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अब कलाकार बरसे मोदी सरकार पर

साहित्य अकादेमी सहित साहित्यिक पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों के साथ एकजुटता जताते हुए देश के जानेमाने कलाकारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा है..

साहित्य अकादेमी सहित साहित्यिक पुरस्कार लौटाने वाले लेखकों के साथ एकजुटता जताते हुए देश के जानेमाने कलाकारों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करते हुए कहा है कि बुद्धिजीवियों और अल्पसंख्यकों पर हाल ही में हुए हमलों की घटनाओं की सरकार ने साफ तौर पर निंदा नहीं की है।

सफदर हाशमी मेमोरियल ट्रस्ट (सहमत) की ओर से यहां जारी 400 से अधिक कलाकारों के हस्ताक्षर वाले बयान में कहा गया है कि आम नागरिकों पर हमलों और सामाजिक हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। इन कलाकारों में विवान सुंदरम, अंजली इला मेनन, अनीश कपूर, केजी सुब्रमण्यम, नीलिमा शेख और कृष्णन खन्ना, सुबोध गुप्ता आदि शामिल हैं जिन्होंने अपील और विरोध, अभिव्यक्ति और अस्वीकार करने के अनेक प्रारूपों के माध्यम से विभाजनकारी शक्तियों को चुनौती देने की बात कही।

बयान के मुताबिक, सरकार में बैठे लोगों की धार्मिक अल्पसंख्यकों और दलितों के बारे में की गई अवमाननापूर्ण टिप्पणियां इस बात की पुष्टि करती हैं कि संघ-भाजपा की मुख्यधारा और इन संभावित तत्त्वों के बीच मामूली अंतर है। बयान में कहा गया – कलाकारों ने एमएम कलबुर्गी, नरेंद्र दाभोलकर और गोविंद पानसरे की हत्याओं की निंदा की है। उन्होंने दिवंगत चित्रकार एमएफ हुसेन के लिए लड़ी लड़ाई का भी जिक्र किया।

बयान के मुताबिक, सरकार ने एफटीआइआइ सोसायटी में अयोग्य लोगों की नियुक्ति की। जो सरकार मतभेदों को सहन नहीं कर सके, जो वंचित और कमजोर लोगों के जीवन और हितों की सुरक्षा नहीं कर सके, वह लोकतांत्रिक शासन-व्यवस्था में अपनी वैधता खो देती है। इस परिस्थिति का हम अब सामना कर रहे हैं।

उन्होंने कहा- सत्तारूढ़ पार्टी को प्रदर्शनकारियों के सरकार के प्रति असंतोष को समझना होगा। यह सरकार लूटमार करने वाले संगठनों को सांस्कृतिक तौर पर विविधता वाले इस देश में दमनकारी फरमान लागू करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

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