छात्र संघ की मांग के बावजूद आरोपी छात्रों को अभी तक पूरी रिपोर्ट नहीं सौंपी गई है। छात्र संघ ने कहा कि आरोपी छात्रों को यह नहीं बताया गया है कि उनके खिलाफ आरोप क्या हैं। इस पक्षपातपूर्ण जांच पर हम किसी भी प्रकार की अनुशासनिक कारर्वाई का विरोध करेंगे। विश्वविद्यालय के कुलपति एम जगदीश कुमार की ओर से गठित जांच कमेटी ने संसद पर हमले के दोषी अफजल गुरु की बरसी मनाने के लिए पिछली नौ फरवरी को आयोजित कार्यक्रम के दौरान 21 छात्रों को विश्वविद्यालय के नियमों और मानदंडों का उल्लंघन करने का दोषी पाया गया है। विश्वविद्यालय के मुख्य प्राक्टर के दफ्तर से छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
इस नोटिस का जवाब देने की अवधि को शुक्रवार तक के लिए बढ़ा दिया गया था। जवाहर लाल नेहरू (जेएनयू) के अफजल गुरु विवाद पर उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने नोटिस भेजे गए छात्रों को जवाब न देने से 48 घंटे का समय और दे दिया गया है। जिन 21 छात्रों को जेएनयू के नियम के उलंधन का दोषी पाकर कारण बताओ नोटिश जारी किया था , उन्हें पहले बुधवार तक जवाब देने थे। लेकिन अब जेएनयू प्रशसन ने इसे बढा दिया। अब उन्हें 18 मार्च तक जवाब देना है।

अफजल गुरु विवाद के सिलसिले में जेएनयू की छात्रा ऐश्वर्य अधिकारी को निलंबित कर दिया गया और उसे कारण बताओ नोटिस भी थमाया गया, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से गठित उच्च-स्तरीय जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहीं उसके नाम का जिक्र तक नहीं किया है। इस चूक ने छात्रों और जेएनयू शिक्षक संघ को नाराज कर दिया है और अब उन्होंने समिति की ओर से की गई जांच को अलोकतांत्रिक करार देते हुए इसके निष्कर्षों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया है।

एमए की छात्रा ऐश्वर्य यौन उत्पीड़न संबंधी शिकायतों की सुनवाई करने वाली संस्था ‘जीएसकैश’ यानी जेंडर सेंसिटाइजेशन कमिटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरेसमेंट की निर्वाचित सदस्य हैं और उन आठ छात्रों में शामिल हैं जिन्हें समिति की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के बाद शैक्षणिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से रोक दिया गया था। इन छात्रों का निलंबन पिछले 11 मार्च को समिति की ओर से दी गई अंतिम रिपोर्ट के बाद वापस ले लिया गया था।

ऐश्वर्य ने कहा, ‘शुरू से ही, हमें इस समिति के गठन और कामकाज पर ऐतराज था। प्रारंभिक रिपोर्ट में मुझे दोषी पाया जाता है। मुझे निलंबित कर दिया जाता है। फिर मुझे कारण बताओ नोटिस देकर पूछा जाता है कि मुझे सजा क्यों न दी जाए। और अब जांच रिपोर्ट में कहीं भी मेरे नाम का जिक्र नहीं है। फिर मेरा अपराध क्या है? मुझे बताना क्या है? इस अलोकतांत्रिक जांच की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली चीजें हैं’।
दूसरी ओर जेएनयू परिसर में नौ फरवरी को हुए विवादित आयोजन का विरोध कर चुके छात्र संगठन एबीवीपी के सदस्यों ने मामले की जांच रिपोर्ट को दबाव में तैयार किया गया बताते हुए उस पर दोषियों को आरोपित करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया।

जेएनयू छात्र संघ के संयुक्त सचिव और संघ में एबीवीपी के अकेले सदस्य सौरभ कुमार ने कहा, ‘हम उच्च स्तरीय समिति की रिपोर्ट को लेकर निराश हैं क्योंकि वह नौ फरवरी की घटना के दोषियों को आरोपित करने में नाकाम रही है। हमारा मानना है कि समिति वामपंथी शिक्षकों, परिसर के छात्र संगठनों और साथ ही राहुल गांधी, सीताराम येचुरी, आनंद शर्मा, डी राजा वगैरह जैसी बाहरी राजनीतिक ताकतों के दबाव में आ गई’।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘हमारा मानना है कि समिति राजनीतिक दबाव में कन्हैया और निलंबित किए गए दूसरे छात्र प्रतिनिधियों के दोष को पहचानने में नाकाम रही। समिति साथ ही कर्तव्य की उपेक्षा के लिए सुरक्षा इकाई को आरोपित करने में भी नाकाम रही’।
कुछ शिक्षकों पर छात्रों को बचाने का आरोप लगा रही एबीवीपी ने कहा, ‘समिति इस आयोजन और साथ ही उसके बाद की घटनाओं में शामिल कुछ शिक्षकों की भूमिका की जांच करने में नाकाम रही।

वह हैरानी भरे तरीके से इस विशेष पहलू की जांच से दूर रही’। विश्वविद्यालय की एक उच्च स्तरीय समिति के ‘विश्वविद्यालय के नियमों एवं अनुशासन के उल्लंघन’ का दोषी पाए जाने के बाद पिछली 14 मार्च को 21 छात्रों को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह बताने को कहा गया था कि उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों ना की जाए। ग्यारह मार्च को पांच सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंपी थी जिसमें कुछ छात्रों और साथ ही प्रशासन की तरफ से हुई गलतियों की बात कही गई थी।

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